Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाभारत में युवाओं की भर्ती कर रहे हैं अलकायदा और तहरीक-ए-तालिबान: NIA ने चार...

भारत में युवाओं की भर्ती कर रहे हैं अलकायदा और तहरीक-ए-तालिबान: NIA ने चार राज्यों में की छापेमारी, कई संदिग्ध वस्तुएँ बरामद

इसी तरह जुलाई मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकी संगठन ‘अल सुफ़ा’ से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान जयपुर को दहलाने की साजिश रचने वाले आतंकी इमरान खान की संपत्ति जब्त कर उस पर कुर्की नोटिस चस्पा किया था। 

भारत में आतंक की फैक्ट्री तैयार करने के लिए आतंकी संगठन पूरी जी-जान से जुटे हुए हैं। हालाँकि, NIA उनके मंसूबों पर लगातार पानी फेर रहा है। NIA ने अपने समूह में भारतीय युवाओं की भर्तियाँ करने की कोशिश कर रहे अल-कायदा (AQIS) और तहरीक-ए-तालिबान (TeT) के मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।

इसके स्लीपर सेल को पकड़ने के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 1 सितंबर 2023 यानी शुक्रवार को चार राज्यों में 6 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान NIA ने कई भड़काऊ और आपत्तिजनक सामान बरामद की हैं। कुछ डिवाइस भी मिले हैं, जिनकी जाँच की जा रही है।

चार राज्यों में 6 ठिकानों पर छापेमारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनआईए ने महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में छापेमारी की। महाराष्ट्र में तीन स्थानों पर और अन्य राज्यों में एक-एक स्थानों पर छापेमारी की गई है। इस दौरान कई भड़काऊ डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं। एनआईए की जाँच में इस बात का पता चला है कि ये आर्थिक रुप से कमजोर युवाओं को निशाने पर लेते थे और अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं।

ये छापेमारी इन दोनों आतंकी संगठनों से जुड़े दो आरोपितों से पूछताछ के आधार पर की गई है। इन दोनों आतंकियों को अप्रैल 2023 में एनआईए ने गिरफ्तार किया था। तब से उसकी जाँच जारी है। ये दोनों आरोपित आंतकी गतिविधियों में शामिल थे। इसके अलावा, ये अफगानिस्तान में जमीन खरीदने के लिए विदेश में फंड ट्रांसफर करने में भी शामिल थे।

पहले भी एनआईए ने की थी बड़ी कार्रवाई

बता दें कि अप्रैल-मई माह में भी एनआईए ने आतंकी संगठनों और स्थानीय तस्करों के बीच के गठबंधन को तोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था। एनआईए ने 17 मई को हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 100 से ज्यादा स्थानों पर छापेमारी की थी। इसमें अकेले दिल्ली-एनसीआर में 32 स्थानों पर छापा मारा गया था, तो पंजाब के अलग-अलग इलाकों और चंडीगढ़ मिलाकर टीम ने 67 जगहों पर तलाशी अभियान चलाया गया था।

एनआईए को मिले इनपुट्स के अनुसार आतंकी-गैंगस्टर-ड्रग तस्कर नेटवर्क देश में अवैध हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी का काम भी करते हैं। यह नेटवर्क सरहद पर पाकिस्तान से हथियार हासिल कर देश के अन्य राज्यों में पहुँचाने का भी काम करता है। हथियारों के अलावा इस नेटवर्क का इस्तेमाल नशे के सामान की आपूर्ति के लिए भी किया जाता है।

इसी तरह जुलाई मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकी संगठन ‘अल सुफ़ा’ से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान जयपुर को दहलाने की साजिश रचने वाले आतंकी इमरान खान की संपत्ति जब्त कर उस पर कुर्की नोटिस चस्पा किया था। 

अल सुफा ISIS से प्रेरित आतंकी संगठन है। साल 2012 में इस रतलाम से ही इसकी शुरुआत हुई थी। उस समय इसमें 40-50 आतंकी थे, लेकिन बाद में इस्लाम के नाम पर मुस्लिम युवाओं को बरगलाकर यह संख्या बढ़ाने की कोशिश की गई।

इस संगठन के लोगों ने साल 2014 में रतलाम के महू रोड बस स्टैंड पर बजरंग दल के नेता कपिल राठौड़ और उनकी होटल पर काम करने वाले पुखराज की हत्या कर दी थी। सितम्बर 2017 में इसी से जुड़े लोगों ने रतलाम में ही तरुण सांखला की गोली मार कर हत्या कर दी थी। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आतंकियों तक आधार पहुँचाने की साजिश किसकी? MP के ‘क्लोन Aadhar मशीन’ मामले ने बढ़ाई चिंता, अन्य राज्यों में भी फर्जी पंजीकरण के नेटवर्क...

मध्य प्रदेश के क्लोन आधार मशीन मामले के बाद जानिए, क्या दूसरे राज्यों में भी आधार पंजीकरण में ऐसी गड़बड़ियाँ सामने आई हैं।

बीमारी के बहाने निशाने पर भारत… BBC ने ’38 परजीवी’ के सहारे 19 साल पुरानी घटना पर किया बदनाम: पढ़ें- कैसे पश्चिमी मीडिया ने...

BBC ने रिपोर्ट में लिखा कि भारत घूमने आई महिला के दिमाग में 38 परजीवी मिले। यह दावा न तो मेडिकल साइंस के हिसाब से सही और न इसमें कोई सच्चाई।
- विज्ञापन -