उत्तर प्रदेश के लखनऊ के सरोजिनी नगर में जहाँ कभी पहले लैंब्रेटा बनाने वाला स्कूटर इंडिया की फैक्टरी हुआ करती थी, वहाँ अब लोगों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल बसें बनाई जा रही हैं। यह कर रहा है- अशोक लेलैंड। 9 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अशोक लेलैंड के स्मार्ट इलेक्ट्रिक बसों के प्लांट का उद्घाटन करने वाले हैं।
अशोक लेलैंड का यह प्लांट महज 16 महीनों में ही बनकर तैयार हो गया है और यह अपने आप में ही एक उपलब्धि है। अशोक लीलैंड के लखनऊ के ईवी प्लांट के बारे में हिंदूजा ग्रुप के कॉरपोरेट और सेल्स के अध्यक्ष एस के चढ्ढा बताते हैं कि आमतौर पर इस तरह के प्लांट को बनाने में 38 से 40 महीने लग जाते हैं लेकिन इसे 16 महीना में पूरा करने का पूरा श्रेय सीएम योगी की सरकार की सहायता और उनके दृढ़ निश्चय को जाता है।
लगभग 2 साल पहले हमने उत्तर प्रदेश में इस प्लांट का सपना देखा था और अब वह सच हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों का ही सबसे बड़ा योगदान रहा है।
योगी सरकार के इंडस्ट्रियल पॉलिसी के कारण ही अशोक लेलैंड ने उत्तर प्रदेश में इंडस्ट्री लगाने पर विचार किया। 2023 में योगी सरकार के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद अशोक लेलैंड को योगी सरकार ने सरोजिनी नगर में 70 एकड़ की जमीन आवंटित की।
यह जमीन इससे पहले स्कूटर इंडिया के पास थी। वह फैक्ट्री बंद हुई तो जमीन खाली हो गई और योगी सरकार ने 75% लैंड सब्सिडी के साथ इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल का प्लांट लगाने के लिए यह जमीन अशोक लेलैंड को दे दी।

चड्ढा बताते हैं कि कई जगहों को देखने के बाद ईवी प्लांट के लिए इस जगह को सुनिश्चित किया गया। चड्ढा कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृढ़ इच्छा शक्ति और उनकी कमिटमेंट के चलते ही हिंदूजा ग्रुप नाम अशोक लीलैंड को यहाँ पर शुरू करने को लेकर सकारात्मकता मिली।
15 सितंबर 2023 में अशोक लेलैंड का उत्तर प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। इसके बाद फरवरी 2024 में भूमि पूजन के साथ ही प्लांट का निर्माण शुरू हो गया। 16 महीने में इस परियोजना को पूरा कर अशोक लेलैंड ने एक नया इतिहास रचा है कि हमारे समूह के लिए यह एक ऐतिहासिक मौका है।
गुंडा राज में लगता था डर
एसके चढ्ढा बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में यह हमारा पहला प्लांट है। इससे पहले यहाँ प्लांट बनाने की बात से काफी डर लगता था। इसके पीछे असुरक्षा, निर्माण कार्य को रोकने, काम में बढ़ा डालने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
योगी सरकार के आने के बाद यहाँ की विकास योजनाएँ, प्रयागराज का कुंभ मेला का प्रबंधन और अन्य विकास के काम को देखा और इसके बाद ही लखनऊ में प्लांट लगाने का निर्णय शुरू किया गया। इस प्लांट के पहले चरण में 2500 बसों का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद इसकी संख्या को बढ़ाकर 5000 और फिर 10000 तक की जाएगी।

इसके चढ्ढा बताते हैं कि इस प्लांट में महिलाओं के प्रशिक्षण के लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर ‘नालंदा’ तैयार किया गया है। यह सीएम योगी आदित्यनाथ का महिला सशक्तिकरण को लेकर किया गया प्रण है कि देश की बेटियों को भी प्रशिक्षण मिले और वह भविष्य की टेक्नोक्रेट बनकर सामने आएँ।
₹1000 करोड़ का होगा निवेश
अशोक लेलैंड ने लखनऊ के इस प्लांट में 1000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। हर साल इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से पहले 2500 बसें तैयार होंगी। चड्ढा का कहना है कि इस ईवी प्लांट को आगे और भी विस्तार दिया जाएगा और इससे लगभग 10,000 लोगों को रोजगार मिलने की भी संभावना जताई है।
अशोक लेलैंड के लखनऊ के प्लांट हेड शक्ति सिंह यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में देश की 30% से अधिक जनसंख्या रहती है। सरकार का भी यही विजन है कि प्रदेश और देश में प्रदूषण रहित वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए।
इसी विजन को धरातल पर लाने के लिए अशोक लेलैंड ने लखनऊ में प्लांट बनाया है जिसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल को वरीयता दी जाएगी। इस प्लांट में ईवी वाहनों के साथ अल्टरनेट फ्यूल्स और हाइड्रोजन बेस्ड वाहनों को भी निर्मित किए जाने पर योजना बनाई गई है।
शक्ति सिंह का कहना है कि योगी सरकार की योजना में सिंगल विंडो पोर्टल में सिंगल विंडो पोर्टल प्रणाली ‘निवेश मित्रा’ बनाई है। उसे प्रदेश में काम करना काफी आसान हो गया है। इसके तहत योजना के लिए हर तरह की मंजूरी ऑनलाइन ही मिल जाती है। इस तरह का प्रावधान अन्य किसी भी राज्य में नहीं है।

इस पोर्टल की वजह से ही सरकार की अलग-अलग विभागों की मंजूरी आसानी से मिलना संभव हुई है। पहले लगभग इन 45 विभागों में लगभग 500 पत्रों की मंजूरी लेनी पड़ती थी जिसमें पहले काफी समय लगता था। निवेश मित्रा ने इसे आसान बनाया है।
प्लांट को लेकर शक्ति सिंह कहते हैं कि यह उत्तर प्रदेश के अर्थव्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि प्रदेश की कई डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदल जाएगा।इसके अलावा उत्तर प्रदेश में रहने वाले श्रमिकों और कामगारों को भी दक्षता के प्रति प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर मिलेंगे।
शक्ति सिंह के अनुसार 2500 बसों के निर्माण के लिए लगभग 1000 कामगार लोगों की आवश्यकता पड़ेगी। इसके अलावा सब्सिडियरी श्रमिकों और सप्लायर को भी फायदा मिलेगा।फरवरी 2024 में प्लांट लगाने के बाद इसका उद्घाटन नवंबर 2025 में ही होना था लेकिन कुछ निजी करणों के चलते अशोक लीलैंड को यह समझ जनवरी तक स्थगित करना पड़ा।
टाटा ने भी योगी सरकार में की शुरुआत
अशोक लीलैंड से पहले वर्ष 2019 में टाटा मोटर्स ने भी लखनऊ में ही इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने का काम शुरू किया है। इसी कड़ी में अशोक लीलैंड भी अब शामिल हो गया है। इससे उत्तर प्रदेश ईवी ट्रांसपोर्टेशन का हब भी बनने की ओर अग्रसर हो गया है, जहां से पूरे देश में स्मार्ट स्विच इलेक्ट्रिक व्हीकल जाएगी और लोगों का जीवन आसान बनाएंगी।

यह बात तो साफ है कि योगी सरकार की इंडस्ट्रियल पॉलिसी के चलते ही महज 2 वर्षों में एक ऐसे प्रोजेक्ट को फाइलों से जमीन पर उतार दिया जो न केवल आम जनमानस को सुविधा देगी पर साथ ही रोजगार सृजन का भी मौका मिलेगा।
जहाँ अखिलेश की सरकार में गुंडाराज के चलते उद्यमी उत्तर प्रदेश में आना भी जरूरी नहीं समझते थे, वहीं अशोक लेलैंड के इस प्रोजेक्ट के धरातल पर आने से अब और भी इंडस्ट्री उत्तर प्रदेश में अपनी जगह तलाश रही हैं।


