Sunday, August 1, 2021
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मुजम्मिल पाशा की मीटिंग, PFI और SDPI को हिंसा का निर्देश: NIA ने बेंगलुरु दंगे की प्लानिंग का किया पर्दाफाश

“SDPI के राज्य सचिव मुजम्मिल पाशा ने पहले एक मीटिंग बुलाई थी और इसमें उसने PFI/SDPI के सदस्यों को भीड़ को भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उग्र भीड़ ने बेंगलुरु शहर के अंतर्गत..."

बेंगलुरु हिंसा मामले में जाँच को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मंगलवार (सितंबर 22, 2020) को SDPI नेता मुजम्मिल पाशा को ‘भीड़ को उकसाने’ के लिए नामित किया। पाशा ने पूर्वी बेंगलुरु के इलाकों में हिंसा भड़काई और डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन पर हमला किया।

NIA ने मंगलवार को जारी अपने बयान में कहा, “SDPI के राज्य सचिव मुजम्मिल पाशा ने पहले एक मीटिंग बुलाई थी और इसमें उसने PFI/SDPI के सदस्यों को भीड़ को भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उग्र भीड़ ने बेंगलुरु शहर के अंतर्गत आने वाले डीजे हल्ली, केजी हल्ली और पुलकेशी नगर इलाकों में दंगा भड़काया।”

NIA ने आगे यह भी कहा, कॉन्ग्रेस विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति के कावेल बारासंडा में 11 अगस्त को उनके भतीजे नवीन द्वारा फेसबुक पर अपलोड किए गए कथित अपमानजनक पोस्ट के बाद 1000 से अधिक लोग वहाँ पर हो गए थे। नवीन के फेसबुक पोस्ट ने कथित तौर पर ‘मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं का अपमान’ किया था।

बेंगलुरु सिटी पुलिस द्वारा गठित एक जाँच दल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की भूमिका की जाँच कर रही है। NIA ने दो मामले भी दर्ज किए हैं। एक मामला डीजे होली में दर्ज किया गया है, जबकि दूसरा मामला कदुगोदानाहल्ली (केजी हल्ली) पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व शहर महापौर अरुण प्रताप और स्थानीय नागरिक वार्ड पार्षद संपत राज के निजी सहायक सहित 300 से अधिक लोगों पर दंगे भड़काने और बर्बरता करने का आरोप लगाया गया था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों पुलिस को पता चला था कि पाशा दंगाइयों के बीच रुपए बाँट रहा था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। सीसीटीवी फुटेज से ये भी पता चला था कि पुलिस पर किए गए हमले की साजिश पहले ही अच्छी तरह से रच ली गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए पहले ही दंगाइयों को पूरी साजिश के बारे में बता दिया गया था और वो व्यवस्थित तरीके से वहाँ आए थे।

कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने भी कहा था कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया दंगा था। उनकी मानें तो फेसबुक पोस्ट के 1 घंटे के भीतर ही हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने 200-300 गाड़ियाँ फूँक डाली व विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। मंत्री ने कहा था कि साजिशन इस हिंसा को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे SDPI का हाथ है।

सीएम येदियुरप्पा ने कहा था कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर सीएम येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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