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बांग्लादेशी महिला मल्लिका साकिन सरदार ने फर्जी तरीके से बनवाया आधार कार्ड, सूरत में मिली 14 महीने की सजा: जेल काटने के तुरंत बाद बांग्लादेश किया जाएगा डिपोर्ट

मल्लिका साकिन सरदार को कुल 14 माह की सजा गई है, और उसे 14 महीने की सजा पूरी करते ही बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया जाएगा।

गुजरात के सूरत में फर्जी आधार कार्ड बनाकर भारत की नागरिकता हासिल करने की कोशिश करने वाली बांग्लादेशी महिला मल्लिका साकिन सरदार को दोषी ठहराया गया है और 14 महीने जेल की सजा सुनाई गई है। मल्लिका साकिन सरदार को फर्जी आधार कार्ड बनवाकर धोखाधड़ी करने की कोशिश का दोषी पाया गया है। मल्लिका साकिन सरदार को कुल 14 माह की सजा गई है, और उसे 14 महीने की सजा पूरी करते ही बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया जाएगा। हालाँकि सरकारी वकील ने कहा है कि वो सजा को बढ़वाने के लिए उच्च अदालत का रुख करेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (8 जुलाई 2024) को सूरत जिला कोर्ट ने अपने फैसले में मल्लिका साकिन सरदार को दोषी पाया। मल्लिका साकिन सरकार की उम्र 63 साल है। वो मूल रूप से बांग्लादेश के गोपालगंज जिले की सलाबतपुर इलाके के मंदरवाजा टेनेमेंट की निवासी है। उसके पास से बांग्लादेशी पासपोर्ट, भारत का आधार कार्ड, कोरोना-टीका प्रमाणपत्र भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि वो साल 2020 से सूरत में रह रही थी।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विजयकुमार बारोट की अदालत के समक्ष अपनी दलीलों में सरकारी वकील पवन शाह ने कहा कि सरदार ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड बनवाया था। सरकारी वकील ने इस मामले को भारत में बढ़ते घुसपैठ से जोड़ा और कहा कि अगर आरोपितों के प्रति नरमी बरती गई, तो इससे अन्य लोग भी अवैध तरीके से भारत में घुसने की कोशिश करेंगे। हालाँकि अदालत ने महिला को धारा 465 के तहत 7 माह और आईपीसी की धारा 471 के तहत 7 माह की सजा सुनाई।

सरदार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 465 (जालसाजी), 470 (जाली दस्तावेज), 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना), 467 (मूल्यवान सुरक्षा के लिए जालसाजी) और 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) के तहत मामला दर्ज किया गया था। वो मौजूदा समय में सूरत सेंट्रल जेल में बंद है। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि दोषी महिला को 14 माह की सजा पूरी होते ही बांग्लादेश भेज दिया जाए और इस बात की रिपोर्ट अदालत में जमा कराई जाए। हालाँकि सरकारी वकील पवन शाह ने कहा कि हम अदालत के आदेश को पढ़ने के बाद आगे कदम उठाएँगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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