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मुस्लिम बनो, 3 बीवी पाओ… बरेली में अब्दुल मजीद का जो मदरसा था ‘धर्मांतरण का मरकज’, वह भी निकला अवैध: व्हाट्सएप ग्रुप में अश्लील तस्वीर-वीडियो पोस्ट कर फँसाते थे

बरेली में धर्मांतरण गिरोह ने युवकों को फँसाने के लिए 20+ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इनमें अश्लील तस्वीरें और वीडियो डाले जाते थे। लड़कों को शादी, जन्नत और 'तीन बीवियाँ' मिलने का लालच दिया जाता था। जो युवक दिलचस्पी दिखाते थे, उन्हें मदरसे में बुलाकर ब्रेनवॉश किया जाता था।

बरेली में धर्मांतरण के बड़े गिरोह का खुलासा होने के बाद अब रोज़ नई परतें खुल रही हैं। ताजा जानकारी ये है कि गिरोह जिस मदरसे से हिंदुओं का धर्मांतरण करता था, वो मदरसा अवैध निकला है। इस मदरसे पर बुलडोजर चलाने की कार्यवाही के भी आदेश दिए जा चुके हैं।

धर्मांतरण गिरोह ने हिंदू युवकों को फँसाने के लिए 20+ व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे। इनमें अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजे जाते थे। इसके बाद लड़कों को शादी, जन्नत और ‘तीन बीवियाँ’ मिलने का लालच दिया जाता था। जो युवक दिलचस्पी दिखाते थे, उन्हें मदरसे में बुलाकर ब्रेनवॉश किया जाता था। अब तक कई युवक इस जाल में फँस चुके हैं।

किस तरह चलता था व्हाट्सएप वाला जाल

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरोह ने अलग-अलग नामों से कई व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। शुरू में इनमें सामान्य बातें होती थीं। फिर धीरे-धीरे ग्रुप में अश्लील वीडियो और लड़कियों की फोटो डाली जाती थीं। हिंदू लड़कों को शादी का झाँसा दिया जाता था। कहा जाता, ‘अगर मुस्लिम बन जाओगे तो तीन-चार बीवियाँ भी मिलेंगी और जन्नत भी।’ जो लड़के इस लालच में आ जाते, उन्हें मदरसे में बुलाकर लड़कियों और मौलानाओं के जरिए मानसिक रूप से तोड़ा जाता था।

मदरसे के अंदर युवकों को बताया जाता कि इस्लाम अपनाने से सारी परेशानियाँ खत्म हो जाएँगी। उन्हें कहा जाता कि मुस्लिम बनने पर नौकरी, घर, पैसा और खूबसूरत बीवी जैसी चीजें आसानी से मिलेंगी। कुछ युवकों को उर्दू सिखाई जाती थी। कुरान और हदीस पढ़ने को दी जाती थी। जब कोई युवक थोड़ा बहुत मजहबी जानकारी सीख जाता, तो उसे मौलवी बनने का सपना दिखाया जाता।

फैजनगर का मदरसा बना था धर्मांतरण की फैक्ट्री

बरेली से 30 किलोमीटर दूर फैजनगर का यह मदरसा 2014 में शुरू हुआ था। लेकिन असलियत में यह कोई शिक्षा देने वाली जगह नहीं थी। यह एक धर्मांतरण की फैक्ट्री बन चुका था, जहाँ युवकों का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जाता था।

इस मदरसे का कोई सरकारी रिकॉर्ड भी नहीं मिला है। यानी यह अवैध रूप से चलाया जा रहा था। यहाँ से बरामद हुआ अब्दुल मजीद का पैन कार्ड भी फर्जी निकला है।

कैसे टारगेट किए जाते थे युवक

गिरोह का टारगेट वे युवक होते थे जो अकेले रहते थे, आर्थिक रूप से कमजोर थे या फिर तलाकशुदा थे। गाँव-शहरों में ऐसे युवकों पर निगरानी रखी जाती थी। फिर धीरे-धीरे उन्हें जाल में फँसाया जाता था। गिरोह का संचालन अब्दुल मजीद करता था। सलमान, आरिफ और फहीम जैसे लोग उसका साथ देते थे।

पुलिस ने कुछ दिन पहले प्रोफेसर प्रभात उपाध्याय को एक मदरसे से बंधक बना कर छुड़ाया। वो नेत्रहीन हैं और उनका जबरन धर्मांतरण करवाया जा रहा था। प्रभात का नाम बदलकर ‘हामिद’ रख दिया गया था और उनका खतना किया जा रहा था। इसी कार्रवाई के दौरान चार आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अब्दुल मजीद भी शामिल था।

पुलिस को आरोपितों के पास से ज़ाकिर नाइक की किताबें और 21 से ज़्यादा बैंक खातों का पता चला है, जिनमें ₹13 लाख से ज़्यादा का लेनदेन हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं, बल्कि देश के 13 राज्यों तक फैला है और इसमें 200 से ज़्यादा मौलाना भी शामिल हो सकते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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