Homeदेश-समाजहिंदू युवा वाहिनी सम्मेलन में अस्तित्व रक्षा की बात, मुस्लिमों के खिलाफ नहीं था...

हिंदू युवा वाहिनी सम्मेलन में अस्तित्व रक्षा की बात, मुस्लिमों के खिलाफ नहीं था भाषण: दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब

हलफनामे में सुदर्शन TV चैनल के मालिक सुरेश चव्हाणके का भी जिक्र करते हुए बताया गया है कि उन्होंने मुस्लिमों के बारे में ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जो उनके खिलाफ हिंसा से प्रेरित हो या किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ कोई माहौल खड़ा कर रहा हो।

दिल्ली में दिसंबर 2021 में आयोजित हिंदू युवा वाहिनी के सम्मेलन में हेट स्पीच नहीं दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी है। सुदर्शन न्यूज टीवी के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके पर इस कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण का आरोप था।

अदालत में दाखिल हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने कहा है कि हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कोई भी नफरत भरी बयानबाजी नहीं हुई थी। समाचार एजेंसी ANI द्वारा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने यह हलफनामा इकट्ठा किए गए सबूतों और वीडियो फुटेज के आधार पर दाखिल किया है। पुलिस ने बताया कि वह सभी बयानों और वीडियो फुटेज की गहन जाँच-पड़ताल के बाद वह इस नतीजे पर पहुँची है।

दिल्ली पुलिस द्वारा दायर किए गए हलफनामे में सुदर्शन TV चैनल के मालिक सुरेश चव्हाणके का भी जिक्र करते हुए बताया गया है कि उन्होंने मुस्लिमों के बारे में ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जो उनके खिलाफ हिंसा से प्रेरित हो या किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ कोई माहौल खड़ा कर रहा हो। दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिन्दू युवा वाहिनी सम्मेलन में अपने धर्म को मजबूत करने और आसुरी ताकतों से लड़ने का आह्वान किया गया था।

इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, “हमें सहिष्णुता को दूसरों के नजरिए से भी देखना चाहिए। असहिष्णुता किसी लोकतंत्र के साथ स्वयं व्यक्ति के लिए भी घातक होती है। याचिकाकर्ता किसी निरपराध को कटघरे में खींचने के लिए उनके द्वारा कहे गए शब्दों को अपने हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ही बार-बार अभिव्यक्ति की आज़ादी का सम्मान करने के निर्देश दिए हैं। बशर्ते वो किसी अन्य धर्म के विरुद्ध न हों।” दिल्ली पुलिस ने यह भी बताया कि जाँच किए गए सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ संभव ही नहीं है।

हाईकोर्ट के पूर्व जज एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश और पत्रकार कुर्बान अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके इन बयानों की निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की थी। आरोप लगाया था कि 17 से 19 दिसम्बर 2021 के बीच दिल्ली और हरिद्वार में हुए 2 अलग-अलग कार्यक्रमों में मुस्लिमों के नरसंहार की बातें कही गईं थी।

याचिका में दिल्ली पुलिस पर बयान के समय मौजूद रहने और उसके बाद भी कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया था। इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसम्बर को उत्तराखंड पुलिस और दिल्ली पुलिस से जवाब-तलब किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में 13 अप्रैल (बुधवार) को उत्तराखंड पुलिस से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दाखिल करने को कहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Antifa के आतंक पर BBC का पर्दा: हमलावरों को बताया ‘प्रदर्शनकारी’, अमेरिकी कोर्ट ने ICE सेंटर पर हमले और पुलिसकर्मी को गोली मारने को...

अमेरिका के टेक्सास ICE सेंटर हमले और पुलिस अधिकारी पर गोलीबारी में दोषी 8 Antifa सदस्यों को BBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया प्रदर्शनकारी।

बऊबाजार ब्लास्ट के ‘मास्टरमाइंड’ की रिहाई पर SC की रोक, कोलकाता में ‘हिंदुओं को मारना’ चाहता था राशिद खान: पढ़ें- कैसे ममता सरकार ने...

बऊबाजार विस्फोट के दोषी राशिद खान की रिहाई फिलहाल रुकी, सुप्रीम कोर्ट अब दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश की समीक्षा करेगा।
- विज्ञापन -