Homeदेश-समाज12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को लगेगी Covaxin, डेटा के अध्ययन के...

12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को लगेगी Covaxin, डेटा के अध्ययन के बाद मिली मंजूरी

इससे पहले कंपनी ने कोवैक्सीन (BBV152) के लिए 2 से 18 की उम्र तक के बच्चों के लिए क्लिनिकल ट्रायल के आँकड़े 'सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (CDSCO)' को सौंप दिया था।

12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों को कोवैक्सीन लगाने की मंजूरी मिल गई है। अब तक भारत में 18 से अधिक उम्र वालों को ही वैक्सीन लग रही थी। ‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI)’ ने कोवैक्सीन को 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ‘इमरजेंसी यूज’ की अनुमति मिल गई है। ये वैक्सीन 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं है। अर्थात, 12 से 18 उम्र तक के किशोरों को ये कोरोना वैक्सीन लगाई जा सकती है। इसे लेकर योजना जल्द ही आएगी।

बता दें कि कोवैक्सीन का निर्माण ‘भारत बायोटेक’ नामक कंपनी करती है। इससे पहले कंपनी ने कोवैक्सीन (BBV152) के लिए 2 से 18 की उम्र तक के बच्चों के लिए क्लिनिकल ट्रायल के आँकड़े ‘सेंट्रल ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (CDSCO)’ को सौंप दिया था। CDSCO ने इस डेटा की विस्तृत समीक्षा भी की है। ‘सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स कमिटी (SEC)’ ने भी इसका अध्ययन कर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। अब इसे बच्चों को कैसे दिया जाएगा, इसकी योजना तैयार की जा रही है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -