Tuesday, July 27, 2021
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CM ममता के भतीजे को जिसने मारा था थप्पड़, उसकी रहस्यमयी मौत: TMC नेता ने की थी इंदिरा गाँधी हत्या से तुलना

सुबह 4:10 बजे भर्ती कराया गया, देवाशीष की दोपहर में अस्पताल में मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद उनका परिवार अस्पताल पहुँचा। परिवार ने आरोप लगाया है कि देवाशीष की हत्या की गई है।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस की लगातार जीत और ममता बनर्जी के तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते ही राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला तीव्र हो गया। ममता बनर्जी के राज में जितनी राजनीतिक हत्याएँ प्रतिशोध की भावना के तहत हो रही हैं, कहा जाता है कि वामपंथी सरकार के शासन काल में भी पश्चिम बंगाल में नहीं हुई थी।

हालिया मामला बेहद हाई प्रोफाइल व्यक्ति के जुड़ा है और वह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के भतीजे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी कहे जाने वाले अभिषेक बनर्जी से जुड़ा है।

टीएमसी सांसद और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को साल 2015 में मंच पर चढ़कर थप्पड़ मारने वाले देवाशीष आचार्य की पश्चिम बंगाल में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ अज्ञात लोग उन्हें हॉस्पिटल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। देवाशीष वर्ष 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे।

बताया जा रहा है कि गुरुवार की सुबह देवाशीष को बेहद गंभीर हालत में मिदनापुर के तमलुक जिला अस्पताल में लाया गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्हें सुबह 4.10 बजे भर्ती कराया गया था। जिन लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था, वे तुरंत वापस चले गए थे। देवाशीष की दोपहर में अस्पताल में मौत हो गई।

सूचना मिलने के बाद देवाशीष का परिवार अस्पताल पहुँचा। अस्पताल पहुँचने पर परिवार को इस रहस्यमय मौत का पता चला। इसके बाद परिवार ने आरोप लगाया है कि देवाशीष की हत्या की गई है। वहीं, भाजपा ने भी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाया है।

मंच पर चढ़ता देवाशीष, (तस्वीर: वनइंडिया हिंदी)

शुरुआती जाँच में पता चला कि देवाशीष आचार्य 16 जून की शाम अपने दो दोस्तों के साथ बाहर गए थे। सोनापेट्या टोल प्लाजा के पास एक चाय की दुकान पर तीनों रुके। तभी देवाशीष को एक फोन आया और वह अपने दोस्तों को चाय की दुकान पर छोड़ चले गए। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि चाय की दुकान से निकलने के बाद क्या हुआ?

साल 2015 में देवाशीष आचार्य उस समय सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने मंच पर अभिषेक बनर्जी को थप्पड़ मारा था। इसके तुरंत बाद टीएमसी समर्थकों ने उन्हें बेरहमी से मारा था। बाद में अभिषेक बनर्जी के रोकने के बाद कार्यकर्ता रुके। पुलिस ने देवाशीष को गिरफ्तार कर लिया था। उस समय परिवार के सदस्यों ने कहा था कि देवाशीष की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

उस वक्त अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि उन्होंने अपने हमला करने वाले देवाशीष को “माफ” कर दिया है। वहीं, कुछ टीएमसी नेताओं ने इस मामले को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की थी। पश्चिम बंगाल के मंत्री और टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुब्रत मुखर्जी ने 2015 की थप्पड़ की घटना और 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या को एक बराबर बताने की कोशिश की थी। तब सुब्रत मुखर्जी ने कहा था

“जब इंदिरा गाँधी की हत्या हुई थी तो इतने लोग मारे गए थे। यहाँ ऐसा कुछ नहीं हुआ, युवक जीवित है।”

सुब्रत मुखर्जी ने देवाशीष आचार्य की पिटाई का बचाव करते हुए कहा था, “यह पिटाई निंदनीय घटना [थप्पड़] की प्रतिक्रिया थी और इससे भी बदतर हो सकती थी। हर कोई भारत सेवाश्रम संघ या रामकृष्ण मिशन से राजनीति में नहीं आता है। कुछ बड़ा नहीं हुआ और लड़का जिंदा है। जो हुआ, वह कुछ नहीं है।”

पश्चिम बंगाल पुलिस ने देवाशीष आचार्य के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित चार आरोपों में मामला दर्ज किया था। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ- 307 (हत्या का प्रयास), 447 (आपराधिक अतिचार), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना) और 506 (आपराधिक धमकी) लगाई गई थी।

देवाशीष आचार्य की पिटाई करने वाले टीएमसी कार्यकर्ताओं पर भी पुलिस ने मामला दर्ज किया था। उन पर गैर-इरादतन हत्या करने के प्रयास (आईपीसी की धारा 308 के तहत) के आरोप लगाए गए थे। यह धारा, धारा 307 की तुलना में एक हल्का अपराध माना जाता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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