Homeदेश-समाजWazirX समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों पर DGGI का छापा, भारी टैक्स चोरी का मामला:...

WazirX समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी कंपनियों पर DGGI का छापा, भारी टैक्स चोरी का मामला: क्रिप्टो में लगा है पैसा तो हो जाएँ सावधान!

जीएसटी विभाग की मुंबई टीम (CGST Mumbai) जब WazirX की कारोबारी गतिविधियों की जाँच कर रही थी, तब उसने 40.5 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी पकड़ी थी।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (DGGI) ने देश के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (1 जनवरी 2022) को अधिकारियों ने देश में संचालित अन्य क्रिप्टो एक्सचेंजों के खिलाफ भी छापेमारी कार्रवाई शुरू कर दी है। 

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज सर्विस प्रोवाइडर कंपनी WazirX के परिसरों पर भी छापेमारी की है। जीएसटी के मुंबई ईस्ट कमिश्नरेट के अनुसार, वजीरएक्स की ओर से लंबे समय से जीएसटी की चोरी की जा रही थी। इस करोड़ों की कर चोरी का खुलासा करते अधिकारियों ने एक्सचेंज पर ब्याज और पेनाल्टी लगाने के बाद अब 49 करोड़ रुपए से ज्यादा का जुर्माना वसूल किया है। 

जीएसटी विभाग की मुंबई टीम (CGST Mumbai) जब WazirX की कारोबारी गतिविधियों की जाँच कर रही थी, तब उसने 40.5 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी पकड़ी थी। जाँच एजेंसी ने अपने एक बयान में कहा था कि जुर्माना और ब्याज के रूप में उसने कंपनी से कुल 49.20 करोड़ रुपए की वसूली की है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, DGGI ने क्रिप्टोकरेंसी सर्विस प्रोवाइडर्स कंपनियों के करीब आधा दर्जन दफ्तरों पर छापे मारे हैं। इस दौरान बड़े पैमाने पर जीएसटी (GST) की चोरी पकड़ी गई है।

बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की डिजिटल कैश प्रणाली है। यह एक निजी कंप्यूटर चेन से जुड़ी हुई होती है और कंप्यूटर एल्गोरिदम पर बनी है। क्रिप्टोकरेंसी पर किसी भी देश या सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होता है। कई देश इसे लीगल कर चुके हैं। क्रिप्टोकरेंसी को आज सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका क्रिप्टो एक्सचेंज कहते हैं, इसके जरिए इसे खरीदना आसान हो गया है।

दुनिया भर में सैकड़ों क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज काम कर रहे हैं। भारत में काम कर रहे वजीरएक्स, जेबपे, क्वाइनस्विच कुबेर, क्वाइन डीसीएक्स गो समेत कई एक्सचेंज संचालित है, जहाँ से बिटक्वाइन, इथेरियम, टेथर और डॉजक्वाइन समेत दुनिया भर की डिजिटल मुद्राएँ खरीदी जा सकती हैं। 

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -