उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी में इस्लामिक कुरीतियों और मजहबी कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक्स मुस्लिम सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के मामले में कई बड़े खुलासे हुए हैं। जाँच में सामने आया है कि हमला किसी व्यक्तिगत विवाद का नहीं बल्कि एक संगठित कट्टरपंथी नेटवर्क और सोशल मीडिया के जरिए फैलाई जा रही नफरत का नतीजा था। पता चला है कि सलीम के हमलावर जीशान और गुलफाम एक कट्टरपंथी ग्रुप ‘मुस्लिम आर्मी मेहदी मॉडरेटर’ से जुड़े थे।
मुस्लिम आर्मी मेहदी मॉडरेटर ग्रुप: टेलीग्राम पर फैला कट्टरपंथ का जाल
जाँच एजेंसियों के अनुसार, इस हमले के पीछे एक कथित कट्टरपंथी संगठन से जुड़ा ‘मुस्लिम आर्मी मेहदी मॉडरेटर’ नामक टेलीग्राम ग्रुप अहम कड़ी के रूप में सामने आया है। इस ग्रुप से करीब 18,200 लोग जुड़े हुए हैं। ग्रुप पर लगातार कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा था और हिंसा को खुलकर समर्थन मिल रहा था।
हमले के बाद इसी ग्रुप पर सलीम की घायल अवस्था की तस्वीरें वायरल की गईं और भड़काऊ संदेश लिखे गए। एक पोस्ट में लिखा गया, “एक्स मुस्लिम सलीम को अस्पताल पहुँचा दिया गया है, पूरा वीडियो चाहिए?” ऐसे बयानों के जरिए ग्रुप में हिंसा का महिमामंडन किया गया। बड़ी संख्या में इस कट्टरपंथी ग्रुप के सदस्यों ने इन पोस्ट पर लाइक और कमेंट कर अपना समर्थन दिया।
जाँच में यह भी सामने आया कि इसी नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान के एक यूट्यूबर ने खुलेआम सलीम और अन्य हिंदूवादी नेताओं को जान से मारने की धमकी दी थी। उसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें सीधे तौर पर हत्या के लिए उकसाया गया। इसी उकसावे से प्रभावित होकर आरोपित जीशान और गुलफाम सलीम पर हमले के लिए तैयार हुए।
रमजान और जुमे का दिन: साजिश की सुनियोजित टाइमिंग
पुलिस जाँच में खुलासा हुआ है कि हमले की तारीख और समय भी पूरी तरह सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। रमजान का महीना और शुक्रवार यानी जुमे का दिन जानबूझकर चुना गया ताकि वारदात को मजहबी रंग देकर कट्टरपंथी सोच को मजबूत किया जा सके।
हमलावर तड़के लोनी पहुँचे, सलीम के घर से ही उसका पीछा किया और उसके साथ नमाज पढ़ने वाली जगह तक गए। वहाँ से वे उसके कार्यालय तक पहुँचे और मौके पर बाइक से उतरकर अचानक गले पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले का तरीका इतना क्रूर था कि साफ संकेत मिलता है कि सिर धड़ से अलग करने की मंशा थी।
हालाँकि, शोर मचने पर आरोपित भाग निकले। जाँच एजेंसियों का मानना है कि इस वारदात का तरीका उदयपुर के कन्हैया लाल और लखनऊ के कमलेश तिवारी हत्याकांड से मिलता-जुलता है, जहाँ वैचारिक मतभेद के चलते कट्टरपंथियों ने सुनियोजित तरीके से हमला किया था।
दो सगे भाई, एक साजिश: कारपेंटर से हमलावर तक का सफर
सलीम पर हमला करने वाले दोनों आरोपित सगे भाई हैं। मुठभेड़ में मारा गया जीशान और उसका फरार भाई गुलफाम मूल रूप से अमरोहा के सैदनगली गाँव के रहने वाले थे और खोड़ा कॉलोनी में किराए के मकान में रहकर कारपेंटर का काम करते थे।
पुलिस के अनुसार, जीशान खुद भी एक यूट्यूब चैनल चलाता था और कट्टरपंथी विचारधारा से गहराई से प्रभावित था। वह लगातार मेहदी मॉडरेटर ग्रुप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के संपर्क में था। पाकिस्तानी यूट्यूबर की अपील और भड़काऊ वीडियो से प्रभावित होकर दोनों भाइयों ने सलीम पर जानलेवा हमला करने का फैसला किया।
हमले के बाद उन्होंने टेलीग्राम ग्रुप पर वारदात की जिम्मेदारी लेते हुए फोटो पोस्ट की और खुलेआम जश्न मनाया। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त चेतावनी और पुलिस की सक्रियता के चलते मुठभेड़ हुई, जिसमें जीशान मारा गया। अब पुलिस फरार आरोपित गुलफाम की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति पर हमले का नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे कट्टरपंथ, विदेशी उकसावे और संगठित नफरत के खतरनाक गठजोड़ का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। जाँच एजेंसियाँ पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।


