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20 साल पहले सरकारी जमीन कब्ज़ा कर रखी छोटी सी बुनियाद, अब बन गई वहाँ बड़ी सी ‘मदीना मस्जिद’ और मदरसा: वक्फ बोर्ड का लगा दिया ठप्पा, अदालत बोला – हटो वहाँ से

यह मस्जिद बिंदकी क्षेत्र के मलवां कस्बे में लगभग 20 साल पहले बनी थी। शुरुआत में इसका आकर काफी छोटा था जो धीरे-धीरे बढ़ाया जाता रहा।

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में कोर्ट ने सरकारी जमीन पर बनी एक मस्जिद को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया है। इस मस्जिद का नाम मदीना मस्जिद है जिसे मुस्लिम समुदाय के लोग वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड बताते आ रहे थे। हिन्दू संगठनों ने इस मस्जिद को अवैध बताते हुए लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी। कोर्ट ने मस्जिद की पैरवी कर रही कमिटी पर जुर्माना भी ठोका है। यह आदेश गुरुवार (22 अगस्त, 2024) को जारी हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मस्जिद बिंदकी क्षेत्र के मलवाँ कस्बे में लगभग 20 साल पहले बनी थी। शुरुआत में इसका आकर काफी छोटा था जो धीरे-धीरे बढ़ाया जाता रहा। वर्तमान में यह मस्जिद कस्बे और आसपास की सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार की जाने लगी थी। साल 2005 से हिन्दू संगठनों ने इस मस्जिद को अवैध बताते हुए लम्बी लड़ाई जमीन से ले कर कोर्ट तक लड़ी थी। उनका आरोप था कि मदीना नाम की इस मस्जिद को ग्राम समाज की सरकारी भूमि को कब्ज़ा कर के बनवाया गया है। आरोप यह भी है कि इस मस्जिद के साथ मदरसा भी बनवा दिया गया था।

हालाँकि, मुस्लिम पक्ष इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा। मस्जिद की पैरवी वक्फ सुन्नी मदीना मस्जिद कमिटी कर रही थी। इस कमिटी की तरफ से हैदर अली कोर्ट में पेश हो रहे थे। हिन्दू संगठन की तरफ से बिंदकी तहसीलदार की कोर्ट में केस दायर किया गया था। अपने जवाब में मस्जिद कमेटी ने बताया कि 20 साल पहले मदीना मस्जिद पट्टे पर दी गई जमीन पर बनी थी। हैदर अली ने कोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए हिन्दू संगठन के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था।

तहसीलदार की अदालत ने दोनों पक्षों सुनवाई का मौक़ा दिया। कोर्ट ने क्षेत्रीय लेखपाल से आख्या मँगवाई। इस आख्या में साबित हुआ कि मस्जिद अवैध कब्ज़ा कर के बनाई गई थी। अवैध कब्ज़े का यह दायरा लगभग 4 बिस्वा बताया गया है। आखिरकार 22 अगस्त को कोर्ट ने मलवां कस्बे की मदीना मस्जिद को सरकारी जमीन पर बना करार दिया। तहसीलदार की कोर्ट ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वो सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माण को ध्वस्त करें। साथ ही पुलिस को कार्रवाई के दौरान पूरी सुरक्षा मुहैया करवाने के निर्देश भी दिए।

तहसीलदार अचलेश सिंह की कोर्ट ने अपने आदेश में मस्जिद कमेटी को 65,500 रुपए जुर्माना भी भरने का आदेश दिया है। हालाँकि वक्फ सुन्नी मदीना मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष हैदर अली ने इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाने की बात कही है। बताते चलें कि इसी साल 21 जुलाई को फतेहपुर में हिन्दू संगठनों ने पंचायत कर के मदीना मस्जिद पर जल्द फैसला देने की माँग की थी। तब जिलाधिकारी ने मामले को 15 दिनों में निस्तारित करवाने का आश्वासन दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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