Wednesday, May 18, 2022
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बाराबंकी मस्जिद बवाल में मोहम्मद इश्तियाक़ पर डीएम की NSA कार्रवाई को हाईकोर्ट की मंजूरी, किया था मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व

बाराबंकी प्रशासन द्वारा मस्जिद क्षेत्र में बने एक पुराने अवैध ढाँचे को गिराने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। ढाँचा गिराए जाने के दौरान मोहम्मद इश्तियाक नाम के शख्स ने भीड़ के साथ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आईएएस दिव्यांशु पटेल के आवास पर हमला किया था।

उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने गुरुवार (8 जुलाई, 2021) को बाराबंकी अवैध संरचना विध्वंस मामले में आईएएस अधिकारी पर हमला करने के आरोपित के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मुकदमा चलाने के लिए हरी झंडी दे दी

बता दें कि बाराबंकी प्रशासन द्वारा मस्जिद क्षेत्र में बने एक पुराने अवैध ढाँचे को गिराने के बाद विवाद खड़ा हो गया था। ढाँचा गिराए जाने के दौरान मोहम्मद इश्तियाक नाम के शख्स ने भीड़ के साथ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आईएएस दिव्यांशु पटेल के आवास पर हमला किया था। बाराबंकी के डीएम आदर्श सिंह ने तब हमलावरों के खिलाफ NSA के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसे गुरुवार को हाईकोर्ट ने मंजूरी दे दी

इसके अतिरिक्त, एसडीएम ने लोगों को विध्वंस की जगह में प्रवेश करने से रोकने के लिए एक नोटिस जारी किया था। नोटिस के बाद जब कुछ बदमाशों को साइट में प्रवेश करने से रोका गया, तो उन्होंने पथराव किया जिसमें पाँच पुलिस अधिकारी घायल हो गए। इस मामले में 150 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

‘मस्जिद’ तोड़ने पर उठा विवाद

रिपोर्टों के अनुसार, बाराबंकी प्रशासन को राम सनेही घाट क्षेत्र में ‘तहसील’ परिसर के अंदर बने दो से तीन कमरों वाली संरचना का पता चला। जब आईएएस पटेल ने संरचना के बारे में पूछताछ की और कमरे में रहने वालों से पहचान पत्र माँगा, तो वे सभी भाग गए।

जिसके बाद संरचना को ध्वस्त करने के लिए आदेश जारी किया गया था, हालाँकि, ऑल-इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विपक्षी दल समाजवादी पार्टी जैसे मुस्लिम संगठनों ने प्रलाप करना शुरू कर दिया।

आक्रोशित मुस्लिम संगठनों और विपक्ष ने दावा किया कि गिराया गया ढाँचा 100 साल पुरानी मस्जिद है। हालाँकि, अधिकारियों ने कहा कि अदालत के आदेश पर उन्होंने जिस ढाँचे को ध्वस्त किया वह वास्तव में एक अवैध आवासीय ढाँचा था जिसने सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया था।

जिला मजिस्ट्रेट आदर्श सिंह ने भी पुष्टि की। प्रशासन की इस कार्रवाई पर डीएम डॉ आदर्श सिंह ने कहा कि तहसील परिसर में उपजिला मजिस्ट्रेट के आवास के सामने अवैध रूप से बने आवासीय परिसर के संबंध में कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को 15 मार्च 2021 को नोटिस भेजकर स्वामित्व के संबंध में सुनवाई का मौका दिया था। लेकिन नोटिस तामील होते ही परिसर में निवास कर रहे लोग परिसर छोड़कर फरार हो गए, जिसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से 18 मार्च 2021 को तहसील प्रशासन द्वारा इस पर अपना कब्जा प्राप्त कर लिया गया।

फेक न्यूज चलाने के लिए ‘द वायर’ के खिलाफ FIR

मुस्लिम संगठनों और विपक्ष के अलावा, मीडिया पोर्टल ‘The Wire‘ ने भी इस दावे को आगे बढ़ाया कि ध्वस्त संरचना वास्तव में मस्जिद थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने बाराबंकी अवैध मस्जिद विध्वंस मामले के संबंध में एक वीडियो के माध्यम से गलत सूचना का प्रचार करके समाज में वैमनस्य फैलाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल- द वायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

अपने डॉक्यूमेंट्री में, द वायर ने कहा था कि इलाके के मुस्लिमों ने मस्जिद के विध्वंस का विरोध किया था और कहा था कि पुलिस अधिकारियों ने लाठीचार्ज का सहारा लेकर इसे शांत कराया था। द वायर ने दावा किया था कि बाराबंकी पुलिस ने विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया और उनके धार्मिक ग्रंथों को नाले में फेंक दिया।

वामपंथी पोर्टल द्वारा लगाए गए ऐसे आरोपों का खंडन करते हुए बाराबंकी पुलिस ने स्पष्ट किया कि द वायर द्वारा किए गए दावे झूठे थे। इसमें आगे कहा गया कि द वायर अपनी वेबसाइट पर अवैध मस्जिद के विध्वंस के बारे में गलत सूचना का प्रचार करके सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहा था। द वायर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 153-ए, 505 (1) (बी), 120 बी (आपराधिक साजिश) और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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