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कहीं बार-बार ढाबे का नाम बदलता खुर्शीद, कहीं ‘लक्ष्मी’ के बगल जहाँगीर ने खोला ‘शीतल चाट’: नाम बदलने को मजबूरी नहीं साजिश मानते हैं पश्चिमी यूपी के हिन्दू

मुस्लिमों द्वारा डुप्लीकेट नाम से बात सिर्फ कारोबार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके द्वारा कई स्थानों पर ऐसा हिन्दुओं की बिक्री कम करने के लिए किया जा रहा है।

पवित्र सावन माह में चल रही काँवड़ यात्रा साल 2024 में कट्टरपंथी और वामपंथी साजिशकर्ताओं के निशाने पर शुरुआत से पहले ही आ गई थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रशासन द्वारा दुकानदारों को असली नाम लिखने का निर्देश मिलने के बाद काँवड़ यात्री आए दिन किसी ने किसी बहाने से बदनाम किए जा रहे हैं। इस नकारात्मक माहौल को बनाने की शुरुआत मोहम्मद ज़ुबैर जैसे एजेंडा वाले लोगों ने की। बाद में इसमें अरफा खानम जैसी पत्रकारों ने भी अपनी दस्तक दी।

उन्होंने इसे मुस्लिम और दलित वर्ग के धंधे को खत्म करने की साजिश करार दिया। हालाँकि, ऑपइंडिया की पड़ताल में सच्चाई अरफ़ा खानम के दावों से उलट निकल कर सामने आई।

‘प्रति घंटे हो लाखों का लाभ, पर नहीं बदलेंगे नाम’

ऑपइंडिया की टीम ने गाजियाबाद से लेकर सहारनपुर तक काँवड़ मार्ग के दर्जनों हिन्दू दुकानदारों से बात की। इसमें देसी ठाठ, बाबे दी ढाबा, श्याम भोजनालय और पहलवान ढाबा जैसे चलते ढाबे के साथ वंश जूस और भोजनालय जैसे छोटे दुकानदार भी शामिल हैं। इन सभी ने एक स्वर में हमसे कहा कि नाम से नहीं बल्कि खाने की क्वालिटी से अपनी पहचान बनानी चाहिए। अश्वनी सैनी, राम कुमार आदि ढाबा मालिकों ने कहा कि उन्होंने तो कभी किसी मुस्लिम त्योहार में अपनी दुकानों के नाम नहीं बदले।

इन सभी ने एक स्वर में यहाँ तक कहा कि अगर उनको इस्लामी नाम रख कर प्रति घंटे लाखों रुपए का फायदा हो तो भी वो अपने असली पहचान में लाइन तो दूर मात्रा और शब्द का भी बदलाव नहीं करेंगे।

‘नकली नामों से हमारे धंधे में घाटा’

सहारनपुर जिले में अम्बाला-देहरादून मार्ग पर स्थित एक हिन्दू ढाबा मालिक ने बताया कि उनके आसपास कम से कम आधे दर्जन ढाबों के मालिक मुस्लिम हैं जो हिन्दू नाम से कारोबार कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन की सख्ती के बाद कई दुकानदारों ने अपने असली नाम लिख लिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद वो फिर से अपने पुराने रूप में आ गए। उन्होंने बताया कि ऐसी हरकतों से कहीं न कहीं उन दुकानदारों को घाटा होता है जो अपने असली नामों से मेहनत से कारोबार कर रहे हैं।

खुर्शीद बार-बार बदल रहा अपने ढाबे का नाम

अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हमें सहारनपुर के पास सरसावा इलाके में मानव पंजाबी ढाबा दिखा। पता चला कि इस ढाबे का मालिक खुर्शीद है। स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि खुर्शीद ने अपने ढाबे का पहले नाम प्रयागराज होटल रखा था। बाद में इसे मानव पंजाबी ढाबा रखा गया। मानव पंजाबी नाम से एक अन्य ढाबा एक सिख समुदाय के व्यक्ति का है जो कि खुर्शीद के ढाबे से लगभग 15 किलोमीटर दूर सरसावा टोल टैक्स के पास लम्बे समय से चल रहा है। स्थानीय लोग खुर्शीद की हरकत को असली मानव पंजाबी ढाबे की डुप्लीकेसी बताते हैं।

लक्ष्मी चाट के बगल जहाँगीर की नई शीतल चाट

सहारनपुर जिले के ‘बजरंग दल’ पदाधिकारी अभिषेक पंडित ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने हमें बताया कि मुस्लिमों द्वारा डुप्लीकेट नाम से बात सिर्फ कारोबार करने तक सीमित नहीं है बल्कि उनके द्वारा कई स्थानों पर ऐसा हिन्दुओं की बिक्री कम करने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण के लिए अभिषेक पंडित ने सहारनपुर के अतिव्यस्त काँवड़ मार्ग पर मौजूद कैलाशपुर में बनी शीतल चाट भंडार का नाम लिया। उन्होंने बताया कि कैलाशपुर में लक्ष्मी चाट भंडार एक पिछड़ा वर्ग में आने वाले हिन्दू की है जो लगभग 20 वर्षों से लोगों के बीच चर्चित है।

अभिषेक का दावा है कि इस चाट की दुकान की बिक्री को कम करने के लिए पूरी तैयारी से इसके बगल शीतल चाट नाम से नई दुकान हूबहू इसके इंटीरियर से मिला कर लगभग 3-4 साल पहले खोली गई। शीतल चाट का असल मालिक जहाँगीर बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने लक्ष्मी चाट के ग्राहक तोड़ने के लिए सभी सम्भव प्रयास किए। हालाँकि लक्ष्मी चाट आज भी अपनी बेहतर क्वालिटी के चलते स्थानीय लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

फलों के कारोबार में भी नहीं टिकने देते किसी हिन्दू को

बजरंग दल पदाधिकारी अभिषेक पंडित द्वारा लगाए गए आरोपों की जमीनी पड़ताल के लिए ऑपइंडिया की टीम ने कैलाशपुर के स्थानीय समाजसेवी और भाजपा नेता राजेश जौहरी से सम्पर्क किया। राजेश जौहरी ने अपने इलाके को मुस्लिम बहुल बताते हुए खुद को चरमपंथ से पीड़ित बताया। राजेश ने कहा कि इमरान मसूद की जीत के बाद उनके घर के आगे हड्डियाँ टाँग दी गईं थीं। राजेश जौहरी ने ‘बजरंग दल’ पदाधिकारी अभिषेक पंडित के लक्ष्मी और शीतल चाट के बारे में किए गए दावों को एकदम सही बताया।

राजेश जौहरी ने कैलाशपुर इलाके में पड़ने वाले काँवड़ मार्ग का भी जिक्र किया। यहाँ देहरादून जाने वाले मार्ग पर एक लाइन से फलों के फुटकर विक्रेता सड़क के किनारे ठेलों और बैलगाड़ी पर देखे जा सकते हैं। राजेश जौहरी का दावा है कि वहाँ फलों के अधिकतर फुटकर विक्रेता मुस्लिम समुदाय के हैं। उन्होंने हमें बताया कि हिन्दू दुकानदारों को वहाँ फलों के रेट के मामले में टिकने भी नहीं दिया जाता है। राजेश का यह भी दावा है कि वर्तमान सरकार में कैलाशपुर के हालात हिन्दुओं के लिए रहने योग्य हुए हैं वर्ना पिछली सरकारों में तो हालत बदतर हुआ करते थे।

फल-सब्ज़ी मंडी के अधिकतर आढ़ती मुस्लिम समुदाय के

ऑपइंडिया ने मेरठ, मुज़फ्फरनगर और सहारनपुर की मंडियों में जा कर पड़ताल की। यहाँ पर सब्ज़ियों और फलों के अधिकतर आढ़ती मुस्लिम समुदाय के ही हैं। इनमें से कुछ लोगों के द्वारा दूसरे राज्यों के सब्ज़ी व्यापारियों का रेट भी बकाया है। मध्य प्रदेश के एक सब्ज़ी कारोबारी का आरोप है कि सहारनपुर की मंडी के एक मुस्लिम कारोबारी ने उनकी सब्ज़ियों का पैसा पिछले कई वर्षों से नहीं दिया। यहाँ तक कि लगभग 3 साल पहले जब वो अपना पैसा माँगने गया तो उसको धमकी दे कर भगा दिया गया। डर की वजह से मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के इस कारोबारी ने अपना नाम प्रकाशित न करने की गुजारिश की।

मस्जिद से होती है हिंदू दुकानदार के बॉयकॉट की अपील

गाजियाबाद में काँवड़ मार्ग पर स्थित हिंडन विहार में बालाजी धाम मंदिर के महंत मछेन्द्र पुरी ने बताया कि उनका क्षेत्र मुस्लिम बहुल है। इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एक हिन्दू दुकानदार होने का दावा करते हुए उन्होंने बताया कि उसकी दुकान पर सामान न खरीदने का एलान मस्जिद की मीटिंगों में किया जाता है। बकौल महंत मछेन्द्र पुरी हिन्दू दुकानदार अपना निजी घर होने की वजह से उस जगह को छोड़ कर कहीं जा भी नहीं पा रहा है। दुकानदार की सुरक्षा के मद्देनजर ऑपइंडिया उनका नाम सार्वजनिक नहीं कर रहा है। महंत ने हिंडन विहार इलाके से हिन्दुओं के पूर्व में हुए पलायन की असल वजह की जाँच कराए जाने की माँग की है।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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