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झारखंड में कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री ने दलित कॉन्स्टेबल को थप्पड़ जड़कर कहे जातिसूचक शब्द, SC-ST एक्ट में FIR दर्ज; जाम में गाड़ी फँसने से नाराज थे केएन त्रिपाठी

झारखंड के लातेहार में कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी को लेकर पुलिसवाले गुस्साए हुए हैं। दरअसल नेताजी जाम में फँस गए और जाम तुरंत नहीं हटने पर अपने दलित कॉन्स्टेबल बॉडीगार्ड रिकियासन को थप्पड़ जड़ दिया और जातिसूचक शब्द कहे।

झारखंड के मंत्री रहे कॉन्ग्रेस नेता कृष्णानंद त्रिपाठी ने अपने दलित बॉडीगार्ड को थप्पड़ मारा और गालियाँ दी। बात सिर्फ इतनी थी कि लातेहार के जाम में पूर्व मंत्री और उनका काफिला फँस गया था और बॉडीगार्ड के रूप में कार्यरत कॉन्स्टेबल उनकी गाड़ी निकलवाने में असफल रहा। इससे नेताजी को गुस्सा आ गया और उन्होंने बॉडीगार्ड को थप्पड़ जड़ दिया और जातिसूचक शब्द कहे।

पीड़ित कॉन्स्टेबल रविन्द्र रिकियासन के मुताबिक, 3 सितंबर दोपहर करीब 1.30 बजे जब वह पूर्व मंत्री के साथ लातेहार से जा रहा था, तो रास्ते पर भारी भीड़ थी। उन्हें कार से उतर कर जाम हटाने के लिए कहा गया। ये जाम जनजातियों के महापर्व करमा के जुलूस की वजह से लगा था। इस पर्व में जनजातीय समुदाय के लोग ढोल- नगाड़ों के साथ सड़कों पर नाचते-गाते निकलते हैं। इसकी वजह से सड़क पर काफी भीड़ हो गई थी।

ट्रैफिक पुलिस पहले से ही इसे दुरुस्त करने में लगी हुई थी। लेकिन भीड़ नियंत्रित नहीं हो पा रही थी। इससे नाराज होकर पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी निकले और बॉर्डीगार्ड को थप्पड़ मार दिया। इतना ही नहीं कॉन्स्टेबल रिकियासन को ‘आदिवासी’ और ‘हरिजन’ जैसे जातिसूचक शब्द कह कर अपमानित किया।

आमतौर पर ऐसा होता है कि कोई नेता जब जाम में फँसते हैं, तो उनके बॉडीगार्ड समेत ट्रैफिक पुलिस जाम को हटाने में लग जाती है। यहाँ भी ऐसा हुआ, लेकिन भीड़ ज्यादा थी इसलिए इसमें वक्त लग रहा था।

घटना के खिलाफ कॉन्स्टेबल ने डालटेनगंज नगर थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। थाना प्रभारी ज्योति लाल राजवार के मुताबिक, एफआईआर एससी/ एसटी एक्ट 1989 के तहत दर्ज की गई है।

हालाँकि पूर्व मंत्री त्रिपाठी ने इसे ‘बदले की भावना’ से की गई कार्रवाई कहा है। उनका दावा है कि उन्होंने किसी के साथ बदसलूकी नहीं की है, बल्कि गाड़ी से उतर कर खुद रास्ता खाली कराने में मदद की।

लातेहार पुलिस मेंस एसोसिएशन ने घटना की कड़ी निंदा की है और राज्य के पुलिस महानिदेशक को खत लिख कर कॉन्स्टेबल को न्याय देने की माँग की है। एसोसिएशन का कहना है कि ये वर्दीधारी पुलिस की गरिमा पर हमला है। पत्र में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर साक्ष्य जुटाने और निष्पक्ष जाँच कर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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