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शाहरुख की लगाई आग पर लगाने को झारखंड के अस्पताल में मरहम भी नहीं: रिपोर्ट से खुलासा- दुमका की हिंदू लड़की का 28 बाद घंटे बाद किया गया था ड्रेसिंग

जले हुए मरीज को जब हॉस्पिटल लाया जाता है, तो सबसे वॉशिंग और क्लीनिंग की जाती है। इसके बाद फौरन उसकी ड्रेसिंग की जाती है, ताकि जल्द घाव भरना शुरू हो और जलन कम हो। लेकिन दुमका के हॉस्पिटल में ऐसा कुछ नहीं किया गया।

झारखंड के दुमका में जिस हिंदू लड़की को जलाकर मार डाला गया था, उसके उपचार में घोर लापरवाही सामने आई है। लड़की के घावों पर लगाने के लिए दुमका जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरहम तक नहीं था। उसकी पहली ड्रेसिंग भी 28 घंटे बाद हुई। दुमका राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का गृह जिला है। जब सीएम के गृह जिले के अस्पतालों का हाल ऐसा हो तो आप अन्य हिस्सों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाजा लगा सकते हैं।

दैनिक भास्कर ने इस लड़की को आग लगाए जाने के बाद मिले उपचार पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। मृतक लड़की के जीजा के हवाले से बताया है कि यदि अस्पताल में समय से उपचार मिला होता तो लड़की की जान बच सकती थी।

लड़की को सबसे पहले दुमका सदर अस्पताल ले जाया गया था। जीजा के मुताबिक इमरजेंसी वार्ड से उसे बर्न वार्ड में ले जाया गया। बर्न वार्ड में सुविधाओं के नाम पर सिर्फ बेड और पंखा था। जो एसी लगा था, वह काम नहीं कर रहा था। अस्पताल में लड़की के घावों पर लगाने के लिए मरहम तक नहीं था। पहले दिन घाव को खुला रखा गया था। पट्टी तक नहीं बाँधी गई। अस्पताल में सलाइन के अलावा और कुछ भी नहीं था। इलाज की सुविधाओं की कमी के चलते बाद में लड़की को राँची रेफर कर दिया गया।

दैनिक भास्कर ने रिपोर्ट में बताया है कि इन दावों की पड़ताल के लिए उसने उस वार्ड का दौरा किया जहाँ लड़की को भर्ती किया गया था। इस दौरान उन्हें एसी चलता मिला। इलाज करा रहे मरीजों ने बताया कि इस लड़की का केस चर्चित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने इसे ठीक करवाया है। इलाज भी अभी तरीके से हो रहा है।

लड़की का शुरुआत इलाज करने वाले दुमका के सर्जन डॉक्टर शशि कुमार ने दैनिक भास्कर को बताया है, “जब उसे लाया गया था, वह 90 प्रतिशत जली हुई थी। हमने अपनी क्षमता और प्रोटोकॉल के हिसाब से इलाज किया। बाद में परिजनों को बता दिया कि इलाज के लिए राँची ले जाना होगा।”

आर्थिक वजहों से परिवार लड़की का इलाज प्राइवेट अस्पताल में करवाने में सक्षम नहीं था। लिहाजा सरकारी अस्पताल ही उनका सहारा था। लेकिन दुमका से रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस तक का इंतजाम नहीं किया गया, जबकि ऐसे मामलों में अस्पताल ही एंबुलेस का इंतजाम करता है। मजबूरन पीड़ित परिवार ने किसी तरह पैसों की व्यवस्था की और फिर एंबुलेंस का इंतजाम कर लड़की को राँची ले गए। तब तक उसे आग लगाए जाने की घटना को 24 घंटे से ज्यादा हो चुके थे। घटना के करीब 28 घंटे बाद राँची के रिम्स में पहली बार उसकी ड्रेसिंग हुई। जरूरी दवाएँ दी गईं।

लड़की के परिवार के मुताबिक, रिम्स के बर्न वार्ड में काफी गर्मी थी। लड़की को बहुत जलन हो रही थी। उन्हें बाजार से टेबल फैन खरीद का लाना पड़ा। जिस वायरल वीडियो में लड़की शाहरुख के बारे में बता रही है वह 24 अगस्त को उसकी पहली ड्रेसिंग के बाद की है।

बता दें कि जले हुए मरीज को जब हॉस्पिटल लाया जाता है, तो सबसे वॉशिंग और क्लीनिंग की जाती है। इसके बाद फौरन उसकी ड्रेसिंग की जाती है, ताकि जल्द घाव भरना शुरू हो और जलन कम हो। लेकिन दुमका के हॉस्पिटल में ऐसा कुछ नहीं किया गया।

गौरतलब है कि शाहरुख़ हुसैन ने 23 अगस्त 2022 की रात घर में घुसकर सोई हुई हिंदू नाबालिग लड़की पर पेट्रोल उड़ेल आग लगा दी थी। 27 अगस्त को लड़की की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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