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पत्रकार ने घुसपैठ-इस्लामी कट्टरपंथ को बताया असम के लिए खतरा, मुस्लिम नेता ने कर दिया केस: हाई कोर्ट ने रद्द की FIR, कहा- यह सांप्रदायिक नहीं, यही पत्रकारिता का मूल धर्म

हाई कोर्ट ने कहा है, "अवैध प्रवासियों, आतंकी गतिविधियों और मूल निवासियों के लिए डेमोग्राफी के खतरों के बारे में चिंता जताना समुदायों के बीच हिंसा भड़काने का प्रयास नहीं माना जा सकता है।"

घुसपैठ के जरिए भारत की डेमोग्राफी चेंज करने की कोशिश की बात सबके सामने है। कट्टरपंथी चाहते हैं कि इस पर भी लोगों का मुँह सिला रहे। असम के पत्रकार ने घुसपैठ पर रिपोर्ट लिख दी तो एक मुस्लिम संगठन के नेता ने पत्रकार के खिलाफ FIR कर दी। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया है।

क्या था मामला?

8 नवंबर 2016 को पत्रकार कोंगकोन बोर्थाकुर ने ‘दैनिक जन्मभूमि’ अखबार में अवैध घुसपैठियों को लेकर एक लेख लिखा था। इस लेख में पड़ोसी देशों से आए अवैध प्रवासियों से बने डेमोग्राफी बदलने के खतरे, मजहबी कट्टरवाद और कट्टरवाद की आड़ में होने वाली ‘आतंकी गतिविधयों’ का जिक्र किया गया था।

इस लेख के प्रकाशित होने के बाद शिवसागर के ऑल असम मुस्लिम स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) के अध्यक्ष फरीद इस्लाम हजारिका ने पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इस FIR में दावा किया गया कि इस रिपोर्ट से सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ गया है। साथ ही, फरीद इस्लाम ने दावा किया कि रिपोर्ट से पत्रकार विभिन्न समुदायों के बीच शांति भंग करे की कोशिश कर रहे हैं।

इस FIR के खिलाफ पत्रकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि उनका लेख जमीनी स्तर के शोघ पर आधारित था।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने क्या कहा?

गुवाहाटी हाई कोर्ट की जस्टिस प्रांजल दास की बेंच ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म ही समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाना है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, “अवैध प्रवासियों, धार्मिक कट्टरवाद, आतंकी गतिविधियों और मूल निवासियों के लिए डेमोग्राफी के खतरों के बारे में चिंता व्यक्त करना समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने या हिंसा भड़काने का प्रयास नहीं माना जा सकता है।”

हाई कोर्ट ने पत्रकार द्वारा दी गईं दलीलों को सही माना है और इस मामले में की जा रही कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश का अंश

हाई कोर्ट ने कहा, “अखबार की जिस रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज की गई थी, उसकी जाँच करने पर पता चला कि आरोपी पत्रकार ने किसी भी जातीय या धार्मिक समूह पर आक्षेप नहीं लगाया है।”

हाई कोर्ट ने पत्रकार द्वारा दी गईं दलीलों को सही माना है और इस मामले में की जा रही कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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