Sunday, July 21, 2024
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हरी टोपी पहन सरकारी बस में कर रहा था ड्यूटी, महिला यात्री ने उतरवाई: कहा- यह वर्दी का हिस्सा नहीं, अपने मजहब का पालन घर या मस्जिद में करो

बस कंडक्टर हरे रंग की नमाजी टोपी पहने दिखाई दे रहा है। इसको लेकर एक महिला यात्री उससे पूछती है कि क्या ड्यूटी के दौरान वर्दी के साथ टोपी पहनने की अनुमति है? महिला कंडक्टर से कहती है, "सरकारी कर्मचारी होने के कारण अपने मजहब का पालन आपको अपने घर या मस्जिद में करना चाहिए न कि इस तरह से सार्वजनिक जगहों पर।"

सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला सरकारी बस के कंडक्टर के हरी टोपी पहनने पर सवाल उठा रही हैं। वह कह रही हैं कि यह वर्दी का हिस्सा नहीं है। ऐसे में यदि उसे अपने मजहब का पालन करना है तो यह उसे अपने घर या मस्जिद में करनी चाहिए। कुछ देर की बहस के बाद कंडक्टर को टोपी उतारनी पड़ती है।

यह वीडियो करीब 11 दिन पुरानी बताई जा रही है। बस बस बेंगलुरु मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कार्पोर्टेशन (BMTC) की है। कन्नड़ भाषा में बातचीत का वायरल वीडियो 1 मिनट 42 सेकेंड का है। इसमें बस कंडक्टर हरे रंग की नमाजी टोपी पहने दिखाई दे रहा है। इसको लेकर एक महिला यात्री उससे पूछती है कि क्या ड्यूटी के दौरान वर्दी के साथ टोपी पहनने की अनुमति है? महिला कंडक्टर से कहती है, “सरकारी कर्मचारी होने के कारण अपने मजहब का पालन आपको अपने घर या मस्जिद में करना चाहिए न कि इस तरह से सार्वजनिक जगहों पर।”

वर्दी और कानून को लेकर महिला के सवाल पूछने पर कंडक्टर कहता है कि वह सालों से टोपी पहनकर ड्यूटी कर रहा है। लेकिन आज तक किसी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। लेकिन महिला वर्दी में ड्यूटी करने पर कानून का पालन करने की बात पर अड़ी रहती है। इसके बाद कंडक्टर को टोपी उतारकर अपनी जेब में रखनी पड़ती है।

बहस के दौरान कंडक्टर ने यह भी कहता है कि टोपी पहनने की अनुमति हो भी सकती है। इसके जवाब में महिला कहती है कि आपको नियमों की सही जानकारी नहीं है। वीडियो देखकर ऐसा लगता है कि इस खुद महिला यात्री ने बनाया है। उनका चेहरा इसमें नहीं दिख रहा। वहीं कई यात्री दोनों की बहस को सुनते दिखाई पड़ रहे हैं।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार BMTC के अधिकारियों ने वायरल वीडियो पर कमेंट से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह वीडियो कई दिन पुराना है और उनकी जानकारी में है। साथ ही यह भी बताया है कि बीएमटीसी में ड्रेस कोड कई दशकों से लागू है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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