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‘वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क हैं हम’: दलित महिला से कई बार रेप करने वाले रफीक को HC से जमानत नहीं, नौकरी का झाँसा देकर फाँसा था

जस्टिस S रचैया की कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की तमाम दलीलें काम नहीं आईं और आखिरकार रफीक की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी गई।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक शादीशुदा दलित महिला से रेप कर के उसे इस्लाम कबूल करवाने के आरोपित की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। आरोपित का नाम रफीक है। 33 वर्षीय रफीक की जमानत अर्जी पर उच्च न्यायालय ने यह फैसला 3 जुलाई, 2024 को सुनाया है। अपनी टिप्पणी में न्यायाधीश ने कहा कि वो समाज को संदेश देना चाहते हैं कि अदालतें वंचितों की रक्षा करने व जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सतर्क हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ बेंच में हुई। रफीक ने जिला अदालत से ख़ारिज होने के बाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी। इस पर जस्टिस एस रचैया की कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की तमाम दलीलें काम नहीं आईं और आखिरकार रफीक की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी गई। अपनी टिप्पणी में न्यायाधीश ने आरोपित के अपराध को गंभीर श्रेणी का बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अदालत ने पीड़िता को गरीब और मासूम माना जो रफीक की साजिश का शिकार हुई।

निर्णय देते हुए की गई टिप्पणी में जस्टिस रचैया ने कहा कि समाज को यह संदेश जाना चाहिए कि अदालतें वंचितों के अधिकारों व जबरन धर्मांतरण जैसे अपराधों के खिलाफ सतर्क हैं। रफीक की तरफ से अधिवक्ता महंतेश एस हिरेमठ ने बहस की। वहीं सरकारी वकील प्रवीण वाई देवरेद्दियवर ने इस जमानत अर्जी का विरोध किया। पीड़िता की तरफ से सीनियर एडवोकेट एस आर हेगड़े ने बहस की।

क्या था मामला

बताते चलें कि रफीक पर आरोप है कि उसने नौकरी दिलाने के नाम पर पहले एक अनुसूचित जाति (SC वर्ग) की महिला से दोस्ती की और इसी बहाने उसे अपने साथ ले कर बेलगावी चला गया। बेलगावी में पीड़िता को एक कमरे में रखा गया। यहाँ रफीक ने पीड़िता से कई बार बलात्कार किया। पीड़िता शादीशुदा और 2 बच्चों की माँ थी जिसे कुछ दिनों बाद इस्लाम कबूल करने का दबाव दिया जाने लगा। कुछ दिनों बाद पीड़िता जैसे-तैसे रफीक के चंगुल से निकल कर भागने में कामयाब रही थी।

घर आ कर महिला ने अपने पति को सारी बात बताई थी। पीड़िता के पति ने रफीक को नामजद करते हुए पुलिस में FIR दर्ज की थी। यह FIR IPC की धाराओं के साथ SC/ST एक्ट व कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट टू फ्रीडम ऑफ़ रिलिजन एक्ट 2022 के तहत दर्ज हुई थी। रफीक को गिरफ्तार कर लिया गया था जिसकी जमानत जिला अदालत ने ख़ारिज कर दी थी। आखिरकार अब रफ़ीक की जमानत अर्जी हाईकोर्ट से भी ख़ारिज हो चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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