Homeदेश-समाजमहिला CPI-M कैडर ने की आत्महत्या: सुसाइड नोट में लगाया दो माकपा कार्यकर्ताओं पर...

महिला CPI-M कैडर ने की आत्महत्या: सुसाइड नोट में लगाया दो माकपा कार्यकर्ताओं पर उत्पीड़न का आरोप

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि सीपीआई-एम पार्टी में महिलाएँ सुक्षित नहीं है। उन्होंने डीजीपी से निष्पक्ष जाँच के लिए कहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब महिला ने राजन और जॉय द्वारा प्रताड़ित किए जाने का मामला उठाया गया था, तो ‘वरिष्ठ कॉमरेड’ कार्रवाई करने में विफल क्यों हैं।

केरल में 41 वर्षीय महिला CPI-M कैडर ने पार्टी कार्यालय के अंदर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृत माकपा कार्यकर्ता का नाम आशा बताया जा रहा है। पुलिस ने मौके पर से आशा द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट बरामद किया है। इसमें आशा ने दो सीपीआई (एम) सदस्यों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही आशा ने सुसाइड नोट में पार्टी को उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं देने के लिए दोषी ठहराया है।

आशा के परिवार वालों का कहना है कि वो आशा कार्यकर्ता के रूप में काम करने के साथ ही माकपा की सदस्य भी थीं। उसने कुछ दिन पहले भी पार्टी की एक समिति की बैठक में हिस्सा लिया था। हालाँकि, पार्टी ने आशा के सदस्य होने की बात से इनकार किया है। फिलहाल पुलिस यह पुष्टि नहीं कर पा रही है कि वह पार्टी की सदस्य थी या फिर सिर्फ समर्थक।

गुरुवार (सितंबर 10, 2020) को वह कभी वापस न आने की बात कहकर पार्टी ऑफिस के लिए निकली थी। इससे चिंतित परिजन जब आशा की खोज में पार्टी ऑफिस पहुँचे तो वहाँ उसे फाँसी के फंदे से लटकते पाया। 

बरामद किए गए सुसाइड नोट में, आशा ने उल्लेख किया कि पार्टी के दो नेता – स्थानीय समिति के सदस्य कोट्टमन राजन और शाखा सचिव अनाथारविलाकम जॉय, उसे लंबे समय से उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहा था, जिसके कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो गई। सुसाइड नोट में यह भी कहा गया है कि उसने इस मामले को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने कई बार उठाया, मगर हर बार उसे अनसुना कर दिया गया।

आशा की मौत से खलबली मच गई। आशा के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बाद में, पुलिस ने उन्हें शांत करा दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए तिरुवंतपुरम मेडिकल कॉलेज भेज दिया।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि सीपीआई-एम पार्टी में महिलाएँ सुक्षित नहीं है। उन्होंने डीजीपी से निष्पक्ष जाँच के लिए कहा है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब महिला ने राजन और जॉय द्वारा प्रताड़ित किए जाने का मामला उठाया गया था, तो ‘वरिष्ठ कॉमरेड’ कार्रवाई करने में विफल क्यों हैं। बता दें कि राजन और जॉय के खिलाफ अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

पुलिस प्रथम दृष्टया मानती है कि यह आत्महत्या का मामला है। सीनियर इंस्पेक्टर रतीश कुमार ने TNM से कहा कि राजन और जॉय के खिलाफ अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “सुसाइड नोट के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया जा सकता है। हम जाँच कर रहे हैं कि क्या आत्महत्या में उनकी कोई भूमिका थी। अगर ऐसा पाया जाता है तो उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -