Sunday, July 14, 2024
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क्या है ‘हरामी नाला’, जहाँ इंफ़्रास्ट्रक्चर मजबूत करने में लगी मोदी सरकार: कैसे पड़ा इसका नाम, भारत के लिए क्यों बनता है परेशानी का सबब

पाकिस्तानी मछुआरे अक्सर यहाँ से पकड़े जाते रहे हैं। कई बार खाली नावें बरामद होती हैं। कड़ी सुरक्षा के बावजूद ये इलाका बहुत परेशान करता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार (12 अगस्त, 2023) को गुजरात के कच्छ में भारत-पाकिस्तान सीमा वाले इलाके में कई इंफ़्रास्ट्रक्चर योजनाओं का शिलान्यास किया। इससे BSF को बड़ी मदद मिलेगी। BSF के लिए एक ‘Mooring प्लेस’ विकसित किया जाएगा, जहाँ गश्ती वाले नाव वगैरह के मेंटेनेंस का काम भी होगा। ये 257 करोड़ रुपए में विकसित किया जाएगा। अमित शाह ने ‘हरामी नाला’ क्षेत्र में चिड़ियामोड़-बियारबेट लिंक रोड और OP टॉवर का भी उद्घाटन किया।

28.2 किलोमीटर की ये सड़क 106.2 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जाएगी। वहीं BSF के लिए जो टॉवर बन रहा है, उसमें 3 करोड़ रुपए लगेंगे। इसके बन जाने के बाद पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ पर 24 घंटे सुरक्षा बलों की कड़ी नज़र रहेगी। साथ ही सड़क बन जाने से सुरक्षा बलों के मूवमेंट में भी तेजी आएगी। मोदी सरकार भारत के सभी सीमावर्ती इलाकों में इंफ़्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने में लगी हुई है।

कैसे पड़ा ‘हरामी नाला’ का नाम, इलाका चुनौतीपूर्ण

इस दौरान आपने मन में ये सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि आखिर ये ‘हरामी नाला’ है क्या, और इसका नाम इस तरह का क्यों है। क्योंकि ‘हरामी’ के गाली वाला शब्द भी है। सन् 2019 में भी इसकी खासी चर्चा हुई थी, जब इधर से पाकिस्तानी आतंकियों के घुसपैठ की साजिश की ख़ुफ़िया जानकारी सामने आई थी। ये इलाका गुजरात, राजस्थान और पाकिस्तान की सीमा से लगता है। आइए, आपको बताते हैं कि आखिर ये है क्या और इसका ऐसा नाम क्यों है।

सीधे-सीधे शब्दों में परिभाषित किया जाए तो ‘हरामी नाला’ कच्छ में भारत-पाकिस्तान को बाँटने वाला समुद्र का हिस्सा है जो 22 किलोमीटर लंबा है। राजस्थान के बाड़मेर का कुछ हिस्सा भी इसे छूता है। इसे ‘नाला’ कहा जाता है क्योंकि ये समुद्र का दलदल वाला हिस्सा है। पानी भी बड़ी मात्रा में है। कीमती झींगा मछली यहाँ पाई जाती है। इसका शिकार वर्जित है, फिर भी लालच में उन्हें पकड़ा जाता रहा है। पानी का स्तर मौसम और समुद्री वेग के हिसाब से कम-ज़्यादा होता रहता है।

पाकिस्तान से घुसपैठ इस रास्ते के सबसे आसान हुआ करती थी। पाकिस्तानी आतंकियों से लेकर पाकिस्तानी जासूस तक, इसके माध्यम से समय-समय पर घुसपैठ करते रहे हैं। इसी कारण इसे ‘हरामी नाला’ कहा जाने लगा। तस्करों के लिए भी भारत में एंट्री के लिए ये इलाका जन्नत जैसा हो गया। पाकिस्तानी मछुआरे अक्सर यहाँ से पकड़े जाते रहे हैं। कई बार खाली नावें बरामद होती हैं। कड़ी सुरक्षा के बावजूद ये इलाका बहुत परेशान करता है।

2008 में 26/11 आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों का समूह, जिनमें अजमल कसाब भी शामिल था – वो सब इसी ‘हरामी नाले’ के माध्यम से नाव से आए थे। भारत से पाकिस्तान शायद ही कोई इस इलाके के माध्यम से गया हो, लेकिन पाकिस्तान से आकर यहाँ से गुजरात-महाराष्ट्र में एंट्री ली जाती रही है। ‘हरामी नाला’ एक ऐसा समुद्री चैनल जो धारा बदलने के लिए भी कुख्यात है।

‘हरामी नाला’ का भूगोल, पाकिस्तान ठोकता है दावा

सर क्रीक और वियान वारी क्रीक भारत में इस इलाके में 6 प्रमुख खाड़ियों में से एक है। वियान वारी क्रीक भारत की तरफ से पाकिस्तान में उत्तर से प्रविष्ट होता है, पूर्व की तरफ जाता है और फिर भारत में घुसता है। यहीं पर ये ‘हरामी नाला’ बन जाता है। फिर ये 2 हिस्सों में बँट जाता है, जिसका से एक पाकिस्तान जाता है और यही भारत के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण है। इसे ‘सर क्रीक एरिया’ भी कहा जाता है। पाकिस्तान इस इलाके पर अपना दावा ठोकता रहा है।

‘हरामी नाला’ वाले इलाके का भूगोल समझिए

सन् 1914 में ‘बॉम्बे गवर्नमेंट रिजॉल्यूशन’ नाम का एक करार हुआ था, जिसमें विभिन्न राज्यों के बीच सीमाओं का निर्धारण किया गया था। पाकिस्तान पूरे के पूरे क्रीक (खाड़ी) पर दावा ठोकता रहा है। हालाँकि, भारत जलीय सीमाओं के निर्धारण के अंतरराष्ट्रीय कानून थालवैग्स समझौते का पालन करता है। इसके तहत अगर जलीय इलाका आवाजाही के योग्य है तो बीचोंबीच से सीमा का निर्धारण होना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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