Wednesday, July 17, 2024
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बाल गृह में SC-ST बच्चों से जबरन करवाते थे ईसाई प्रेयर, दीपावली के दिन भी करते थे मजबूर: NCPCR ने किया औचक निरीक्षण, FIR दर्ज

औचक जाँच में बच्चों के कूट (फर्जी) दस्तावेज बनाए जाने, बच्चों की उम्र के साथ छेड़खानी जैसे मामले सामने आए। इसके अलावा बच्चों ने बताया कि क्रिश्चियन प्रेयर में शामिल न होने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

मध्य प्रदेश के कटनी में एक मिशनरी संस्था द्वारा चलाए जा रहे बाल गृह में बच्चों से जबरन ईसाई प्रार्थना करवाने का मामला सामने आया है। जिसके बाद संस्था के खिलाफ बाल न्याय अधिनियम व मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया गया है। ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने ईसाई संस्था के खिलाफ माधवनगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। इस संबंध में जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल कल्याण समिति की भूमिका भी संदेहास्पद है।

प्रियाँक कानूनगो ने पत्रकारों को मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनसीपीसीआर को कटनी के झिंझरी में चलाए जा रहे बाल गृह की शिकायतें मिली थीं। जिसके बाद आयोग ने ईसाई मिशनरी द्वारा संचालित संस्थान का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बच्चों ने उन्हें बताया कि हिंदू अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) के बच्चों से जबरन क्रिश्चियन प्रेयर करवाया जाता था। दीपावली के दिन भी बच्चों को जबरन ईसाई प्रार्थना करने पर मजबूर किया गया।

औचक जाँच में बच्चों के कूट (फर्जी) दस्तावेज बनाए जाने, बच्चों की उम्र के साथ छेड़खानी जैसे मामले सामने आए। इसके अलावा बच्चों ने बताया कि क्रिश्चियन प्रेयर में शामिल न होने वाले बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। बीमार पड़ने पर उन्हें इलाज नहीं मिलता और खेलकूद में भी शामिल नहीं होने दिया जाता है। प्रियांक ने बताया कि स्पेशल जुवेनाइल पुलिस ने बच्चों का स्टेटमेंट दर्ज कर लिया है और इस संबंध में मामला भी दर्ज कर लिया गया है।

मामले में जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। कानूनगो ने बताया कि अधिकारी ने गोपनीय जाँच की जानकारी लीक की है। उस अधिकारी के खिलाफ बच्चों ने भी शिकायत की थी। साथ ही स्थानीय बाल कल्याण समिति की गतिविधियाँ भी संदिग्ध हैं जिसकी जाँच की जाएगी।

संस्था के खिलाफ 4 बच्चों और 1 बालिग ने अपना बयान दर्ज कराया है। मिशनरी को विदेशों से भी फंडिंग मिलने की बात कही जा रही है। रिपोर्टों में इसे धर्मांतरण के लिए प्रेरित करने का मामला बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि बच्चों द्वारा दी गई जानकारियों के आधार पर मामले की जाँच की जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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