Homeदेश-समाजमुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड के दोषी ब्रजेश ठाकुर को उम्र कैद

मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड के दोषी ब्रजेश ठाकुर को उम्र कैद

यह प्रकरण मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की रिपोर्ट के बाद सामने आया था। इस मामले में साकेत कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO), बलात्कार, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं में आरोप तय किया था।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस मामले में दिल्ली के साकेत कोर्ट ने आरोपित ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट ने 4 फरवरी को सजा पर बहस पूरी कर ली थी। इसके बाद 11 फरवरी सजा की तारीख तय की गई थी। मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड देश के चर्चित यौन उत्पीड़न कांडों में से एक होने के कारण पूरे देश की नजर आरोपितों की सजा पर टिकी हुई थी।

दिल्ली साकेत कोर्ट ने इस मामले के ‘किंगपिन’ और दोषी करार दिए गए ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह प्रकरण मुंबई के टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) की रिपोर्ट के बाद सामने आया था। इस मामले में साकेत कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपितों के खिलाफ पॉक्सो (POCSO), बलात्कार, आपराधिक साजिश और अन्य धाराओं में आरोप तय किया था।

ब्रजेश ठाकुर के अलावा बालिका गृह की अधीक्षक इंदु कुमारी, बालिकागृह की गृह माता मीनू देवी, चंदा देवी, काउंसलर मंजू देवी, नर्स नेहा कुमारी, केस वर्कर हेमा मसीह, सहायक किरण कुमारी, तत्कालीन सीपीओ रवि कुमार, सीडब्लूसी के अध्यक्ष दिलीप कुमार, सीडब्लूसी के सदस्य विकास कुमार, ब्रजेश ठाकुर का ड्राइवर विजय तिवारी, कर्मचारी गुड्डू पटेल, कृष्णा राम, बाल संरक्षण इकाई की तत्कालीन सहायक निदेशक रोजी रानी, रामानुज ठाकुर, रामाशंकर सिंह, बालिकागृह के डॉक्टर अश्विनी, साइस्ता परवीन उर्फ मधु को अदालत ने दोषी करार दिया था।

मुजफ्फरपुर शेल्‍टर होम केस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्‍ली ट्रांसफर किया गया था। तब से इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में चल रही थी और अब जाकर आखिरकार इसमें फैसला सुनाया गया। अदालत ने इस मामले में मार्च 20, 2018 को आरोप तय किए थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -