दिल्ली का सीलमपुर इलाका इन दिनों दहशत के साये में है। यहाँ 17 साल के हिंदू नौजवान कुणाल की निर्मम हत्या ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों की भयावह तस्वीर को सामने ला दिया। स्थानीय लोगों का दावा है कि सीलमपुर में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिसके चलते कई परिवार पलायन को मजबूर हो रहे हैं। कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया से बातचीत में इंसाफ की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उनके बेटे को सुनियोजित तरीके से मारा गया, और इस हत्याकांड के पीछे इलाके की कुख्यात ‘लेडी डॉन’ जिकरा और उसका गैंग है।
कुणाल को पहले गले पर चाकू से मारा, फिर पेट में किए अनगिनत वार
बीते गुरुवार (17 अप्रैल 2025) की शाम करीब 7:38 बजे सीलमपुर के जे-ब्लॉक में कुणाल पर चाकुओं से हमला किया गया। वह घर से दूध और समोसे लाने निकला था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर होगा।

कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि कुछ बदमाशों ने उनके बेटे को बुलाकर गली के बाहर ले गए। वहाँ जिकरा और उसके साथियों ने उस पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। पहला वार कुणाल के गले पर हुआ। वह जैसे-तैसे भागकर स्थानीय क्लीनिक पहुँचा, जहाँ उसकी पट्टी की गई। लेकिन जिकरा का गैंग कहाँ रुकने वाला था? उन्होंने कुणाल को फिर से घेर लिया और उसके पेट पर अनगिनत वार किए। जब तक वह जेपीसी अस्पताल पहुँचा, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कुणाल की माँ इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। वह बार-बार बेहोश हो रही हैं और राजवीर उन्हें संभाल रहे हैं। रोते हुए राजवीर ने कहा, “मेरा बेटा तो दूध लेने गया था। उसने किसी का क्या बिगाड़ा था? जिकरा और उसके गुंडों ने मेरे बच्चे को मार डाला। हमें इंसाफ चाहिए।”
कौन है जिकरा, जिसके नाम से काँपता है सीलमपुर?
इस हत्याकांड का आरोप जिस जिकरा पर है, उसे सीलमपुर के इलाके में ‘लेडी डॉन’ के नाम से जाना जाता है। जिकरा 27 साल की है, पूरी तरह से एक दबंग महिला है। वह सीलमपुर की गलियों में 8-10 लोगों के गैंग के साथ घूमती है और खास तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाती है। जिकरा का एक बच्चा भी है, लेकिन उसकी गुंडागर्दी की कहानियाँ इलाके में मशहूर हैं। वह हमेशा अपने साथ पिस्तौल रखती थी और सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ उसकी तस्वीरें और वीडियो भी वायरल हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिकरा के खिलाफ पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। अभी 2-3 महीने पहले ही वह अवैध हथियार बरामदगी के एक मामले में जेल से छूटी थी। सूत्रों के अनुसार, जिकरा जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा की बीवी जोया के साथ रहती थी। जोया के जेल जाने के बाद जिकरा ने अपना खुद का गैंग बनाया, जिसमें कुछ नाबालिग लड़के भी शामिल थे।

कुणाल की हत्या का कारण जिकरा की पुरानी रंजिश थी। जिकरा का मानना था कि कुणाल उस शख्स ‘लाला’ का दोस्त था, जिसने उसके भाई को कुछ समय पहले पीटा था। हालाँकि, कुणाल नाबालिग होने के कारण उस मामले में बच गया था, लेकिन जिकरा ने उसे जिम्मेदार ठहराया और बदला लेने के लिए उसकी हत्या कर दी।
सीलमपुर में हिंदुओं की दयनीय स्थिति
ऑपइंडिया की टीम ने ग्राउंड रिपोर्ट के लिए सीलमपुर का दौरा किया। कुणाल के घर के पास ही संत रविदास मंदिर है, जहाँ उसका परिवार शरण लिए हुए है। मंदिर के आसपास की गलियों में ‘हिंदू पलायन करने को मजबूर’ और ‘घर बिकाऊ है’ जैसे पोस्टर चिपके हुए हैं। ऑपइंडिया के पास इन पोस्टरों की तस्वीरें भी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि 2008 से 2025 के बीच सीलमपुर में कम से कम 7 हिंदुओं की हत्या मुस्लिमों द्वारा की गई है। इनमें से कई मामले पुरानी रंजिश या सांप्रदायिक तनाव से जुड़े हैं।
कुणाल का घर और जिकरा का घर सिर्फ दो गलियों के फासले पर हैं। ऑपइंडिया की टीम जिकरा के घर भी गई, जो उसकी नानी का बताया जाता है। लेकिन वहाँ ताले और जंजीरें लटक रही थीं। जिकरा और उसका पूरा परिवार फरार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिकरा का गैंग आए दिन हिंदुओं को धमकाता था। एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “यहाँ हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। जिकरा और उसके गुंडे हमें जीने नहीं दे रहे। कोई सिर फोड़ देता है, कोई आँख निकाल देता है।”

कई लोगों ने जिकरा की नानी के घर के आसपास भी जिकरा का जिक्र करने से मना कर दिया। यहाँ तक कि ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम जब मौके पर पहुँची, तो लोगों ने जिकरा के घर की पहचान तक करने से इनकार कर दिया। जिकरा की नानी का घर जिस गली में है, उसकी शुरुआत में ही एक मस्जिद है और उसमें मदरसा भी चलता है। यहीं से पढ़कर निकले लोग आज जिकरा की ताकत बने हुए हैं। जिकरा के डर की इंतिहाँ तो देखिए, कि उसकी गली में खड़े लोग भी उसका घर बताने से बचते दिखे।

पलायन को मजबूर हो रहे हिंदू परिवार, पोस्टर भी लगाया
स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि सीलमपुर कभी हिंदू बाहुल्य इलाका हुआ करता था, लेकिन अब यहाँ मुस्लिम आबादी हावी हो रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिकरा जैसे दबंगों की गुंडागर्दी से तंग आकर कई हिंदू परिवार अपने घर बेचकर पलायन कर रहे हैं। संत रविदास मंदिर वाली गली में ही कम से कम 3 हिंदू परिवारों ने अपने घर मुस्लिमों को बेच दिए हैं। 50-60 लाख रुपये में मकान खरीदकर मुस्लिम परिवार इलाके की डेमोग्राफी को तेजी से बदल रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने विरोध में प्रदर्शन भी किए। ‘हिंदू पलायन करने को मजबूर’ जैसे पोस्टर लगाकर उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की। एक बुजुर्ग ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे बच्चे यहाँ सुरक्षित नहीं हैं। हर दिन डर में जीते हैं। सरकार और पुलिस कुछ नहीं करती। हम मजबूरन अपने घर बेचकर जा रहे हैं।”

जिकरा पर कार्रवाई पहले ही हो जाती, तो शायद कुणाल जिंदा होता
कुणाल हत्याकांड के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। 18 अप्रैल को जिकरा को गिरफ्तार किया गया, और 20 अप्रैल तक कुल 9 आरोपितों को हिरासत में लिया गया। इनमें दो महिलाएँ (जिकरा और जाहिदा) और दो नाबालिग शामिल हैं। गिरफ्तार अन्य आरोपितों में साहिल (18), सोहैब (35), नफीस (32), अनीश (19), और विकास (29) शामिल हैं। पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर, गाजियाबाद, मेरठ, मुरादाबाद और अमरोहा में छापेमारी कर इन लोगों को पकड़ा।
पुलिस के मुताबिक, कुणाल और साहिल के बीच पुरानी रंजिश थी, जिसके चलते जिकरा, साहिल और दो नाबालिगों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। बाकी आरोपितों ने मुख्य आरोपितों को फरार होने और छिपने में मदद की। पुलिस अभी हत्या में इस्तेमाल हथियारों की तलाश कर रही है। ग्राउंड रिपोर्टिंग के क्रम में ऑपइंडिया की टीम सीलमपुर थाने भी पहुँची। उस समय एसएचओ मौके पर मौजूद नहीं थे। एक सिपाही ने कहा, “अब सबकुछ खत्म हो चुका है, तब आप आए हैं। जिकरा और उसका गैंग जेल भेजा जा चुका है।”

हालाँकि, स्थानीय लोग पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिकरा जैसे अपराधी बार-बार जेल से छूटकर और बड़े जुर्म करते हैं। एक व्यक्ति ने गुस्से में कहा, “जिकरा को पहले भी पकड़ा गया था, लेकिन वह फिर छूट गई। अगर पुलिस ने पहले सख्ती की होती, तो शायद हमारा कुणाल आज जिंदा होता।”
सीएम ने दिया बयान, लेकिन कार्रवाई चाहते हैं लोग
कुणाल हत्याकांड के बाद सीलमपुर में कई दिनों तक तनाव रहा। स्थानीय लोगों के विरोध और पलायन की खबरों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी बयान देने के लिए मजबूर किया। लेकिन हिंदू समुदाय का मानना है कि सरकार और मुख्यधारा की मीडिया इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है। एक बार मामले की कवरेज के बाद मेनस्ट्रीम मीडिया गायब हो चुका है। सरकार और प्रशासन से कोई पहुँचा नहीं। बीजेपी नेता मौके पर पहुँचते हैं और सहायता की बात भी कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई खास कदम नहीं उठाया गया। सिवाय 9 आरोपितों को पकड़ने के। सरकार चाहती तो पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकती थी।
कुणाल के पिता राजवीर सिंह ने ऑपइंडिया से कहा, “मेरे बेटे को मारने वालों को सजा मिलनी चाहिए। जिकरा और उसके गैंग ने हमारे परिवार को बर्बाद कर दिया। हम चाहते हैं कि सरकार हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कुछ करे, ताकि कोई और परिवार हमारी तरह न टूटे।”

सीलमपुर में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और पलायन की यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड की कहानी नहीं है। यह उस डर और असुरक्षा की कहानी है, जो एक समुदाय को अपने ही घरों से बेघर कर रही है। सवाल यह है कि आखिर कब तक हिंदू परिवार इस तरह डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे? और कब तक जिकरा जैसे अपराधी बेखौफ होकर गलियों में गुंडागर्दी करते रहेंगे?


