Wednesday, July 24, 2024
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लाल किला हमला: लश्कर के आतंकी मोहम्मद आरिफ को होकर रहेगी फाँसी, SC ने खारिज की पुनर्विचार याचिका

पाकिस्तान स्थित कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कुछ आतंकवादी 22 दिसंबर 2000 को लाल किले परिसर में घुसकर में घुसकर राजपूताना राइफल्स की 7वीं बटालियन के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में दो जवान और एक आम नागरिक मारे गए थे।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने साल 2000 के लाल किला हमले (Lal Qila Attack) मामले के दोषी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक को किसी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए फाँसी की सजा को बरकरार रखा है। इस मामले में निचली अदालत ने आरिफ को फाँसी की सजा सुनाई थी।

दरअसल, साल 2005 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फाँसी की सजा को आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बाद आरिफ ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने उसकी इस याचिका को खारिज कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा, “हमने प्रार्थनाओं को स्वीकार कर लिया है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उसका दोष सिद्ध होता है। हम इस अदालत द्वारा लिए गए विचार की पुष्टि करते हैं और समीक्षा याचिका को खारिज करते हैं।”

इस मामले में आरिफ को निचली अदालत ने 31 अक्टूबर 2005 को दोषी मानते हुए फाँसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए फाँसी की सजा को बरकरार रखा था। साल 2014 में आरिफ द्वारा दाखिल क्यूरेटिव याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

इस बार भी इस्लामी आतंकी आरिफ ने फाँसी की सजा से बचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। आरिफ की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई ओपन कोर्ट में की गई।

बता दें कि साल 2015 में आतंकी याकूब मेमन और आरिफ की याचिका पर ही फैसला दिया था कि फाँसी की सजा पाए दोषियों की पुनर्विचार याचिका ओपन कोर्ट में सुनी जानी चाहिए। इसके पहले पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई न्यायाधीश अपने चैंबर में करते थे।

दरअसल, पाकिस्तान स्थित कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के कुछ आतंकवादी 22 दिसंबर 2000 को लाल किले परिसर में घुसकर में घुसकर राजपूताना राइफल्स की 7वीं बटालियन के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में दो जवान और एक आम नागरिक मारे गए थे। हालाँकि, जवानों ने कार्रवाई करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया था, लेकिन अन्य आतंकी लाल किले की दीवार फाँदकर भागने में सफल रहे थे।

इस मामले में पाकिस्तान के एबटाबाद के मास्टरमाइंड मोहम्मद आरिफ समेत 11 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 18 साल से फरार एक अन्य आतंकवादी बिलाल अहमद कावा को दिल्ली पुलिस और गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने 2018 में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस ने अपनी जाँच में पाया था कि बिलाल के बैंक खाते में आरिफ ने लाल किले पर हमले के लिए 29.5 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आरिफ ने जुलाई 2000 में कनॉट प्लेस के एक निजी बैंक में खाता खुलवाया था और इसी खाते से उसने जुलाई और नवंबर 2000 के बीच पैसे भेजे थे।

पूछताछ के दौरान बिलाल ने पुलिस को बताया था कि वह पिछले 18 सालों में बार-बार अपना ठिकाना बदलता रहा है। जिस समय उसे गिरफ्तार किया गया था, वह कश्मीर में रह रहा था। बताया जाता है कि बिलाल दिल्ली में रहने वाले अपने भाई से मिलने जा रहा था, तभी उसे हवाईअड्डे पर गिरफ्तार किया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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