Tuesday, July 16, 2024
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मजहबी बर्बरता पर ‘मौन’ हुआ उदयपुर, जुलूस पर पत्थरबाजी की खबरें: कन्हैया लाल के परिवार ने CM अशोक गहलोत से माँगी सुरक्षा

"हमने सुरक्षा की माँग की है। मेरे पिता को सुरक्षा नहीं दी गई लेकिन हमें मुहैया कराया जाना चाहिए। हमें इसका आश्वासन दिया गया है। दोषियों को मौत की सजा से कम कुछ नहीं दिया जाना चाहिए।"

राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की हत्या के बाद वहाँ आज 30 जून 2022 (गुरुवार) को हिन्दू संगठनों ने मौन जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया। इस दौरान पत्थर फेंके जाने की खबर भी सामने आई है। हालाँकि SP उदयपुर ने किसी भी प्रकार की पत्थरबाजी से इंकार किया है। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मृतक कन्हैयालाल के परिजनों से मुलाक़ात की।

CM गहलोत ने कन्हैयालाल के परिवार से संवेदना जताते हुए घरवालों को हर मदद का आश्वासन दिया। साथ ही CM ने पीड़ित परिवार को 51 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा। गहलोत ने आगे मीडिया से बात करते हुए कहा- NIA एक महीने के अंदर इस केस में जल्दी सजा दिला दे। NIA को समझना चाहिए कि प्रदेश के लोगों की भावना क्या है? कन्हैया को सुरक्षा दी गई या नहीं, क्या कमी रही, सभी चीजें NIA की जाँच में सामने आ जाएगी। NIA की जाँच पर भरोसा करना चाहिए, जाँच निष्पक्ष होगी, हम पूरा सहयोग करेंगे। इस घटना ने देश को हिला दिया।”

वहीं कन्हैया लाल के बेटे यश ने भी राजस्थान सरकार से परिवार के लिए सुरक्षा की माँग की। उन्होंने कहा, “हमने सुरक्षा की माँग की है। मेरे पिता को सुरक्षा नहीं दी गई लेकिन हमें मुहैया कराया जाना चाहिए। हमें इसका आश्वासन दिया गया है। दोषियों को मौत की सजा से कम कुछ नहीं दिया जाना चाहिए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मौन जुलूस उदयपुर के सर्व समाज की तरफ से निकाला गया था। इसमें शामिल लोगों की संख्या हजारों में थी। यह टाउन हॉल से शुरू हो कर DM ऑफिस पर जा कर खत्म हुआ। यहाँ जुलूस के आयोजकों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में कहा जा रहा जब लोग DM को ज्ञापन सौंप कर लौट रहे थे तब उन पर दिल्ली गेट के पास पत्थर फेंके गए। पुलिस ने पत्थरबाजों को बल प्रयोग कर के भगा दिया। अमर उजाला का दावा है कि इस दौरान एक ढाबे को जलाया गया है और एक धर्मस्थल को भी नुकसान पहुँचाया गया है। हालाँकि इसी रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस इस मामले में कोई जवाब नहीं दे रही है। वहीं आज इस जुलूस के समापन पर हिन्दू संगठनों ने DM के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया।

इंडिया TV की ग्राउंड रिपोर्ट में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “दिल्ली गेट पर मुस्लिमों की दुकानें है। अंदर से पत्थरबाजी हुई तो माहौल खराब हो गया।” एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने जताया, “इनके वहाँ गैराज हैं। पुलिस अंदर गई है और कार्रवाई कर रही है।” रिपोर्ट के मुताबिक पथराव मुस्लिम समुदाय की दुकानों के पीछे से हुआ। वहीं SP उदयपुर ने इसी रिपोर्ट में किसी भी पत्थरबाजी से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा, “ऐसी कोई बात नहीं है।” इसके बाद पथराव का विरोध कर रहे लोगों को हटाया जाने लगा।

वहीं ऑपइंडिया ने आज के मौन जुलूस में शामिल उदयपुर व्यापर मंडल के सदस्य कुंदन चौहान से बात की। उन्होंने बताया, “जब मौन प्रदर्शन खत्म हो गया था तब लौट रहे लोगों पर दिल्ली गेट के पास वक्फ बोर्ड की एक जमीन के पास से पत्थर फेंका गया। ये पत्थर जुलूस में शामिल लोगों पर फेंका गया था। पत्थरबाजों को पुलिस ने भगा दिया। हमें SP साहब ने बताया कि हम मामले को दिखवा रहे। हिन्दू समाज पथराव नहीं करता। हम तो मौन जुलूस निकाल रहे थे। लेकिन लगता है कि सभी नियम और कानून हिन्दुओं पर ही लागू हैं। शायद हमें ही भाईचारा निभाना है।”

जुलूस में शामिल एक अन्य हिन्दू कार्यकर्ता रंजीत सिंह ने भी हमसे बात करते हुए हिन्दुओं की तरफ से किसी भी प्रकार की हिंसा होने की बात को गलत बताया। उन्होंने कहा कि हमारा जुलूस पूरी तरह से शांतिपूर्ण रूप से गुजरा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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