सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कहा कि यूपी अब आस्था और विकास के संतुलन का मॉडल बन गया है। राज्य अब दंगों की जगह मंदिर प्रधान अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रह है।
मेलों में जुटे अपार श्रद्धालु
प्रयागराज का माघ मेला 2026 का सफल आयोजन हुआ जिसमें अब तक के कई बड़े आयोजनों को पीछे छोड़ दिया। 2013 के कुंभ मेले में 12 करोड़ श्रद्धालु शामिल हुए थे, लेकिन अब माघ मेले में 21 करोड़ श्रद्धालु आए। प्रयागराज के कुंभ मेला 2025 ने तो सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। इस मेले में करीब 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई। इस महाआयोजन की सफलता ने योगी सरकार के प्रति जनता में विश्वास भरा और माघ मेले में रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाने पहुँचे।
आँकड़ों की बात करें तो 2020 के माघ मेले में 4 करोड़, 2022 के माघ मेले में 4.30 करोड़, 2023 के माघ मेले में 9 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। लेकिन माघ मेला 2026 में कई गुणा ज्यादा लोग पहुँचे। सिर्फ मौनी अमावस्या पर रिकॉर्ड 20 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। बसंत पंचमी के दिन 3.56 लाख लोग संगम में स्नान के लिए पहुँचे, माघी पुर्णिमा के दिन श्रद्धालुओं का आँकड़ा 21 करोड़ पार कर गया।
महाशिवरात्रि पर अंतिम स्नान के दिन करीब 1.5 करोड़ लोगों के संगम नगरी में आने और स्नान करने का अंदाज प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने लगाया है। इसके लिए घाटों की लंबाई बढ़ाई गई, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
मंदिरों की बात की जाए तो योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में अयोध्या का भव्य राममंदिर का निर्माण, अयोध्या में दूसरे मंदिरों और घाटों का विकास किया गया। इसके दर्शन करने करोड़ों लोग अब तक आ चुके हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण हुआ जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई। संभल में 54 से ज्यादा मंदिरों की पहचान की गई है, जिसे विकसित किए जाएगा।
मऊ में 61 फीट ऊँची महादेव की मूर्ति और कॉरिडोर बनाया गया है। जिस जगह पर कॉरिडोर बनाया गया है, वहाँ कभी कचरे का ढेर हुआ करता था। लेकिन अब खूबसूरत गुलाबी पत्थरों से घाटों का सौंदर्यीकरण किया गया है। भगवान भोले की 61 फीट ऊँची प्रतिमा हर किसी का ध्यान खींचती है। दरअसल योगी राज में राज्य में करीब 300 पुराने मंदिरों का पुनर्निर्माण किया गया है। यही वजह है कि सीएम योगी ने विधानसभा में कहा कि यूपी अब उत्सव राज्य बन गया है। राज्य में पर्यटन को विकसित करने के लिए योगी सरकार ने 150 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।
2017 से कोई सांप्रदायिक दंगा राज्य में नहीं हुआ
उत्तर प्रदेश में दंगों का इतिहास रहा है। 1978 का संभल का दंगा, 1980 का मुरादाबाद का दंगा, 2006 का अलीगढ़ दंगा, 2013 का मुजफ्फरनगर दंगा, 2016 का बिजनौर हिंसा अहम हैं। समाजवादी पार्टी के शासनकाल में इनमें से ज्यादातर दंगे हुए। लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली एनडीए की सरकार बनने के बाद राज्य में एक भी दंगा नहीं हुआ।
सीएम योगी ने इसकी चर्चा करते हुए विधानसभा में कहा कि यूपी में अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है। गुंडाराज खत्म हो गया है। समाजवादी पार्टी के शासन काल में यूपी को लोग संदेह की दृष्टि से लोग देखते थे, प्रदेश की छवि काफी खराब थी, लेकिन अब राज्य का तेजी से विकास हुआ है और ‘बीमारू’ राज्य से ऊपर उठकर अब यूपी तेज विकास करने वाला राज्य बन गया है। अब यूपी गुंडा टैक्स, वसूली से मुक्त है। अब यूपी में ना कर्फ्यू है ना दंगा है, सब चंगा है।
महिलाएँ और व्यापारी भयमुक्त हुए- सीएम योगी
सीएम योगी ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कहा कि एक वक्त था जब घर की बिटिया बाहर जाने के नाम से घबराती थी, व्यापारी अपना कारोबार समेट कर राज्य से बाहर जा रहे थे। 2017 से पहले राज्य में अपराधी अपनी समानांतर सरकार चला रहे थे, माफिया खुला घूमते थे। लेकिन, अब राज्य में कानून व्यवस्था ऐसी हो गई है कि महिलाएँ खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, व्यापारी अपना कारोबार शुरू करने में हिचक नहीं रहे हैं। दरअसल गुंडा टैक्स जैसी सभी तरह की रंगदारी सरकार ने रोक दी है।
विगत 8 वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस बल में 2,19,000 पुलिस कार्मिकों की भर्ती संपन्न की गई है, जिसमें 20 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
— MyGov UP (@MyGov_UP) December 17, 2025
आज उत्तर प्रदेश पुलिस बल में 44,000 से अधिक महिला पुलिस कार्मिक अपनी सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
— मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी pic.twitter.com/kRdMoz1FnK
सीएम योगी के शासन के दौरान 219000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है। इनमें से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए अनिवार्य किए गए। 2017 से पहले जब उत्तर प्रदेश पुलिस बल में 10,000 महिला पुलिसकर्मी थीं लेकिन पिछले 9 वर्षों में उनकी संख्या बढ़ कर 44,000 हो गई है।
सीएम योगी ने कहा है कि राज्य ट्रिपल टी यानी टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफोर्मेशन का प्रतीक है और सामूहिक प्रयास से सुशासन राज्य में स्थापित हुआ है।


