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नेशनल हाईवे पर होने वाले एक्सीडेंट्स और मौतों पर 11% की कमी, UP में दिखा सबसे ज्यादा सुधार: जानें- CM योगी की नीतियों और सख्ती ने कैसे बदली तस्वीर

उत्तर प्रदेश में एनएच पर मौतें 2024 के 9,560 से घटकर 2025 में 6,973 रह गईं यानी 2,587 जानें बचीं। यह देश में सबसे बड़ी गिरावट है।

भारत दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) कुल सड़क नेटवर्क का केवल 2.3% हैं, लेकिन यहाँ होने वाली मौतें देश की कुल सड़क हादसों में हुई मौतों का 36% से ज्यादा होती हैं। हालाँकि वर्ष 2025 में पहली बार तीन साल की बढ़ती प्रवृत्ति टूटी और एनएच पर दुर्घटनाएँ तथा मौतें दोनों 11% से अधिक घटीं।

सड़क परिवहन एवँ राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के लोकसभा में पेश आँकड़ों के अनुसार, 2025 में एनएच पर 1,34,307 दुर्घटनाएँ हुईं और 57,482 लोगों की जान गई, जो 2024 के 1,50,958 दुर्घटनाओं और 64,772 मौतों से काफी कम है।

इस ऐतिहासिक कमी में उत्तर प्रदेश का योगदान सबसे बड़ा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने 2017 से ही सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। चाहे राष्ट्रीय राजमार्ग हों या राज्य की सड़कें, गुणवत्ता सुधार, इंजीनियरिंग में सुधार, सख्त प्रवर्तन और त्वरित आपात सहायता… सब पर लगातार काम हुआ। परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश में एनएच पर मौतें 2024 के 9,560 से घटकर 2025 में 6,973 रह गईं यानी 2,587 जानें बचीं। यह देश में सबसे बड़ी गिरावट है।

साल 2025 के आँकड़ों में यूपी ने की सुधारों की अगुवाई

MoRTH के प्रोविजनल आँकड़े (eDAR पोर्टल पर राज्यों से प्राप्त जानकारी पर आधारित) स्पष्ट दिखाते हैं कि 2025 में एनएच पर कुल दुर्घटनाएँ 16,651 और मौतें 7,290 कम हुईं। इस कमी का नेतृत्व इन पाँच राज्यों ने किया- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना। इनमें से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने अकेले 6,072 मौतों की कमी में योगदान दिया।

राज्यवार प्रमुख आँकड़े-

  • उत्तर प्रदेश: मौतें 9,560 से 6,973 (2,587 कम)
  • मध्य प्रदेश: मौतें 4,644 से 2,882 (1,762 कम)
  • पंजाब, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना ने भी उल्लेखनीय सुधार दिखाया।

वहीं कुछ राज्यों में वृद्धि हुई

  • गुजरात: दुर्घटनाएँ 3,519 से 3,944, मौतें 2,192 से 2,380
  • झारखंड: दुर्घटनाएँ 2,039 से 2,056, मौतें 1,686 से 1,783
  • उत्तराखंड: दुर्घटनाएँ 828 से 875, मौतें 543 से 605
  • दिल्ली: दुर्घटनाएँ 593 से 1,827 (बड़ी बढ़ोतरी)
सड़क दुर्घटना के मामले में यूपी में सबसे ज्यादा सुधार

ये आँकड़े साबित करते हैं कि जहाँ कुछ राज्य पीछे रहे, वहीं उत्तर प्रदेश ने सबसे प्रभावी और व्यवस्थित सुधार किया। यह संयोग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी नीतियों और सख्त निगरानी का परिणाम है।

योगी सरकार की नीतियों से आया सुधार

उत्तर प्रदेश में 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौतें 9,560 से घटकर 6,973 हो गईं। यह देश में सबसे बड़ी कमी है। यह संयोग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लगातार सख्ती और बहुआयामी रणनीति का नतीजा है। सरकार बनने के बाद से ही सड़क सुरक्षा को ‘सामाजिक चुनौती’ मानते हुए 4E मॉडल (Education, Enforcement, Engineering, Emergency Care) पर जोर दिया गया है।

यूपी में BJP सरकार बनते ही सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता

योगी आदित्यनाथ ने 18 मार्च 2017 को पहली बार मुख्यमंत्री बनते ही सड़क गुणवत्ता और सुरक्षा पर सख्त निर्देश दिए थे। 25 मार्च 2017 को उन्होंने आदेश दिया कि ढाई महीने (जून 2017 तक) में पूरे प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाए। यह अभियान इतना गंभीर था कि अधिकारियों को व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपी गई और समय-समय पर समीक्षा की गई।

इस शुरुआती कदम ने आधार तैयार किया। गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाएँ उत्तर प्रदेश में बहुत आम थीं। गड्ढामुक्त सड़क अभियान ने न केवल सड़कों की गुणवत्ता सुधारी, बल्कि लोगों में विश्वास भी जगाया कि सरकार सड़क सुरक्षा को गंभीरता से ले रही है।

साल 2017 के बाद गड्ढामुक्त अभियान रुका नहीं। हर साल, खासकर त्योहारों से पहले, मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए। सितंबर 2025 में फिर चेतावनी दी गई कि त्योहारों से पहले सभी शहरों और गाँवों की सड़कें गड्ढामुक्त होंगी। नगर निगमों, पीडब्ल्यूडी और ग्राम विकास विभाग को जवाबदेह बनाया गया।

दरअसल, खराब सड़कें दुर्घटनाओं का बड़ा कारण होती हैं, जिसमें वाहन फिसलना, टायर फटना, अचानक ब्रेक लगाने से जुड़ी घटनाएँ आम हो जाती है। ऐसे में योगी सरकार ने गड्ढा मुक्त अभियान को नियमित बना दिया है। सड़कों की गुणवत्ता में सुधार से न केवल एनएच, बल्कि राज्य राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों पर भी दुर्घटनाएँ घटीं। यह योगी सरकार की वह नीति है जो लंबे समय तक असर दिखाती है।

कोहरे में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश में सर्दियों में घना कोहरा दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनता है। दिसंबर 2025 में यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा में हुए भीषण हादसे (13 मौतें) के बाद मुख्यमंत्री योगी ने तुरंत समीक्षा की और कड़े कदम उठाए

  • एक्सप्रेसवे पर गश्त बढ़ाना, ब्लैक स्पॉट्स पर टीम तैनात करना
  • रिफ्लेक्टर्स लगाना, 24×7 क्रेन और एम्बुलेंस उपलब्ध कराना
  • कोहरे में स्पीड लिमिट 120 किमी/घंटा से घटाकर 80 किमी/घंटा करने का प्रस्ताव
  • टू-व्हीलर सवारों के लिए टोल प्लाजा पर रुकने की व्यवस्था, कंबल और बुनियादी सुविधाएं
  • टोल प्लाजा पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम से रियल-टाइम सूचना
  • सुरक्षा दिशानिर्देशों वाले पर्चे बाँटना, हेल्पलाइन नंबर 14449 का प्रचार
  • सड़क पर पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित
  • स्ट्रीट लाइटिंग की निरंतर जाँच, खराब लाइट तुरंत ठीक करना

ये उपाय यमुना, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर लागू किए गए। परिणामस्वरूप कोहरे में होने वाली रियर-एंड टक्करें काफी कम हुईं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि कोई व्यक्ति खुले में सोता न मिले और बेघरों के लिए रैन बसेलर और अलाव की व्यवस्था हो। यह मानवीय दृष्टिकोण भी योगी सरकार की विशेषता है।

AI आधारित रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट लागू करने वाला देश का पहला राज्य

अगस्त 2025 में उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसे केंद्र सरकार से AI आधारित सड़क सुरक्षा पायलट प्रोजेक्ट लागू करने की मंजूरी मिली। इसके लिए 2025-26 के बजट में 10 करोड़ रुपये रखे गए। जिसमें-

  • ITI लिमिटेड और mLogica के साथ सहयोग
  • दुर्घटना, वाहन, मौसम, सड़क विशेषताएँ और ड्राइवर प्रोफाइल का डेटा एनालिसिस
  • AI मॉडल से दुर्घटना के कारण पहचानना और भविष्य में रोकथाम
  • रियल-टाइम डेटा से नीति निर्माण
  • 6 सप्ताह का पायलट प्रोजेक्ट, फिर केंद्र को विस्तृत रिपोर्ट

यह तकनीकी कदम दिखाता है कि योगी सरकार पारंपरिक उपायों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक भी अपनाने में सबसे आगे है। AI से दुर्घटनाओं के बारे में पहले से अंदाजा लगाकर उन्हें पहले ही रोका जा सकता है, यह योगी सरकार की दूरदर्शिता का प्रमाण है।

जनवरी को घोषित किया ‘सड़क सुरक्षा माह’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 दिसंबर 2025 को निर्देश दिया कि जनवरी 2026 को पूरे राज्य में ‘सड़क सुरक्षा माह’ मनाया जाए। 4E मॉडल पर आधारित यह अभियान जन आंदोलन बने, इसके लिए विशेष निर्देश दिए गए-

  • पहला सप्ताह: जागरूकता, तहसील से जिला स्तर तक प्रचार
  • वास्तविक दुर्घटना केस स्टडी का उपयोग
  • NSS, NCC, डिजास्टर मित्र, स्काउट्स-गाइड्स की भागीदारी
  • बार-बार नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस जब्त करना, वाहन जब्त करना
  • ब्लैक स्पॉट्स की स्थायी मरम्मत, रोड सेफ्टी ऑडिट
  • केवल टेबल-टॉप स्पीड ब्रेकर
  • एम्बुलेंस, स्कूल वाहन, भारी वाहनों की फिटनेस जांच
  • 300 किमी से अधिक दूरी के लिए दो ड्राइवर अनिवार्य
  • गोल्डन ऑवर पर जोर, 108 और ALS एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम कम करना
  • अवैध पार्किंग, अतिक्रमण पर सख्ती
  • शराब की दुकानों को स्कूल-कॉलेज से दूर रखना

नवंबर 2025 तक राज्य में 46,223 दुर्घटनाओं और 24,776 मौतों की जानकारी सामने आने पर योगी आदित्यनाथ बेहद गंभीर हो गए। उन्होंने इसे ‘पूरे परिवार का आजीवन दर्द’ बताते हुए बेहद कड़े मापदंडों को अपनाने का आदेश दिया, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर कड़ाई से लगाम लगाई जा सके।

एक मॉडल राज्य की दिशा में बढ़े यूपी के कदम

उत्तर प्रदेश ने 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे बड़ी गिरावट दर्ज कर साबित किया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और बहुआयामी रणनीति से सड़क सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 से लेकर 2025 तक हर मौसम, हर चुनौती के लिए त्वरित और सख्त कदम उठाए। कोहरे में विशेष उपाय, AI तकनीक, जन आंदोलन, गड्ढामुक्त अभियान और 4E मॉडल का संतुलित क्रियान्वयन… ये सभी कदम मिलकर उत्तर प्रदेश को सड़क सुरक्षा में मॉडल राज्य बना रहे हैं।

यह प्रयास केवल आँकड़ों में कमी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों को आजीवन दर्द से बचाने की दिशा में एक मानवीय पहल है। अन्य राज्य भी उत्तर प्रदेश के इन कदमों से प्रेरणा ले सकते हैं।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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