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दलित महिला की अर्थी बनाने को तैयार नहीं हुए गाँव के बढ़ई, दूसरे गाँव के बढ़ई ने आकर बनाया तब हुआ अंतिम संस्कार: पुलिस ने ‘मजहब’ के एंगल को नकारा

पुलिस के अनुसार जाति या मजहब के नाम पर अर्थी न बनाने की बात सरासर अफवाह और आधारहीन है। मृतका के परिजन 'विशेष प्रकार' की अर्थी बनवाना चाह रहे थे जो गाँव के बढ़ई बनाने में सक्षम नहीं थे। यही कारण है कि दूसरे गाँव से बढ़ई को बुलाया गया।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक दलित महिला की शव यात्रा के लिए गाँव के तीन बढ़ाई ने अर्थी बनाने से इनकार कर दिया। तीनों बढ़ई सैफी समुदाय से बताए जाते हैं। हालाँकि पुलिस ने इस मामले में किसी तरह के मजहबी या जातीय भेदभाव के आरोपों का खंडन किया है। बताया जाता है कि दूसरे गाँव से बढ़ई को बुलाकर अर्थी बनवाई गई। इसके बाद महिला का अंतिम संस्कार हो पाया। मामला रविवार (19 मार्च 2023) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला एंचोडा कंबोह थाना क्षेत्र के गाँव बाबूखेड़ा का है। रविवार को यहाँ जाटव समुदाय के धर्मपाल की 60 वर्षीया पत्नी इंद्रेश का देहांत हो गया। पारम्परिक तौर पर गाँव में शव यात्रा के लिए अर्थी बनाने का काम स्थानीय बढ़ई करते आए हैं। लेकिन गाँव के ही बढ़ई सत्तार ने अर्थी बनाने से मना कर दिया। उसके बाद गाँव के 2 अन्य बढ़ई ने भी ऐसा ही किया।

इस घटना की जानकारी जब स्थानीय पुलिस को मिली तो वह भी मौके पर पहुँची। परिजन दूसरे गाँव से बढ़ई लेकर आए। उसने अर्थी बनाई और इंद्रेश का अंतिम संस्कार हुआ।

ऑपइंडिया ने इस मामले में ऐचौड़ा कंबोह थाने के SHO से बात की। SHO ने बताया कि जाति या मजहब के नाम पर अर्थी न बनाने की बात सरासर अफवाह और आधारहीन है। उन्होंने कहा कि मृतका के परिजन ‘विशेष प्रकार’ की अर्थी बनवाना चाह रहे थे जो गाँव के बढ़ई बनाने में सक्षम नहीं थे। यही कारण है कि दूसरे गाँव से बढ़ई को बुलाया गया। थाना प्रभारी ने बताया कि मृतक के बेटे ने पुलिस को यह लिखित तौर पर दिया है कि उनके साथ कोई भी जातिगत भेदभाव नहीं किया गया है। मामले में किसी प्रकार की शिकायत भी पुलिस से नहीं की गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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