Saturday, May 18, 2024
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‘अब यति का सिपाही हूँ… सनातन के दुश्मनों से मिलकर लड़ेंगे’ : डासना देवी मंदिर में हवन पूजा-पाठ के बाद बोले ‘वसीम रिजवी’

मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने वसीम को हिंदू धर्म में शामिल करवाने के बाद कहा कि उन्होंने वसीम को त्यागी उपजाति इसलिए दी क्योंकि वह बताना चाहते हैं कि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था कमजोरी नहीं है।

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ‘वसीम रिजवी’ ने आज (6 दिसंबर 2021) डासना देवी मंदिर में हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। अब उनका नाम जितेंद्र नारायण स्वामी/ त्यागी किया गया है। इस धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के दौरान मंदिर में हवन पूजा और अनुष्ठान हुए और ‘रिजवी’ से जलाभिषेक करवाया गया।

मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने बताया कि उन्होंने वसीम को त्यागी उपजाति इसलिए दी क्योंकि वह बताना चाहते हैं कि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था कमजोरी नहीं है। वहीं ‘रिजवी’ ने कहा, “मैं अब यति का सिपाही हूँ, सनातन के दुश्मनों से मिल कर लड़ेंगे।”

हिंदू धर्म अपनाने के बाद मीडिया से बात करते जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी

‘रिजवी’ ने हिंदू धर्म स्वीकारते हुए कहा कि उन्होंने इस्लाम के बारे में इतना कुछ जान लिया है कि अब उसमें रहने का मतलब ही नहीं था। वह कहते हैं, “हर दिन मुझे इस्लाम से खारिज किया जाता था। अब मैं खुद ही इससे निकल गया।” इस दौरान ‘रिजवी’ ने सबसे बड़ा खतरा ISIS को बताया।

हिंदू धर्म में प्रवेश के बाद यति नरसिंहानंद

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा धर्म सनातन धर्म ही है। इस्लाम कोई धर्म नहीं है। वह बोले कि उनका सनातन को अपनाना कोई धर्म परिवर्तन नहीं है। उन्होंने कहा, “जब मुझे इस्लाम से निकाल दिया गया है तो मेरी मर्जी मैं कौन सा धर्म चुनता हूँ।”

यहाँ बता दें कि हिंदू धर्म को स्वीकार करने के लिए शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल रात ही 10 बजे ही डासना देवी मंदिर पहुँच गए थे। वहाँ मंदिर के पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्हें विधिवत सनातन धर्म ग्रहण करवाया। वहीं इस पूरी प्रक्रिया के बाद मंदिर के बाहर पुलिस बल तैनात है।

हिंदू धर्म में प्रवेश करने के बाद ‘रिजवी’ बोले, सनातन धर्म दुनिया का सबसे पवित्र धर्म है। इसमें बहुत सारी खूबियाँ हैं। उन्होंने बताया कि धर्म परिवर्तन के लिए उन्होंने 6 दिसंबर के पवित्र दिन को चुना है। आज के ही दिन 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में कार सेवकों ने बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिराया था। अब आगे से वह सिर्फ हिंदुत्व के लिए काम करेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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