आखिरकार जर्मनी में बैठकर खुद को भारत का ‘शुभचिंतक’ होने का दावा करने वाले ध्रुव राठी ने आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ का काउंटर वीडियो निकाल ही दिया। लोग इसी इंतजार में बैठे थे, क्या सच में? क्योंकि वीडियो पर आई लोगों की प्रतिक्रिया को देखकर तो ऐसा लगता नहीं है। काउंटर वीडियो से पहले ध्रुव राठी की हवाबाजी का भी कोई असर लोगों पर नहीं पढ़ा। लेकिन जब सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए, तो ध्रुव राठी वीडियो पर कमेंट ऑफ करके बैठ गए।
जी हाँ, तो हम आपको बताते हैं कि आखिर ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो में ऐसी क्या आग लगाई, जिससे उसे कमेंट ही ऑफ करने पढ़ गए। ये हम आपको इसलिए बता रहे हैं, ताकि वीडियो देखने के बाद आप ये न कहें कि जितना सोचा था, उतना तो वीडियो में कुछ नहीं था और आपका समय भी जाया न जाए।
ध्रुव राठी का अगला पेशा ‘फिल्ममेकिंग’?
‘धुरंधर’ फिल्म के काउंटर वीडियो में अगर ध्रुव राठी को लेकर बात होनी चाहिए, तो वह है उसकी फिल्ममेकिंग स्किल्स पर। क्या कॉपी किया है, वाह! वीडियो के शुरुआत में वह अपनी एक काल्पनिक ‘ऑपरेशन भवंडर’ नामक फिल्म के कुछ सीन दिखाते हैं, जो धुरंधर से ही प्रभावित है। पर वीडियो की शुरुआत फिल्म से करने का यहाँ असली मकसद देश का नेतृत्व करने वाले सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को ‘सुरेंदर गोभी’ बुलाकर जाहिलपन के अलावा कुछ नहीं है।
और रही बात ध्रुव राठी की अपनी फिल्म की तुलना ‘धुरंधर’ से करने की, तो यह हो ही नहीं सकता। ‘ऑपरेशन भवंडर’ बनाने पर ध्रुव राठी केवल इसीलिए मजबूर हुए क्योंकि एक बार उन्होंने ही कहा था- “अगर किसी को फिल्म से दिक्कत है, तो जा बना लो अपनी मूवी और जो दिखाना है दिखाओ।”
तो ध्रुव राठी ने दिखा दिया, जो वह लोगों को दिखाना चाहते थे। हमेशा की तरह भारत का ‘शुभचिंतक’ बनते हुए सरकार को निशाना बनाना। वैसे भी उनकी फिल्म पूरी ‘नकलची’ है, तो शायद वे इस पेशे में भी केवल नकल करके ही आगे बढ़ पाएँगे। वैसे ही जैसे वो अपना यूट्यूब चैनल सरकार को कोसकर चला पा रहे हैं।
‘धुरंधर’ प्रेरित या काल्पनिक फिल्म?
ध्रुव राठी की वीडियो में आगे बढ़ेंगे तो यहाँ प्रेरित (Inspirational) और काल्पनिक (Fictional) पर ज्ञान देने की कोशिश की जाती है। ध्रुव राठी को आपत्ति होती है कि कैसे एक बॉलीवुड फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रभावित हो सकती है और इसे ‘झूठा प्रोपेगेंडा’ करार देते हैं। क्योंकि उनके अनुसार जासूस केवल ‘टाइगर’ और ‘पठान’ फिल्मों की तरह होते हैं, जो विदेश में घूमकर केवल ‘चटपटे’ गानों पर नाचते हैं और ‘लव स्टोरी’ की आड़ में दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। वहीं धुरंधर में जासूस का किरदार एक गंभीर व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है, जिसे देश की परवाह है और अपने टारगेट से बिल्कुल नहीं भटका है। तो यह उनके मनमुताबिक सही नहीं है।
यहाँ बहस प्रेरित और काल्पनिक को लेकर है। भारत की घटनाओं से प्रभावित फिल्म पर बात करते हुए ध्रुव राठी ‘हिटलर’ तक पहुँच जाते हैं। माना कि वह NRI हैं, लेकिन देश के मुद्दों पर बात करते हुए विदेशी उदाहरण देना कहाँ तक ठीक है? वो भी एक ऐसे नाम से, जो तानाशाही के लिए जाना जाता है जबकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। फिर ध्रुव राठी कहते हैं कि वे भारत के ‘शुभचिंतक’ हैं।
फिल्म में कितना प्रोपेगेंडा है?
ध्रुव राठी के मुताबिक, फिल्म एक प्रोपेगेंडा है। लेकिन कितना है और कितना नहीं, यह भी वह खुद ही सेट करना चाहते हैं। प्रोपेगेंडा बताने के लिए वह एक सच्ची घटनाओं से ‘प्रभावित’ फिल्म को तथ्यों से साबित करने में लगे हैं। पाकिस्तान में जासूस भेजने पर सरकार का इनकार हो या फिल्म में रहमान डकैत की मौत का सच हो। वे इस कहानी को मीडिया के आर्टिकल्स को दिखाकर झूठ बताने की कोशिश कर रहे हैं। वो भी पाकिस्तानी मीडिया से। और दूसरी तरफ वे फिल्म के ‘प्रभावित’ होने के बावजूद उसमें दिखाई गई सच्ची घटनाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
वीडियो में वह बताते हैं कि ‘द बंगाल फाइल्स’ और ‘द ताज स्टोरी’ जैसी सच पर आधारित फिल्में इनके लिए बकवास हैं, जिनके नाम पर वे लिबरल और वामपंथी लोगों को अपनी यूट्यूब ऑडियन्स बनाने में सफलता हासिल कर चुके हैं। अब बारी है ‘धुरंधर’ से दर्शक बँटोरने की, जिसको वो खुद भी एक ‘आकर्षक’ फिल्म मानते हैं। चूँकि फिल्म दुनियाभर में 800 करोड़ से ऊपर की कमाई कर चुकी है।
मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश
इतना ही नहीं वीडियो में मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश की गई और हिंदुओं को निशाना बनाया गया। ध्रुव राठी ने वीडियो में दावा किया कि 1947 से अब तक हुए हमलों में हिंदू और मुस्लिम दोनों की भागीदारी है। लेकिन वह एक भी ऐसा हमला नहीं बता पाते, जिसमें हिंदू ‘आतंकवादी’ हो।
उनका कहना है कि अगर एक हिंदू ISI की मुखबिरी करे तो वो सिर्फ हिंदू है, जबकि मुस्लिम आतंकी हमले में शामिल हो तो वह पूरे मजहब की देशभक्ति पर सवाल उठाया जाता है। लेकिन ध्रुव राठी यह बताना भूल गए कि ‘आतंकी हमलों’ का मकसद ही काफिरों के खिलाफ जिहाद होता है। शायद वह भूल गए कि पहलगाम हमले में धर्म पूछकर गोली मारी गई थी।
यहाँ देशभक्ति पर सवाल क्यों न उठाया जाए? जब देश में रहते हुए एक मुस्लिम को ‘वंदे मातरम’ बोलने में आपत्ति है, जो कि एक देशभक्ति गीत है। यहाँ ध्रुव राठी का मुस्लिमों के हित में बात कर भारत के मुस्लिमों से सब्सक्राइबर्स बँटोरने का उद्देश्य दिखाता है, क्योंकि पहले से ही उनकी आधी ऑडियन्स पाकिस्तान की है।
कॉन्ग्रेस का बचाव करने का प्रयास
ध्रुव राठी की वीडियो के मुताबिक, फिल्म में दिखाया गया कि 26/11 मुंबई हमले का खुफिया इनपुट होने के बावजूद कॉन्ग्रेस सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। जबकि फिल्म में तत्कालीन सरकार को लेकर बात तक नहीं की गई। यहाँ ध्रुव राठी काउंटर करने के लिए ‘मोदी सरकार’ में हुए आतंकी हमले की पहले से खुफिया इनपुट होने का दावा करते हैं, वो भी विदेशी सोर्स से।
यहाँ लोगों को यह दर्शाया जा रहा है कि देश पर आतंकी हमला होना विफलता है, जबकि यह बताना जरूरी नहीं समझते कि क्या हमलों की वजह क्या थी और करने वाला कौन था? इन्होंने यहाँ उन्होंने केवल कॉन्ग्रेस की छवि को सुधारना चुना, बिना जनता को अहम जानकारी दिए।
वीडियो के आखिर में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करने से खुद को नहीं रोक पाते हैं। उनको परेशानी हो गई कि इनका नाम आजकल संसद में ज्यादा सुनने लगा है, वह भी नैगेटिव रोल में। लेकिन पीएम मोदी को ‘सुरेंदर गोभी’ कहना उनके मुताबिक सही है। पीएम मोदी और उनकी माताजी को गाली देने वालों पर उन्होंने चुप्पी साधी। आखिर में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेकर चेतावनी दी कि अगर भवंडर बन गई, तो आप क्या करेंगे? इससे साफ है कि ध्रुव राठी अपनी अधिकतर वीडियो की तरह बिना बीजेपी और पीएम मोदी का नाम लिए व्यूज नहीं बँटोर सकते हैं। यह उनकी कन्टेन्ट स्ट्रैटजी बन गई है।


