“बेवकूफ और #तिये में धागे भर का फर्क होवे है। धागे के इंगे बेवकूफ और धागे के उंगे #तिया। और जो धागा खींच लो तो कौन बेवकूफ और कौन #तिया – करोड़ रुपये का प्रश्न है भईया।”
T20 वर्ल्ड कप 2026 चल रहा है। सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को इस वर्ल्ड कप में सिर्फ हराया नहीं, मसल दिया – खेलते हुए भी, खेल से बाहर भी। हिंदुस्तानी जनता खुश है। कोई खुश नहीं है तो वो है भारत की कथित सेकुलर मीडिया और इनके सेकुलर पाठक। क्योंकि इन्हें बेवकूफ और #तिये में फर्क पता ही नहीं है।
भारत मैच जीत गया, इससे Economic Times को मतलब नहीं। उसे मतलब है कि सूर्य कुमार यादव ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ क्यों नहीं मिलाया। तकलीफ इतनी है कि इस विषय पर ज्ञान देते हुए यहाँ तक लिख दिया कि इतिहास इसे कठोरता के साथ देखेगा, सवाल पूछेगा।
वैसे इतिहास होता क्या है – यह सवाल Economic Times को क्रिकेट और T20 वर्ल्ड कप 2026 के बजाय अपने गिरेबान में झाँक कर देखना चाहिए। जब वो ऐसा करेंगे तो पाएँगे कि उनके Times of India ग्रुप के जो मालिक हैं, उन्होंने इतिहास में शुरू किया था ‘अमन की आशा’ वाला घटिया प्रोग्राम।
- भारत पर आतंकी हमले हों
- हर समय हमारे सैनिक बलिदान देते रहें
- आम जनता आतंकी गोलियों की शिकार बनती रहे
- पैंट खोल कर खतना देखने के बाद लोगों को इस्लामी आतंक का शिकार बनाया जाता रहे
यह सब कुछ चलता रहे लेकिन Times of India की ‘अमन की आशा’ बंद नहीं हो। पाकिस्तानी सिंगर-एक्टर-क्रिकेटरों को भारत में नौकरी मिलती रहे – यह है Economic Times के मालिक का इतिहास। इतिहास यह भी है कि Times of India ने ‘अमन की आशा’ वाली यह नौटंकी शुरू की थी पाकिस्तानी मीडिया हाउस ‘जंग समूह’ के साथ मिलकर। इसी मीडिया हाउस के Geo News ने ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत को लेकर क्या-क्या लिखा है, नीचे के स्क्रीनशॉट से पाठक समझ सकते हैं – यह और बात है कि धंधे के लिए Economic Times शायद ही समझे।

अब करते हैं क्रिकेट की बात, सूर्य कुमार यादव की बात। करेंगे ईशान किशन की भी बात। और बात होगी शिवरात्रि की भी। वो इसलिए क्योंकि Economic Times से क्रिकेट और धर्म की समझ करना बेमानी है, देश-हित और राष्ट्रीयता तो खैर धंधे में सर से लेकर पाँव तक डूबा हुआ मीडिया हाउस क्या ही समझेगा और समझाएगा।
T20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच से पहले ही सूर्य कुमार यादव ने स्पष्ट कर दिया था कि मैच बराबरी वालों के बीच नहीं है। मतलब पाकिस्तानी क्रिकेटरों और पाकिस्तानियों को उन्होंने मैच से पहले ही औकात बता दी थी। मैच में मसल कर अपने इरादे पर मुहर भी लगा दी। लेकिन Economic Times को चाहिए था हाथ मिलाते ‘अमन की आशा’ वाला थीम – जो हो न सका। इंटरनेशनल भिखारियों से शायद कोई हाथ मिला भी ले… लेकिन हत्यारों से क्यों?
हत्यारा शब्द के लिए संदर्भ है: फाहिम अशरफ। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर इस पाकिस्तानी क्रिकेटर ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डाली थी। जरा सोचिए क्रिकेट के कौन से ‘स्पिरिट ऑफ द गेम’ के तहत ऐसे खिलाड़ी वाले टीम से हाथ मिलाने की परंपरा निभाई जाए?
बात सिर्फ सूर्य कुमार यादव की नहीं है। पाकिस्तानियों को लेकर ईशान किशन क्या सोचते हैं, यह भी सुना जाए। और ईशान किशन ‘स्पिरिट ऑफ द गेम’ के तहत ऐसा सोचते हैं, यह भी नहीं है। वो ऐसा सोचने पर मजबूर हुए क्योंकि पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान कट्टर इस्लाम के नाम पर भारत के खिलाफ क्या-क्या करता रहा है, इससे वो वाकिफ हैं, आँख मूँद कर सब कुछ देखने वाले बेवकूफ नहीं हैं।
और हाँ, T20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान को रगड़-रगड़ के मसलने के बाद कप्तान सूर्य कुमार यादव ने जीत का जश्न कैसे मनाया? हर हर महादेव के उद्घोष के साथ। क्योंकि उनको याद था कि उनके देश के नागरिकों की हत्या धर्म देख कर की गई थी। इसलिए क्रिकेट तो एक माध्यम था, जीत तो धर्म को ही समर्पित थी।
‘ओमकारा’ फिल्म का जो डायलॉग सबसे शुरू में लिखा गया है, वो Economic Times के लिए ही है। धागे की पहचान कर उन्हें अपना ऑप्शन तय करना है। पूरी भारतीय क्रिकेट टीम, कप्तान सूर्य कुमार यादव या ईशान किशन – किसी को भी दोनों ऑप्शन में से किसी से भी सलाह लेने की जरूरत नहीं है।


