NDTV की एंकर फैला रही थी फेक न्यूज़, वो भी भारत विरोधी… रक्षा विशेषज्ञ ने लगाई क्लास

एनडीटीवी को देखकर लगता है जैसे इन्हें इस बात का इंतजार है कि कब इनके प्रोपेगंडा से हिंदुस्तान में दंगा भड़के। निराधार बातों को फैलाकर एनडीटीवी चाहता है कि बेवजह दहशत और डर का माहौल बनाकर शांति भंग की जाए।

ऑपइंडिया ने हाल में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें बताया गया था कि निधि राज़दान ने कैसे इंग्लैण्ड में कश्मीर पर हुए एक कार्यक्रम में भारत के पक्ष को रखने के नाम पर कई सारी ऐसी बातें कहीं जो असल में भारत के खिलाफ जातीं थीं। इस पर भड़क कर निधि ने ट्विटर पर हम पर हमलावर होते हुए दावा किया की उन्होंने तो वहाँ भारत के हितों की ‘हिमायत’ की थी। इस पर रक्षा विशेषज्ञ अभिजीत अय्यर मित्रा ने उनके इस झूठ की कलई तसल्लीबख्श तरीके से ट्विटर पर खोली

बता दें कि अभिजीत ने सुब्रमण्यम स्वामी के उस ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी जिसमें भाजपा नेता ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए लिखा था कि कश्मीर पर आयोजित कार्यक्रम में निधि राज़दान ने ऐसा कुछ कहा ही नहीं है जैसा कि दावा किया जा रहा है।

इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए मित्रा बोले कि राजदान ने वही कहा है जो हमारे द्वारा दावा किया जा रहा है। इसे साबित करने के लिए उनके पास कई सबूत हैं, जिनमें पीटीआई के हवाले से इंडिया टुडे की रिपोर्ट और पाकिस्तानी द न्यूज़ इंटरनेशनल के उन्होंने स्क्रीनशॉट दिए।

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अभिजीत ने बताया कि निधि ने कहा था कश्मीर एक अभूतपूर्व संचार संकट से जूझ रहा है, जोकि गलत है। अभिजीत के मुताबिक सबसे लम्बे समय तक चलने वाला संचार का आपातकाल 1991-92 का था जब 6 महीने के लिए ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई थी- आतंकवादियों ने धमाका कर केबल टावर ही उड़ा दिया था।

इसके अलावा कश्मीर में 2016 के बुरहान वानी (मुठभेड़ के विरोध में भड़के) दंगों में भी सरकार ने संचार व्यवस्था बंद करने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय विफलता हाथ लगी। उसके बाद सबक सीखते हुए सरकार ने इस बार आहिस्ता-आहिस्ता अपने कदम बढ़ाए (ऑपरेशन्स की भाषा में ‘ग्रेडेड एस्केलेशन’ किया)।

निधि के कश्मीर पर डेमोक्रेसी वाली टिप्पणी पर अभिजीत ने कहा कि डेमोक्रसी की रक्षा सभी नागरिकों की सुरक्षा होती है, केवल किसी पत्थरबाज या दंगाई की नहीं। बता दें कि कार्यक्रम में दिए अपने संबोधन में निधि ने कहा था ‘कश्मीर में जो कुछ हो रहा है वह दरअसल लोकतन्त्र के बुनियादी सिद्धान्तों के खिलाफ है’।

निधि ने जब कहा कि कि कश्मीर में सभी राजनेताओं को बिना कुछ किए ही हिरासत में ले लिया गया। जिसके प्रत्युत्तर में अभिजीत ने कहा कि उन्हें ‘एहतियातन हिरासत’ में लिया गया है जिससे वे सूबे में शांति भंग न कर सकें।

निधि ने एक चौंकाने वाला बयान दिया था कि वहाँ कोई हिंसा नहीं होती थी, जिस पर अभिजीत ने उन्हें याद दिलाया कि कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा विस्थापित मजदूरों की नृशंस हत्या कर दी गई थी, सौरा में दंगे हुए थे। इसी बात को लेकर निधि पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीयों के मारे जाने को निधि हत्या मानती ही कहाँ हैं।

निधि ने यह तो कहा कि एक बड़ा जनसमूह अवज्ञा आंदोलन कर रहा है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता, लेकिन दूसरा हिस्सा गोल कर गईं जिसमें जिहादी व्यापारियों और माल ढुलाई करने वालों को धमका रहे हैं, जान से मार रहे हैं। और, अभिजित के अनुसार, इस खेल में पीडीपी और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता भी शामिल हैं।

अभिजित ने यह भी कहा कि अभिवावक बच्चों को घाटी में स्कूल नहीं भेज रहे, स्कूलों को अख़बार में विज्ञापन देकर उसके ज़रिए पाठ्यक्रम पूरा कराना रहा है तो यह ‘अवज्ञा आंदोलन’ में नहीं हो रहा, बल्कि जिहादियों के डर से है।

अपनी बात रखते हुए अभिजीत ने आगे कहा निधि राज़दान कह यह कहना पूरी तरह से गलत है जिसमें वह कहती हैं कि अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले वहाँ के लोगों से पूछा नहीं गया। उन्होने कहा कि कश्मीर की जनता मतलब सुन्नी मुसलमान ही नहीं हैं। इस मुद्दे पर जनमत की बात करने वाले तब कुछ नहीं बोले जब सुन्नी मुख्यमंत्रियों ने कभी हिन्दू, दलित, बौद्ध और शिया से लेकर LGBTQ तक की कोई कद्र नहीं की।

निधि ने अपने वक्तव्य में कहा था कि जिन नेताओं ने भारत का झंडा उठाया हुआ था, उन्हें ही जेल में ठूँस दिया गया- इस पर अय्यर ने बताया कि आतंकियों के हिमायती हुर्रियत नेता गिलानी सहित कई आतंकियों ने संविधान की शपथ ली, चुनाव भी लड़े मगर इससे भारत के खिलाफ उनकी हरकतों का दाग नही धुल सकता। निधि के लॉजिक के मुताबिक तो तिरंगा थामने भर से कोई भी गुनाहगार अपने गुनाह से मुक्त हो जाता है।

निधि राज़दान ने न केवल भारत के खिलाफ लगभग अपने हर वाक्य में बोला, बल्कि जब भारत पर आरोप लगा कि उसने “5 लाख सैनिक” कश्मीर में तैनात कर रखे हैं तो निधि ने इस झूठ का भी खंडन नहीं किया। मित्रा ने ऑपइंडिया की तारीफ करते हुए लिखा कि तथाकित “राइट विंग कूड़े” ने तथ्य पेश किए, जबकि एनडीटीवी की कथित पत्रकार पाकिस्तान का झूठ फैलातीं पकड़ी गईं।

निधि के भाषण की हर एक पंक्ति में गलती होने पर कटाक्ष करते हुए अभिजित अय्यर-मित्रा ने कहा कि इतनी ज़्यादा गलतियाँ कोई जानबूझकर कर ही नहीं सकता। उन्होंने निधि राज़दान को ‘सचमुच में बेवकूफ़’ बताया और लोगों से उनकी मूर्खता के प्रति सहानुभूति और करुणा की अपील की।

पाकिस्तान के समर्थन में प्रोपेगंडा एनडीटीवी के लिए नया नहीं है। हाल ही में पाकिस्तान ने एनडीटीवी की ही एक फुटेज को अपने भारत-विरोधी एजेंडा को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। रवीश के पुलवामा के बाद भारत-पाकिस्तान को कवर न करने की नसीहत वाला वीडियो भी पाकिस्तानी मीडिया ने भारत-विरोधी एजेंडे के लिए हाथोंहाथ लिया था। एनडीटीवी को देखकर लगता है जैसे इन्हें इस बात का इंतजार है कि कब इनके प्रोपेगंडा से हिंदुस्तान में दंगा भड़के। निराधार बातों को फैलाकर एनडीटीवी चाहता है कि बेवजह दहशत और डर का माहौल बनाकर शांति भंग की जाए। इससे यह साफ़ झलकता है कि वे चाहते हैं ऐसी कोई दुर्घटना हो जिसमें लोग अपनी जान गँवा दें और फिर वे इस बात का ठीकरा केंद्र सरकार के सर फोड़ सकें।

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