उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिमों को सड़क पर नमाज नहीं पढ़ने की सलाह दी है। सोमवार (18 मई 2026) को एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने कहा कि सड़क लोगों के चलने के लिए है और इसे तमाशा नहीं बनने देंगे। इसी दौरान सीएम योगी ने मुस्लिम आबादी को लेकर भी चिंता जताई और मुस्लिमों को आबादी कम करने की नसीहत दी।
सीएम आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा, “लोग मुझसे पूछते हैं साहब आपके यहाँ यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूँ कतई नहीं होती है। आप जाकर देख लो नहीं होती है। सड़कें चलने के लिए हैं या कोई भी व्यक्ति आकर के चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा। क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का? आवागमन बाधित करने का कौन सा अधिकार है? जहाँ उसका स्थल होगा वहाँ जाकर करें।”
उन्होंने कहा, “उन लोगों ने मुझसे कहा साहब कैसे होगा? हमारी संख्या ज्यादा है। हमने कहा शिफ्ट में कर लो। तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई संख्या नियंत्रित कर लो। और नहीं है सामर्थ्य, तो क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ाई जा रही है और ये चाहिए आपको कि अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो याद करना हम उन नियम और कानून को मानना शुरू करें।”
नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) May 18, 2026
प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे… pic.twitter.com/zDoz6YiqTZ
मुस्लिम आबादी को लेकर सीएम योगी की ओर से दिया गया ये बयान भले ही आपको आक्रामक लगे। लेकिन असल में ये एक फैक्ट है जिसका मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है और कई रिसर्च भी इसको लेकर चिंता जाहिर करती रही हैं।
लगातार बढ़ती रही है मुस्लिमों की आबादी
भारत में 1951, 1971, 1991 और 2011 में जनगणनाएँ हुईं हैं। शुरू से ही जनगणनाओं में धर्म के आधार पर भी डेटा लिए जाते रहे हैं। 1951 की जनगणना में हिंदू आबादी 84 प्रतिशत थी, जबकि मुस्लिम आबादी 9.8 प्रतिशत थी। 1971 तक हिंदू आबादी घटकर 82 प्रतिशत रह गई और मुस्लिम आबादी बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई। 1991 में हिंदू आबादी एक फीसदी और घटकर 81 प्रतिशत रह गई और मुस्लिम आबादी बढ़कर 12.2 प्रतिशत हो गई। वहीं, 2011 तक हिंदू आबादी और घटकर 79 प्रतिशत रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी 14.2 प्रतिशत तक पहुँच गई।
यानी मुस्लिम आबादी में 24.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जबकि हिंदू आबादी में 4.5 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं पाकिस्तान में 1951 में हिंदू आबादी 13 प्रतिशत थी जो अब केवल 1.73 प्रतिशत रह गई है। यही हाल बांग्लादेश में भी है जो 22 फीसदी से घटकर 7 प्रतिशत पर रह गई है।
अंतरराष्ट्रीय संस्था की रिपोर्ट भी चौंकाने वाली
अंतरराष्ट्रीय संस्था प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट भी यह बताती है कि भारत में मुस्लिम आबादी आने वाले दशकों में बढ़ेगी। इसके पीछे संस्था ने मुख्य रूप से कम उम्र की आबादी और ज्यादा प्रजनन दर को कारण माना है।
प्यू रिसर्च के मुताबिक भारत 2050 तक दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश बन सकता है। जहां करीब 31 करोड़ मुसलमान होंगे। जो वैश्विक मुस्लिम आबादी का करीब 11 प्रतिशत होगा। भारत में रिपोर्ट में मुस्लिम महिलाओं की औसत प्रजनन दर हिंदू महिलाओं की तुलना में अधिक बताई गई है।
वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही मुस्लिम आबादी
प्यू रिसर्च की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इस्लाम दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला धर्म है। 2015 में दुनिया में मुस्लिम आबादी करीब 1.8 अरब थी, जो 2060 तक 3 अरब के पार पहुँच सकती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उच्च प्रजनन दर है।
अध्ययन के अनुसार मुस्लिम महिलाओं की वैश्विक प्रजनन दर 3.1 है, जो प्रमुख धार्मिक समूहों में सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि आने वाले दशकों में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर बाकी धर्मों से अधिक रहने का अनुमान है।
सीएम योगी के बयान के मायने समझिए
दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश भारत है। वहीं, राज्य स्तर पर देखें तो उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा आबादी है। संसाधन, सुविधाओं और तमाम बुनियादी जरूरतों के लिए जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है। सरकारें इसको लेकर तमाम तरह के कार्यक्रम चलाती रहती हैं।


