Thursday, November 26, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे चिदंबरम और अमित शाह का फर्क: एक 9 साल पहले डटा था, दूसरा आज...

चिदंबरम और अमित शाह का फर्क: एक 9 साल पहले डटा था, दूसरा आज भागा-भागा फिर रहा

क्या चिदंबरम के पास 2010 वाले अमित शाह जैसी हिम्मत है? उस समय शाह को दोपहर 1 बजे पूछताछ के लिए बुलाया गया और 3 घंटे बाद ही 4 बजे हजारों पेज की चार्जशीट दायर कर दी गई थी।

गिरफ्तारी के डर से भागे-भागे फिर रहे वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम और मौजूदा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच का फर्क जानना हो तो आपको वक्त को नौ साल पीछे ले जाना पड़ेगा। वह रविवार (जुलाई 25, 2010) का दिन था। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई को गुजरात के गृह मंत्री की तलाश थी। उस व्यक्ति की जो राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सरकार में सबसे ज्यादा रसूख रखने वाला शख्स माना जाता था। जिसके पास एक साथ 12 मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। ये शख्स थे अमित शाह।

सीबीआई को गुजरात पुलिस के आतंकरोधी दस्ते द्वारा नवंबर 2005 में सोहराबुद्दीन शेख को एक एनकाउंटर में मार गिराने के मामले में उनकी तलाश थी। अमित शाह उस दिन सबसे पहले गुजरात भाजपा के दफ्तर पहुँचे। उससे एक दिन पहले उन्होंने अपने ख़िलाफ़ चार्जशीट फाइल होने के बाद मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। वहाँ उन्होंने घोषणा किया कि वे भाजपा दफ्तर से सीधा सीबीआई दफ्तर जाकर आत्मसमर्पण करेंगे।

उन्होंने अपने ख़िलाफ़ सारे आरोपों को बनावटी और कॉन्ग्रेस की साज़िश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के बहाने गुजरात की भाजपा सरकार का एनकाउंटर करना चाह रही है। साथ ही उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि न्यायपालिका में यह मामला नहीं टिकेगा। आप भी उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को देखिए, जिसमें अमित शाह ने आत्मसमर्पण से पहले अपनी बात रखी थी:

जुलाई 2010 में आत्मसमर्पण से पहले अमित शाह ने जो बातें कहीं, वो आज भी सुलगते हुए सवाल हैं

इसके बाद अमित शाह सीधे सीबीआई दफ़्तर पहुँचे, जहाँ से उन्हें मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देश के गृह मंत्री रह चुके पी चिदंबरम ऐसा करने का साहस रखते हैं? क्या वो मीडिया या सरकारी एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखेंगे? या फिर वो इसीलिए भाग रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनके पास अपने बचाव में कहने को कुछ नहीं है? अमित शाह के पास था तो अपनी बात कह वे सीधे
सीबीआई के पास पहुँच गए।

अमित शाह के ख़िलाफ़ क्या खेल रचा गया था, इसकी एक जरा सी बानगी देखिए। जुलाई 22, 2010 को अमित शाह को सीबीआई का समन मिला की वो दोपहर 1 बजे एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत हों। यह समन उन्हें सिर्फ़ 2 घंटे पहले यानी 11 बजे दिया गया था। इसके बाद उनसे कहा गया कि वह 23 जुलाई को एजेंसी के सामने पेश हों। उसी दिन शाम 4 बजे चार्जशीट दाखिल कर दिया गया और उसके अगले दिन अमित शाह ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन, इन सारे प्रकरण में अमित शाह की नाराज़गी केवल इस बात को लेकर थी कि एक तो उन्हें जवाब देने का समय नहीं दिया गया और फिर उनकी बात सुने बिना चार्जशीट दाखिल कर दिया गया।

चिदंबरम के मामले में ऐसा नहीं था। उन्हें अदालत से कई बार राहत मिली। अगर उनके ख़िलाफ़ चल रहे आईएनएक्स मीडिया केस और एयरसेल-मैक्सिस केस को मिला दें तो पाएँगे कई महीनों से अदालत से उन्हें गिरफ़्तारी से राहत मिल रही थी। बचाव के लिए उन्हें भरपूर समय मिला। अमित शाह के मामले में ऐसा नहीं था। उनका सवाल था कि किसी व्यक्ति को दोपहर 1 बजे पूछताछ के लिए बुलाया जाए और फिर 3 घंटे बाद ही 4 बजे हजारों पेज की चार्जशीट पेश कर दी जाए, तो उसका क्या मतलब निकाला जाए?

अमित शाह के कहने का अर्थ यह था कि चार्जशीट पहले से तैयार कर के रखी गई थी, क्योंकि हजारों पेज की चार्जशीट 3 घंटे में तो नहीं ही तैयार की जा सकती है। चिदंबरम के पास कोई जवाब नहीं है? कोई दलील नहीं है? तभी तो वे अपनी गाड़ी और ड्राइवर को छोड़ कर भाग खड़े हुए हैं। क़ानून के शिकंजे का ऐसा खौफ कि फोन भी स्विच ऑफ कर लिया। क्या चिदंबरम के पास आज 2010 वाले अमित शाह जैसी हिम्मत है, जिससे वह आत्मसमर्पण कर सकें?

चिदंबरम राष्ट्रीय नेता है, बड़े वकील हैं और केंद्र में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं। उनकी तुलना में 2010 वाले अमित शाह कहीं नहीं ठहरते। उस समय शाह वह भले गुजरात के शक्तिशाली नेता थे, लेकिन थे तो राज्य के ही नेता न। क्या आपको पता है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस का निष्कर्ष क्या निकला? दिसंबर 2014 में सीबीआई की विशेष अदालत ने अमित शाह को इस केस से बरी कर दिया। उनके ख़िलाफ़ कोई भी आरोप सही साबित नहीं हुए।

जस्टिस एमबी गोसावी ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ पूरा का पूरा मामला गवाहों के बयानों पर आधारित है, जो अफवाहों की तरह लग रहे हैं। अर्थात, यह खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली बात हो गई। अमित शाह ने गिरफ़्तारी के बाद 3 महीने जेल की सज़ा भुगती। उन्हें गुजरात से तड़ीपार करने का निर्देश दिया गया। केस को गुजरात से बाहर मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया। 2012 तक वह गुजरात से बाहर ही रहे।

शाह अकेले नेता नहीं थे जिसे उस समय की यूपीए सरकार ने घेरने की कोशिश की थी। उस समय कई भाजपा नेताओं व हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों को इसी तरह पकड़-पकड़ कर परेशान किया गया था।

भारतीय इतिहास में शायद ही ऐसी कोई बानगी मिले जहाँ किसी मुख्यमंत्री से 9 घंटे लगातार बैठा कर पूछताछ की गई हो। मार्च 2010 में एसआईटी ने ऐसा किया था। यह सब कुछ चिदंबरम के गृह मंत्री रहते हुआ था। इस मामले में भी मोदी दोषी साबित नहीं हुए और सरकारी एजेंसियाँ कुछ भी साबित नहीं कर पाई।

आज समय बदल गया है। चिदंबरम भाग रहे हैं और अमित शाह गृह मंत्री हैं। बस अंतर इतना है कि इस बार मामला भ्रष्टाचार का है, बना-बनाया नहीं है। इसके ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस नेताओं के पास भी कोई तर्क नहीं हैं सिवाय यह कहने के कि ‘मोदी बदला ले रहा है’।

चिदंबरम देश के सबसे बड़े वकीलों में से एक हैं। उनके पास दशकों का राजनीतिक व प्रशासनिक अनुभव है। ऐसे में, आज अगर वो ‘फरार’ हैं तो सवाल उठने लाजिमी हैं। अगर उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया है तो वह भाग क्यों रहे हैं? उनके पक्ष में कपिल सिब्बल और सलमान ख़ुर्शीद जैसे वकीलों की लाइन लगी हुई है, जो कल से ही सुप्रीम कोर्ट में जमे हुए हैं और हर पैंतरा आजमा रहे हैं। अमित शाह के मामले में ऐसा नहीं था। अगर आप निर्दोष हैं तो आपके पास लोगों के सम्मुख आकर सच्चाई कहने की ताक़त होनी चाहिए। कानून का सामना करने की हिम्मत चाहिए।

जब व्यक्ति निर्दोष होता है और उसे पता होता है कि उसे फँसाया जा रहा है, तो उसके पास क़ानून का सामना करने की हिम्मत होती है। जैसे उस समय अमित शाह ने कहा था कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और उनका आत्मविश्वास ही था कि उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका में यह बना-बनाया हुआ मामला टिकेगा ही नहीं।

वैसे आपको बता दें कि राफेल-राफेल चिल्लाने वाले और कश्मीर पर मोदी सरकार को कोसने वाले चिदंबरम का भगोड़ो से पुराना नाता रहा है। मार्च 2013 में माल्या ने चिदंबरम को पत्र लिख कर माँग की थी कि उन्हें एसबीआई से एनओसी दिलाया जाए। एसबीआई उस बैंक समूह का नेतृत्व कर रहा था, जिन्होंने माल्या की एयरलाइन्स को लोन दिए थे। मार्च 2013 में विजय माल्या और पी चिदंबरम की मुलाक़ात भी हुई थी। यूपीए सरकार के अंतिम दिनों में पी चिदंबरम ने सोना के आयात को लेकर बनी पॉलिसी में अहम बदलाव किए, जिससे नीरव मोदी सहित 13 व्यापारियों को काफ़ी फायदा पहुँचा।

देश की जनता आज चिदंबरम से एक ही बात पूछना चाह रही है। उन्होंने कभी आईएनएक्स मीडिया को एफडीआई के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से क्लियरेंस दिलाने के लिए पीटर और इन्द्राणी मुखर्जी से अपने बेटे के व्यापार में मदद करने को क्यों कहा? रिश्वत क्यों माँगी?

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या है अर्णब-अन्वय नाइक मामला? जानिए सब-कुछ: अजीत भारती का वीडियो | Arnab Goswami Anvay Naik case explained in detail

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस का चेहरा 4 नवंबर को पूरे देश ने देखा। 20 सशस्त्र पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, घसीटकर उन्हें अलीबाग थाने ले गए।

Cyclone Nivar के अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धरने की आशंका: ट्रेनें, फ्लाइट रद्द, NDRF की टीम तैनात

“तमिलनाडु से लगभग 30,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है और पुडुचेरी से 7,000 लोगों को निकाला गया है। केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। क्षति को कम करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।”

आखिर CM रावत ने India Today से ये क्यों कहा- भ्रामक खबर फैलाने से बचें?

India Today ने अपने समाचार चैनल पर दावा किया कि उत्तराखंड सरकार ने देहरादून में रविवार, 29 नवम्बर से लॉकडाउन घोषित किया है।

#justiceforkirannegi: CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उठाया गैंगरेप पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाने का बीड़ा, कहा- अब चुप नहीं बैठेंगे

आज सोशल मीडिया के कारण किरण नेगी का यह मामला मुख्यधारा में आया है। उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पर स्वयं संज्ञान ले लिया है।

‘पहले सिर्फ ऐलान होते थे, 2014 के बाद हमने सोच बदली’: जानिए लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्‍थापना दिवस पर क्या बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के साथ ही अन्य मंत्री भी आनलाइन जुड़े रहे।

सरकार ने लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस बैंक में विलय को दी मंजूरी: निकासी की सीमा भी हटाई, 6000 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (DBS Bank India Limited)के साथ विलय के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

प्रचलित ख़बरें

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ...

साल्वे ने अर्णब गोस्वामी का केस लड़ने के लिए रिपब्लिक न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उन्होंने कुलभूषण जाधव का केस भी मात्र 1 रुपए में लड़ा था।

बहन से छेड़खानी करता था ड्राइवर मुश्ताक, भाई गोलू और गुड्डू ने कुल्हाड़ी से काट डाला: खुद को किया पुलिस के हवाले

गोलू और गुड्डू शाम के वक्त मुश्ताक के घर पहुँच गए। दोनों ने मुश्ताक को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला और जम कर पीटा, फिर उन्होंने...

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। वहाँ के छठ घाट को तहस-नहस कर दिया गया।
- विज्ञापन -

‘मैं मध्य प्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ नहीं होने दूँगा, ये देश को तोड़ने का षड्यंत्र है’: CM शिवराज सिंह चौहान

“मेरे सामने ऐसे उदाहरण भी हैं कि शादी कर लो, पंचायत चुनााव लड़वा दो और फिर पंचायत के संसाधनों पर कब्जा कर लो। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।"
00:20:48

क्या है अर्णब-अन्वय नाइक मामला? जानिए सब-कुछ: अजीत भारती का वीडियो | Arnab Goswami Anvay Naik case explained in detail

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस का चेहरा 4 नवंबर को पूरे देश ने देखा। 20 सशस्त्र पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, घसीटकर उन्हें अलीबाग थाने ले गए।
00:16:15

यूपी में लव जिहाद पर अध्यादेश पारित: अजीत भारती का वीडियो | UP passes ordinance on Love Jihad and conversions

नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन पर 1 से 10 साल तक की सजा होगी।

Cyclone Nivar के अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धरने की आशंका: ट्रेनें, फ्लाइट रद्द, NDRF की टीम तैनात

“तमिलनाडु से लगभग 30,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है और पुडुचेरी से 7,000 लोगों को निकाला गया है। केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। क्षति को कम करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।”

आखिर CM रावत ने India Today से ये क्यों कहा- भ्रामक खबर फैलाने से बचें?

India Today ने अपने समाचार चैनल पर दावा किया कि उत्तराखंड सरकार ने देहरादून में रविवार, 29 नवम्बर से लॉकडाउन घोषित किया है।

#justiceforkirannegi: CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उठाया गैंगरेप पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाने का बीड़ा, कहा- अब चुप नहीं बैठेंगे

आज सोशल मीडिया के कारण किरण नेगी का यह मामला मुख्यधारा में आया है। उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पर स्वयं संज्ञान ले लिया है।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

‘पहले सिर्फ ऐलान होते थे, 2014 के बाद हमने सोच बदली’: जानिए लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्‍थापना दिवस पर क्या बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के साथ ही अन्य मंत्री भी आनलाइन जुड़े रहे।

सरकार ने लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस बैंक में विलय को दी मंजूरी: निकासी की सीमा भी हटाई, 6000 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (DBS Bank India Limited)के साथ विलय के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

TRP मामले में रिपब्लिक की COO प्रिया मुखर्जी को 20 दिन की ट्रांजिट बेल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की दलील को नकारा

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार (नवंबर 25, 2020) को रिपब्लिक टीवी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) प्रिया मुखर्जी को 20 दिन का ट्रांजिट बेल दिया है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,390FollowersFollow
357,000SubscribersSubscribe