Thursday, November 26, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे कॉमरेड चंदू से लेकर कन्हैया कुमार तक: जेएनयू के कपटी कम्युनिस्टों की कहानी, भाग-1

कॉमरेड चंदू से लेकर कन्हैया कुमार तक: जेएनयू के कपटी कम्युनिस्टों की कहानी, भाग-1

वामपंथियों की धोखेबाज़ी, द्रोह और मक्कारी कोई नई बात नहीं है। खुद चंदू को जब इन्होंने बेच दिया, उनकी माँ को धोखा दिया, तो मेरे जैसों के लिए नजीब हों या रोहित, इनके नाटक और नौटंकी से कोई अपरिचित नहीं। दुनिया में शायद किसी का भी यकीन कर लिया जाए, लेकिन किसी कम्युनिस्ट पर कभी नहीं।

फिलहाल जो कॉन्ग्रेस सहित तमाम तथाकथित सेकुलर जमात की आँखों का तारा बना हुआ है, वह कन्हैया उस वक्त 8-10 वर्षों का होगा, जब मैं जेएनयू पहुँचा था। सन 1997 का वह मॉनसून आँसुओं से भरा हुआ था। कॉमरेड चंद्रशेखर की हत्या को भले ही चार माह बीत चुके थे, पर जेएनयू की फिजाओं में उनकी ही चर्चा और आंदोलन की बातें तारी थीं। मैं आखिरी दिन एडमिशन लेनेवाला छात्र था, क्योंकि बिहार में लालू प्रसाद के जंगलराज में मेरे प्रोफेसर पिता को तनख्वाह मिलनी बंद हो चुकी थी। हम बाढ़ को चीरते हुए जेएनयू पहुंचे थे।

जेएनयू में पहला ही दिन सांस्कृतिक आलोड़न और चौंकानेवाला था, जब रैगिंग की जगह सीनियर्स ने पूरा सहयोग दिया, पहली क्लास में टीचर ने सिगरेट पेश की, तो सोचिए दरभंगा से सीधा दिल्ली के मिंटो रोड से होते हुए जेएनयू पहुंचने वाले मुझ बंदे की क्या हालत हुई होगी? बहरहाल, विषय यहाँ वह नहीं है। अगस्त में भी चंद्रशेखर की हत्या और आंदोलन पर कैंपस उबल रहा था। और, मजे़ की बात देखिए। उस वक्त तथाकथित सेकुलरों और प्रगतिशीलों की सरकार थी।

चंद्रशेखर की शहादत के बाद जब जेएनयू के विद्यार्थी आइटीओ से लेकर बिहार भवन और रेसकोर्स रोड तक जाम कर रहे थे, तो सबसे अधिक पिटाई विद्यार्थी परिषद वालों की हुई थी। पूरे आंदोलन को अचानक SFI ने विथड्रॉ किया था क्योंकि केंद्र में संयुक्त मोर्चा की लंगड़ी सरकार थी, जिसमें वामपंथी भी शामिल थे। एक फोन हुआ येचुरी का और जेएनयू में एसएफआइ ने आंदोलन से खुद को अलग कर लिया था।

बिहार भवन पर लालू के साले साधु यादव का सामना करना हो, या आइटीओ पर सड़क जाम करना, विद्यार्थी परिषद के लोग पूरी ताकत से जमे रहे, सबसे अधिक घायल भी हुए। वामपंथियों की धोखेबाज़ी, द्रोह और मक्कारी कोई नई बात नहीं है। मैं इनको वैसे ही ‘व्यभिचारी-वामपंथी’ नहीं कहता। खुद चंदू को जब इन्होंने बेच दिया, उनकी माँ को धोखा दिया, तो मेरे जैसों के लिए नजीब हों या रोहित, इनके नाटक और नौटंकी से कोई अपरिचित नहीं। दुनिया में शायद किसी का भी यकीन कर लिया जाए, लेकिन किसी कम्युनिस्ट पर कभी नहीं।

कन्हैया कुमार भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए झूठे ही हैं। उन्होंने तो खैर, अपने पिता की ही कद्र नहीं की, तो लालू प्रसाद के पैरों में झुकने पर कोई आश्चर्य भी नहीं होना चाहिए। फिलहाल देश के तमाम छद्म प्रगतिशीलों, सेकुलरों, बुद्धिजीवियों आदि-इत्यादि के अनुसार कन्हैया कुमार के दो सबसे बड़े कारनामे हैं:
1. उसने देशद्रोह का काम नहीं किया है, नारे नहीं लगाए हैं। 
2. उसने सीधे देश की सत्ता को (इसे मोदी पढ़ें) चुनौती दी है। 

ये दोनों ही बातें सिरे से गलत और अहमकाना है, जिसे मैं साबित करूँगा, लेकिन पहले कुछ और बातें जाने लीजिए। मैं जेएनयू की खदान का ही उत्पाद हूँ, इसलिए मुझे न बताया जाए कि वहाँ के कम्युनिस्ट किस हद तक देशद्रोही, उत्पाती और ख़तरनाक हैं? कन्हैया तो कुछ भी नहीं, लेकिन इसके बौद्धिक पितृ-पुरुषों और माताओं से मैं उलझा हूँ, उनकी सोच किस हद तक भारत और हिंदू-विरोधी है, यह मुझे बेहतर पता है।

यह वही कैंपस है, जहां महिषासुर की जयंती मनाई जाने की कोशिश होती है, जहाँ का छात्रसंघ किसी जमाने में बाकायदा प्रस्ताव (रेजोल्यूशन) पारित करता था कि पूरा ‘उत्तर-पूर्व’ भारत के जुल्मो-सितम का शिकार है और उसे अलग होना चाहिए। यह वही जेएनयू है, जहां सीपीआई (माओवादी) की छात्र-शाखा कार्यरत है, यह वही जेएनयू है, जहाँ अफजल गुरु से लेकर गिलानी तक के लिए आँसूपछाड़ कार्यक्रम होते हैं, जहां सीआरपीएफ के जवानों के बलिदान पर हँसी-ठट्ठा होता है, जहां भारत-पाक मुशायरे में भारतीय सेना के उन जवानों के साथ मारपीट होती है, जो तुरंत कारगिल से लौटे होते हैं। ये है वहाँ के कम्युनिस्टों की करतूतें। यह सूची अंतहीन है।

अब, कन्हैया कुमार के बारे में प्रगतिशीलों के भ्रामक प्रचार नंबर एक पर कुछ तथ्य जानिए। उस दिन करीबन 20 कश्मीरी जिहादियों के साथ ही एएमयू और जामिया के लड़कों को भी जमा किया गया था। उन लोगों ने ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारे भी लगाए। जब परिषद के लोगों ने विरोध किया, तो झूमाझटकी हुई, कन्हैया कुमार वहाँ पहुँचा और छात्रसंघ अध्यक्ष होने के बावजूद उसने इसे रोकना तो दूर, उनके साथ मिलकर नारे भी लगाए। यह एक तथ्य है और यह किसी शबाना, अख्तर या भास्कर के चिल्लाने से बदल नहीं जाएगा।

भ्रामक प्रचार नंबर दो पर ज़रा बात कीजिए। उस वक्त को याद कीजिए। कन्हैया कुमार को जिस तरह प्रोजेक्ट किया गया, उसे याद करने की कोशिश कीजिए। कांड के तुरंत बाद डी राजा, केजरीवाल से लेकर राहुल गांधी तक के जेएनयू-भ्रमण और भड़काऊ नारे को याद कीजिए। उस वक्त कांग्रेस के एक बड़े नेता ने लगातार कन्हैया को ग्रूम किया, इतना ही नहीं एक नेताजी ने तो उसके अकाउंट में पैसे भी भेजे। लक्ष्य एक ही था, मोदी के खिलाफ जो भी, जहाँ से भी मिले, उसे ले लो। कांग्रेस और कम्युनिस्ट तो वैसे भी एक सिक्के के दो पहलू हैं ही।

— व्यालोक पाठक
लेख का दूसरा हिस्सा यहाँ पढ़ें।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या है अर्णब-अन्वय नाइक मामला? जानिए सब-कुछ: अजीत भारती का वीडियो | Arnab Goswami Anvay Naik case explained in detail

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस का चेहरा 4 नवंबर को पूरे देश ने देखा। 20 सशस्त्र पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, घसीटकर उन्हें अलीबाग थाने ले गए।

Cyclone Nivar के अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धरने की आशंका: ट्रेनें, फ्लाइट रद्द, NDRF की टीम तैनात

“तमिलनाडु से लगभग 30,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है और पुडुचेरी से 7,000 लोगों को निकाला गया है। केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। क्षति को कम करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।”

आखिर CM रावत ने India Today से ये क्यों कहा- भ्रामक खबर फैलाने से बचें?

India Today ने अपने समाचार चैनल पर दावा किया कि उत्तराखंड सरकार ने देहरादून में रविवार, 29 नवम्बर से लॉकडाउन घोषित किया है।

#justiceforkirannegi: CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उठाया गैंगरेप पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाने का बीड़ा, कहा- अब चुप नहीं बैठेंगे

आज सोशल मीडिया के कारण किरण नेगी का यह मामला मुख्यधारा में आया है। उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पर स्वयं संज्ञान ले लिया है।

‘पहले सिर्फ ऐलान होते थे, 2014 के बाद हमने सोच बदली’: जानिए लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्‍थापना दिवस पर क्या बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के साथ ही अन्य मंत्री भी आनलाइन जुड़े रहे।

सरकार ने लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस बैंक में विलय को दी मंजूरी: निकासी की सीमा भी हटाई, 6000 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (DBS Bank India Limited)के साथ विलय के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

प्रचलित ख़बरें

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

ओवैसी को सूअर वाली स्वादिष्ट बिरयानी खिलाने का ऑफर, AIMIM नेता के बीफ बिरयानी पर BJP का पलटवार

"मैं आपको आज बिरयानी का निमंत्रण दे रहा हूँ। वाल्मिकी समुदाय के लोग पोर्क के साथ बिरयानी अच्छी बनाते हैं। आइए हम आपको स्वादिष्ट बिरयानी..."

‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ...

साल्वे ने अर्णब गोस्वामी का केस लड़ने के लिए रिपब्लिक न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उन्होंने कुलभूषण जाधव का केस भी मात्र 1 रुपए में लड़ा था।

अहमद पटेल की मौत का कॉन्ग्रेस को कितना दुख? सुबह किया पहले राहुल को कोट, फिर जताया अपने नेता की मृत्यु पर शोक

कॉन्ग्रेस के लिए पहला काम था-राहुल गाँधी का संदेश शेयर करना ताकि किसी मायने में उसकी गंभीरता सोशल मीडिया यूजर्स के सामने न दब जाए और लोग अहमद पटेल के गम में राहुल गाँधी के कोट को पढ़ना न भूल जाएँ।

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। वहाँ के छठ घाट को तहस-नहस कर दिया गया।
- विज्ञापन -

‘मैं मध्य प्रदेश की धरती पर ‘लव जिहाद’ नहीं होने दूँगा, ये देश को तोड़ने का षड्यंत्र है’: CM शिवराज सिंह चौहान

“मेरे सामने ऐसे उदाहरण भी हैं कि शादी कर लो, पंचायत चुनााव लड़वा दो और फिर पंचायत के संसाधनों पर कब्जा कर लो। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।"
00:20:48

क्या है अर्णब-अन्वय नाइक मामला? जानिए सब-कुछ: अजीत भारती का वीडियो | Arnab Goswami Anvay Naik case explained in detail

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस का चेहरा 4 नवंबर को पूरे देश ने देखा। 20 सशस्त्र पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, घसीटकर उन्हें अलीबाग थाने ले गए।
00:16:15

यूपी में लव जिहाद पर अध्यादेश पारित: अजीत भारती का वीडियो | UP passes ordinance on Love Jihad and conversions

नाम छिपाकर शादी करने वाले के लिए 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैरकानूनी तरीके से धर्म परिवर्तन पर 1 से 10 साल तक की सजा होगी।

Cyclone Nivar के अगले 12 घंटे में अति विकराल रूप धरने की आशंका: ट्रेनें, फ्लाइट रद्द, NDRF की टीम तैनात

“तमिलनाडु से लगभग 30,000 से अधिक लोगों को निकाला गया है और पुडुचेरी से 7,000 लोगों को निकाला गया है। केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। क्षति को कम करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं।”

आखिर CM रावत ने India Today से ये क्यों कहा- भ्रामक खबर फैलाने से बचें?

India Today ने अपने समाचार चैनल पर दावा किया कि उत्तराखंड सरकार ने देहरादून में रविवार, 29 नवम्बर से लॉकडाउन घोषित किया है।

#justiceforkirannegi: CM त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उठाया गैंगरेप पीड़िता के परिवार को इंसाफ दिलाने का बीड़ा, कहा- अब चुप नहीं बैठेंगे

आज सोशल मीडिया के कारण किरण नेगी का यह मामला मुख्यधारा में आया है। उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस पर स्वयं संज्ञान ले लिया है।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

‘पहले सिर्फ ऐलान होते थे, 2014 के बाद हमने सोच बदली’: जानिए लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्‍थापना दिवस पर क्या बोले PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के साथ ही अन्य मंत्री भी आनलाइन जुड़े रहे।

सरकार ने लक्ष्मी विलास बैंक के डीबीएस बैंक में विलय को दी मंजूरी: निकासी की सीमा भी हटाई, 6000 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लक्ष्‍मी विलास बैंक (Lakshmi Vilas Bank) के डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (DBS Bank India Limited)के साथ विलय के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है।

TRP मामले में रिपब्लिक की COO प्रिया मुखर्जी को 20 दिन की ट्रांजिट बेल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की दलील को नकारा

कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार (नवंबर 25, 2020) को रिपब्लिक टीवी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) प्रिया मुखर्जी को 20 दिन का ट्रांजिट बेल दिया है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,385FollowersFollow
357,000SubscribersSubscribe