Wednesday, May 27, 2020
होम विचार राजनैतिक मुद्दे मूर्खों और मूढ़मतियों का ओजस्वी वक्ता है कन्हैया: JNU के कपटी कम्युनिस्टों की कहानी,...

मूर्खों और मूढ़मतियों का ओजस्वी वक्ता है कन्हैया: JNU के कपटी कम्युनिस्टों की कहानी, भाग-2

कन्हैया की देह-भाषा देखिए, उसका उच्चारण देखिए, उसका पूरा व्यवहार देखिए। क्या आपको शर्म नहीं आती कि वह आदमी आज की पीढ़ी के लिए शानदार वक्ता है, सत्ता से प्रश्न पूछने वाला क्रांतिकारी है, राजसत्ता को चुनौती देनेवाला है। क्या यही शिक्षा-पद्धति हमने बनाई है, क्या यही आदर्श हमने तैयार किए हैं?

ये भी पढ़ें

कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्टों का साथ चोली-दामन का रहा है। कब एक, दूसरे में परिवर्तित हो जाए, कहा नहीं जा सकता है। आखिर, ‘दुर्घटनावश हिंदू’ और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जब अंग्रेजों से ‘ट्रान्सफर ऑफ पावर’ किया था, तो सब कुछ जस का तस ही रखा। केवल चेहरे बदले, बाक़ी नेहरू के पास न तो भारत का विज़न था, न ही भारत को किसी भी तरीके से वह बदलना चाहते थे, तो अंग्रेजों और मुगलों का भारत ही उनकी नज़र में सब कुछ था, जिसके सबसे तीसरे दर्जे के नागरिक हिंदू थे।

नेहरू जीवन भर ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ ही करते रहे, इस क्रम में वह भारत को कभी समझे ही नहीं। हर एक हिंदू प्रथा, वस्तु, स्मारक या व्यक्ति उनके लिए न्यूनतम मज़ाक और अधिकतम घृणा का पात्र था। इसीलिए, सोमनाथ के जीर्णोद्धार के जुर्म में उन्होंने राजेंद्र बाबू को दमे से मरने दिया, अपने अंग्रेज दोस्तों को सपेरों और नजूमियों से तो मिलवाया, पर भारत की महान सभ्यता और संस्कृति पर लौह-कपाट जड़ दिए।

जब उन्होंने राष्ट्रवादी तरीके से इतिहास-लेखन तक को बाधित किया, तो भला कम्युनिस्टों से बेहतर अधिकारी कौन होता, जो शिक्षा को विकृत करे। तथाकथित लौह-महिला इंदिरा ने उस विष-बेल को बाकायदा सींचकर इतना जड़ीभूत कर दिया कि आज हम जो रोमिला, चंद्रा, हबीब आदि की विषैली शिक्षाएँ देख रहे हैं, वही मुख्यधारा बन चुकी है, यहाँ तक कि आर्य-आक्रमण का सिद्धांत, सभी तरह से खारिज होने के बाद भी पढ़ाया जा रहा है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

खैर, विषयांतर हो गया। हमारे समय कैंपस में एसएफआइ (SFI), एआइएसएफ (AISF) और आइसा (AISA) का जोर था। उसके एक नेता थे बत्तीलाल बैरवा, जो कि फिलहाल कॉन्ग्रेस में हैं। एक हुआ करते थे, नासिर हुसैन। साक्षात ज़हर की पुड़िया। वह कॉन्ग्रेस से राज्यसभा में पाए जा रहे हैं। हमारे जूनियर संदीप सिंह तो खैर आजकल राहुल बाबा के ही दाहिने हाथ हैं, उनकी किचन-कैबिनेट के सदस्य हैं।

अब, एक बार फिर से थोड़ा पीछे जाइए। याद कीजिए, जब कन्हैया कुमार का कांड हुआ, तो देश की तमाम यूनिवर्सिटीज में या तो पहले या बाद से तथाकथित आंदोलन चल रहे थे। चाहे वह गजेंद्र चौहान के बहाने IIFT का हो, या फिर नकली दलित रोहित वेमुला की आत्महत्या (जो दरअसल, उसके कॉमरेड की वजह से ही की गई) के बहाने हैदराबाद यूनिवर्सिटी का बवाल हो, या टीआइएसएस का मसला हो या जाधवपुर का। योजना यह थी कि एक नहीं बीस-पच्चीस कन्हैया तैयार किए जाएँ। एक जिग्नेश पहले ही तैयार किया जा चुका था। उसी क्रम में जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष मोहित पांडे, शहला रशीद और कन्हैया को तैयार किया जा रहा था। एक तरह से 1977 टाइप फर्जी माहौल तैयार करने की योजना थी, जहाँ विद्यार्थियों को आगे कर राहुल बाबा की ताजपोशी करानी थी।

अफसोस। सोशल मीडिया के इस दौर में यह योजना परवान न चढ़ सकी और बिहार में पहले लालू प्रसाद ने और फिर तेजस्वी ने कन्हैया को घास न डाली।

कन्हैया कुमार के बारे में एक सबसे बड़ा दुष्प्रचार क्या है? यही न कि वह बहुत अच्छा बोलता है। मुझे अपने देश के लोगों पर तरस आता है। क्या हमारी मेधा इतनी सिकुड़ गई है, इतनी कम हो गयी है कि यह आदमी भी वक्ता हो गया?

कम्युनिस्टों में भी एकाध लोग ठीक-ठाक पढ़े-लिखे होते थे। जेएनयू के उस जमाने में एक तरफ बत्तीलाल बैरवा थे, तो दूसरी तरफ कविता कृष्णन भी थीं, वीजू कृष्णन भी थे। बत्तीलाल हमें हँसाने के काम आते थे, पर व्यक्तिगत स्तर पर मैं कविता या वीजू को उनकी विचारधारा के लिए कितना भी कोसूँ, वे कम से कम तथ्यों या सबूतों के साथ बात करते थे, उनकी भाषा बताती थी कि वक्तृता किसे कहते हैं। (इसका कविता जी के मौजूदा ट्वीट्स से अंदाज़ा न लगाएँ)।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

कन्हैया को यह लेखक देखता भी नहीं है, सुनता भी नहीं है, क्योंकि उसका जो तथाकथित क्रांतिकारी भाषण एड-ब्लॉक पर हुआ था, वह दो सेकंड सुनकर मैं समझ गया था कि यह निहायत ही बदतमीज, तथ्यविहीन, दो कौड़ी की गटरछाप भाषा बोलने वाला आदमी है। मुझे इसके साथ मंच शेयर करने को कहा जाए, तो मैं नहीं करूँगा, क्योंकि मुझे शर्म आती है कि यह गंदा वक्ता मेरा जूनियर है, जो सिवाय मुँह चियारने के, गलतबयानी के और कुछ नहीं करता। (हर एक कम्युनिस्ट बिल्कुल यही करता है)

कन्हैया की देह-भाषा देखिए, उसका उच्चारण देखिए, उसका पूरा व्यवहार देखिए। क्या आपको शर्म नहीं आती कि वह आदमी आज की पीढ़ी के लिए शानदार वक्ता है, सत्ता से प्रश्न पूछने वाला क्रांतिकारी है, राजसत्ता को चुनौती देनेवाला है। क्या यही शिक्षा-पद्धति हमने बनाई है, क्या यही आदर्श हमने तैयार किए हैं?

(पहला भाग यहाँ पढें। अगले भाग में अब कन्हैया से यह कहानी कम्युनिस्टों के कुकर्म की गौरवगाथा की ओर आगे बढ़ेगी)

— व्यालोक पाठक

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ख़ास ख़बरें

‘उत्तराखंड जल रहा है… जंगलों में फैल गई है आग’ – वायरल तस्वीरों की सच्चाई का Fact Check

क्या उत्तराखंड के जंगल इस साल की गर्मियों में वास्तव में आग में झुलस रहे हैं? जवाब है- नहीं।

ईद का जश्न मनाने के लिए दी विशेष छूट: उद्धव के तुष्टिकरण की शिवसेना के मुखपत्र सामना ने ही खोली पोल

शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक मुंब्रा में समुदाय विशेष के लोगों को ईद मनाने के लिए विशेष रियायत दी गई थी।

वियतनाम: ASI को खुदाई में मिला 1100 साल पुराना शिवलिंग, बलुआ पत्थर से है निर्मित

ASI को एक संरक्षण परियोजना की खुदाई के दौरान 9वीं शताब्दी का शिवलिंग मिला है। इसकी जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर दी है।

‘रिपब्लिक टीवी को रिपोर्टिंग करने से रोकना चाहते हैं महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख’

अनिल देशमुख के रुख को लेकर रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने बयान जारी किया है। महाराष्ट्र सरकार के बर्ताव पर हैरानी जताई है।

‘मोदी मंदिर’ बनाने की खबर फर्जी: MLA गणेश जोशी ने कॉन्ग्रेस को बताया ‘मोदीफोबिया’ से ग्रसित

"मोदी मंदिर' बनाने की खबर पूरी तरह फर्जी है। जबकि मोदी-आरती लिखने वाली डॉ. रेनू पंत का भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है और वो सिर्फ..."

प्रजासुखे सुखं राज्ञः… तबलीगी और मजदूरों की समस्या के बीच आपदा में राजा का धर्म क्या

सभी ग्रंथों की उक्तियों का एक ही निचोड़ है कि राजा को जनता का उसी तरह ध्यान रखना चाहिए जिस तरह एक पिता अपने पुत्र की देखभाल करता है।

प्रचलित ख़बरें

‘चीन, पाक, इस्लामिक जिहादी ताकतें हो या नक्सली कम्युनिस्ट गैंग, सबको एहसास है भारत को अभी न रोक पाए, तो नहीं रोक पाएँगे’

मोदी 2.0 का प्रथम वर्ष पूरा हुआ। क्या शानदार एक साल, शायद स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे ज्यादा अदभुत और ऐतिहासिक साल। इस शानदार एक वर्ष की बधाई, अगले चार साल अद्भुत होंगे। आइए इस यात्रा में उत्साह और संकल्प के साथ बढ़ते रहें।

लगातार 3 फेक न्यूज शेयर कर रवीश कुमार ने लगाई हैट्रिक: रेलवे पहले ही बता चुका है फर्जी

रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर ‘दैनिक भास्कर’ अखबार की एक ऐसी ही भावुक किन्तु फ़ेक तस्वीर शेयर की है जिसे कि भारतीय रेलवे एकदम बेबुनियाद बताते हुए पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ये पूरी की पूरी रिपोर्ट अर्धसत्य और गलत सूचनाओं से भरी हुई है।

मोदी-योगी को बताया ‘नपुंसक’, स्मृति ईरानी को कहा ‘दोगली’: अलका लाम्बा की गिरफ्तारी की उठी माँग

अलका लाम्बा PM मोदी और CM योगी के मुँह पर थूकने की बात करते हुए उन्हें नपुंसक बता रहीं। उन्होंने स्मृति ईरानी को 'दोगली' तक कहा और...

‘राम मंदिर की जगह बौद्ध विहार, सुप्रीम कोर्ट ने माना’ – शुभ कार्य में विघ्न डालने को वामपंथन ने शेयर की पुरानी खबर

पहले ये कहते थे कि अयोध्या में मस्जिद था। अब कह रहे हैं कि बौद्ध विहार था। सुभाषिनी अली पुरानी ख़बर शेयर कर के राम मंदिर के खिलाफ...

38 लाख फॉलोवर वाले आमिर सिद्दीकी का TikTok अकॉउंट सस्पेंड, दे रहा था कास्टिंग डायरेक्टर को धमकी

जब आमिर सिद्दीकी का अकॉउंट सस्पेंड हुआ, उस समय तक उसके 3.8 मिलियन फॉलोवर्स थे। आमिर पर ये कार्रवाई कास्टिंग डायरेक्टर को धमकी...

हमसे जुड़ें

207,939FansLike
60,325FollowersFollow
242,000SubscribersSubscribe
Advertisements