Thursday, November 26, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे मुस्लिम महिला सबसे गोरी, ब्राह्मण सबसे काले: Cadbury वालो, धंधा करो ज्ञान मत बाँटो

मुस्लिम महिला सबसे गोरी, ब्राह्मण सबसे काले: Cadbury वालो, धंधा करो ज्ञान मत बाँटो

कॉर्पोरेट वालों को सोशल मीडिया पर Social Justice Warrior बनना या ज्ञान-बाजी करना कितना महंगा पड़ता है, किसी को यह Gillette वालों से पूछना चाहिए। इसी तरह Zomato की हलाल-"खाने का मज़हब नहीं होता" विवाद से छवि खराब हो गई है।

Cadbury का मूल काम-धंधा क्या है? चॉकलेट बनाना-बेचना। Zomato का? खाना रेस्तराँ से उठा कर घर पहुँचाना। Gillette का काम है दाढ़ी बनाने वाले ब्लेड और रेज़र बनाना-बेचना। लेकिन पिछले कुछ महीनों में ये ब्रांड किसी बिज़नेस कारण से नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय (social justice) के पहरुए बनने या सोशल मीडिया पर दूसरों को ज्ञान बाँचने को लेकर खबरों में रहे हैं। और यह काम भी वे ढंग से करने की बजाय मूर्खता करते ही अधिक नज़र आ रहे हैं।

ताज़ातरीन मामला Cadbury का है, जिसने अपने ‘नस्लभेद-विरोधी’ unity bar को भारतीय बाजार में 15 अगस्त के मौके पर उतारा था। इसके लिए उसने ज्ञान बाँचा कि आइए उस देश का सम्मान करें जहाँ विभिन्नता में एकता है। और इसका प्रतीक बताया अपना यूनिटी बार- जिसमें ‘गोरी वाली’ (मिल्क चॉकलेट) और ‘काली वाली’ (डार्क चॉकलेट) चॉकलेट से लेकर दो और रंगों की चॉकलेट यानी “हर रंग (‘नस्ल’ पढ़ें) की चॉकलेट में एकता” है।

इस विज्ञापन में Cadbury दो बातें करता दिख रहा है: न केवल यह कि भारत में नस्लभेदी/रंगभेदी माहौल है (वरना इस तरह के संदेश की कोई ज़रूरत क्यों थी?), बल्कि वह इतना गंभीर भी है कि इससे निबटने के लिए विदेशी कंपनियों को यहाँ के लोगों को “नस्लभेदी मत बनो” सिखाने उतरना पड़ रहा है।

पहली बात तो यह ज्ञान-बाजी ही बोगस है, क्योंकि भारत में कभी भी नस्लभेद का इतिहास रहा ही नहीं है। लाख साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषाई टकराव भले हों भारत में, लेकिन रंग और नस्ल के आधार पर सामाजिक भेदभाव एक ऐसी बुराई है जो बड़े-छोटे किसी भी स्तर पर भारत में पैर नहीं जमा पाई है।

जब भी इसकी कोशिश हुई, सरकारों ने इसे कुचल दिया है। याद करें कुछ साल पहले जैसे ही खबर आई कि उत्तर-पूर्व के लोगों को दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में कुछ चिरकुट उनकी नस्ल को लेकर निशाना बना रहे हैं, तो तत्कालीन केंद्र सरकार ने कानून बनाकर उनके लिए नस्लभेदी और अपमानजनक शब्द “चिंकी” को ही पाँच साल सजा वाला अपराध बना दिया था। इसके पहले पेरियार ने उत्तर-दक्षिण भारत को विभाजित करने के लिए अंग्रेज़ों के झूठे ‘आर्य आक्रमण सिद्धांत’ को नस्ल का रूप देकर हिंदी-संस्कृत-भाषियों को तमिल-मलयालम-भाषियों से अलग नस्ल साबित कर देश के एक और विभाजन की नींव रखने की कोशिश की थी, लेकिन लोगों ने ही उनको ज्यादा भाव नहीं दिया। (गोरे रंग को लेकर भारतीयों में थोड़ा-बहुत आकर्षण ज़रूर है, लेकिन यह औपनिवेशिक हैंगओवर है जो बिना Cadbury की ज्ञान-बाजी के तेज़ी से जा रहा है। इसके अलावा हमारे पुराणों में न केवल गहरे रंग की द्रौपदी को मानव इतिहास की सबसे खूबसूरत महिला बताया गया था, बल्कि श्री कृष्ण भी काले होने के बावजूद आकर्षण का पर्याय माने गए हैं। देवी का सबसे अधिक पूजित रूप भी माँ काली का है।)

और अगर Cadbury के इसी विज्ञापन को देखें तो यह तथाकथित नस्लभेद को खत्म कर रहा है या फिर नस्लवादी स्टीरियोटाइप को बढ़ावा ही दे रहा है? इसका रैपर देखिए:

सबसे गोरी मुस्लिम महिला, और सबसे काले दक्षिण भारतीय ब्राह्मण। रेशियल स्टीरियोटाइपिंग हुई कि नहीं? क्या Cadbury के अधिकारियों ने कभी गहरे रंग की या साँवली मुस्लिम महिला नहीं देखी? और अगर ‘गोरे’ दक्षिण भारतीय ब्राह्मण कैडबरी वालों को देखने हों तो सुब्रमण्यम स्वामी या आनंद रंगनाथन को देख लें। और या फिर यह सब करने से बेहतर होगा कि कैडबरी वाले चॉकलेट बनाने पर ध्यान दें, समाज-सुधार कॉर्पोरेट जगत के Social Justice Warriors का खिलौना नहीं है।

Gillette ने गँवाए 800 करोड़ डॉलर

कॉर्पोरेट वालों को सोशल मीडिया पर Social Justice Warrior बनना या ज्ञान-बाजी करना कितना महंगा पड़ता है, किसी को यह Gillette वालों से पूछना चाहिए। “Toxic Masculinity” के वैचारिक कैंसर को बढ़ावा देने और पुरुषों को ज़लील करने के नारीवादी अंधेपन में वह भूल गया कि उसका 99% से अधिक बिज़नेस मर्दों से ही आता है। नतीजा यह हुआ कि “Toxic Masculinity” वाला वाहियात विज्ञापन YouTube पर प्रकाशित करने के बाद उसकी अभिवावक/होल्डिंग कंपनी प्रॉक्टर एंड गैम्बल को Gillette के मूल्य के आकलन में 8 अरब डॉलर की कमी करनी पड़ी। बनाने को बहाना “मर्दों ने शेव करना ही बंद कर दिया होगा” का बनाया जा सकता है, लेकिन सच्चाई हर बहाने से और साफ़ ही हो जाती है।

Zomato को हलाल-“खाने का मज़हब नहीं होता” विवाद में ठीक-ठीक कितना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, यह तो समय बता ही देगा, लेकिन एक ब्रांड के तौर पर उसकी छवि निश्चित रूप से खराब हुई है। यही नहीं, इसी विवाद के चलते रेस्तराँ मालिकों द्वारा किसी और मुद्दे पर की गई आलोचना को भी मीडिया और सोशल मीडिया पर और तूल मिला।

कॉर्पोरेट को यह समझना होगा कि उसके HR और एडवरटाइजिंग विभाग में सामाजिक न्याय का झंडा गाड़ कर बैठे लोग किसी मुद्दे का समाधान करने की कोशिश कर रहे लोग नहीं, प्रोफेशनल एजेन्डाबाज और राजनीतिक रूप से वामपंथी झुकाव वाले हैं। उनकी बकवास में आकर यदि कॉर्पोरेट जगत अपने मूल व्यवसाय से ज्यादा ऐसी फ़िज़ूल की गतिविधियों में ऊर्जा खपाएगा तो न ही वह किसी मुद्दे पर कुछ कर पाएगा, न ही अपना खुद का व्यवसाय बचा पाएगा। बेहतर होगा कि बिना किसी मुद्दे की गहरी समझ के और एजेंडेबाज लोगों के झाँसे में आकर, अपना समय व्यर्थ करने की बजाय बिज़नेस एग्जीक्यूटिव उसे अपने काम में ही लगाएँ।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

संविधान दिवस पर PM मोदी ने की एक राष्ट्र और एक चुनाव पर बात, कहा- ये केवल विमर्श का नहीं बल्कि देश की जरूरत

"हमारे निर्णय का आधार एक ही मानदंड होना चाहिए और वो है राष्ट्रहित। राष्ट्रहित ही हमारा तराजू होना चाहिए। हमें ये याद रखना है कि जब विचारों में देशहित और लोकहित की बजाय राजनीति हावी होती है तो उसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है।"

संविधान दिवस: आरक्षण किसे और कब तक, समान नागरिक संहिता पर बात क्यों नहीं? – कुछ फैसले जो अभी बाकी हैं

भारत की धर्म निरपेक्षता के खोखलेपन का ही सबूत है कि हिंदुओं के पास आज अपनी एक 'होम लैंड' नहीं है जबकि कथित अल्पसंख्यक...

बंगाल: मर्डर, फायरिंग, बमबाजी, आगजनी… BJP के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष तक बने निशाना

बीजेपी (BJP) ने दक्षिण दिनाजपुर में अपने बूथ अध्यक्ष स्वाधीन राय की हत्या का आरोप सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर लगाया है।

डॉ. वर्गीज कुरियन: भारत में ‘ह्वाइट मनी’ की धारा बहाने वाला नायक, जिसने दिया ‘द टेस्ट ऑफ इंडिया’

26 नवंबर 1921 को कालीकट में पैदा हुए डॉ. वर्गीज कुरियन ने गुजरात के आनंद को कर्मभूमि बनाई। AMUL को दुनिया भर में एक ब्रांड… और भारत को डेयरी उत्पादन का नंबर #1 देश बनाया।

प्रचलित ख़बरें

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

ओवैसी को सूअर वाली स्वादिष्ट बिरयानी खिलाने का ऑफर, AIMIM नेता के बीफ बिरयानी पर BJP का पलटवार

"मैं आपको आज बिरयानी का निमंत्रण दे रहा हूँ। वाल्मिकी समुदाय के लोग पोर्क के साथ बिरयानी अच्छी बनाते हैं। आइए हम आपको स्वादिष्ट बिरयानी..."

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ – बलिदानी ओंबले के भतीजे का वो गीत… जिसे सुन पुलिस में भर्ती हुए 13 युवा

सामने वाले के हाथों में एके-47... लेकिन ओंबले बिना परवाह किए उस पर टूट पड़े। ट्रिगर दबा, गोलियाँ चलीं लेकिन ओंबले ने कसाब को...
- विज्ञापन -

’26/11 RSS की साजिश’: जानें कैसे कॉन्ग्रेस के चहेते पत्रकार ने PAK को क्लिन चिट देकर हमले का आरोप मढ़ा था भारतीय सेना पर

साल 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अजीज़ को उसके उर्दू भाषा अखबार रोजनामा राष्ट्रीय सहारा के लिए उत्कृष्ट अवार्ड दिया था। कॉन्ग्रेस में अजीज़ को सेकुलरिज्म का चमचमाता प्रतीक माना जाता था।

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

26/11 की नाकामी छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस चाटुकारों की फौज के साथ किसानों को भड़काने में जुटी, शेयर की पुरानी तस्वीरें

कॉन्ग्रेस की एकमात्र कोशिश है कि बस किसी तरह लोगों का ध्यान इस दिन किसी दूसरे मुद्दे की ओर भटक जाए और कोई उनकी नाकामयाबी व कायरता पर बात न करे।

केरल: राहुल गाँधी ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी थी राहत किटें, बंद दुकान में लावारिस मिलीं

बाढ़ प्रभावितों के लिए राहुल गाँधी की तरफ से भेजी गई राहत किटें केरल के एक दुकान में लावारिस मिली हैं।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

शादी के लिए धर्म-परिवर्तन की धमकी पर 10 साल, कराने वाले मौलवियों/पुजारियों को 5 साल सजा: MP में सख्त विधेयक

शादी में धर्मांतरण का लालच देने, धमकाने और दबाव बनाने पर 10 साल की सज़ा का प्रावधान होगा। मध्य प्रदेश में इस विधेयक का मसौदा...

ट्विटर ने सुशील मोदी का ट्वीट किया डिलीट: लालू यादव को एक्सपोज़ करने में नियमों के उल्लंघन को बताया वजह

सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में कहा था कि जब उन्होंने वापस उस नंबर को मिलाया तो लालू प्रसाद यादव ने सीधे फोन उठाया था। जिसके बाद उन्होंने जवाब दिया था कि यह गंदा खेल सफल नहीं होगा।

‘ललुआ का सब आदमी इसके साथ हो गया है’: वह सीट जो बार-बार कह रही थी सरकार एनडीए की ही बनेगी

बिहार कवरेज के दौरान हम केवटी सीट पर बार-बार गए। यही वह सीट थी जहाँ पहली बार 'माई समीकरण' को दरकते देखा और एनडीए की वापसी शत-प्रतिशत तय लगी।

कॉन्ग्रेस ऑफिस के कर्मचारियों को कई महीने से वेतन नहीं, गुस्से में आकर ऑफिस में ताला लगा धरने पर बैठे

कॉन्ग्रेस के लखनऊ ऑफिस में काम करने वाले कर्मचारी फिलहाल अपनी माँगों पर अड़े हुए हैं। इस प्रदर्शन को लेकर राजनीति होनी तय है। क्योंकि...

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,404FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe