Thursday, September 24, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे दलित और गोमूत्र से घृणा करने वाला द वायर का हिन्दूफोबिक मीडिया ट्रोल इसलिए...

दलित और गोमूत्र से घृणा करने वाला द वायर का हिन्दूफोबिक मीडिया ट्रोल इसलिए अपराधी नहीं हो सकता

यदि गिरफ़्तार करना मात्र इस प्रसंग का उद्देश्य रह जाता है तो इस प्रकार से हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलकर नायक बनने वालों की बाढ़ आती ही रहेगी। प्रशांत कनोजिया ने सस्ती लोकप्रियता के लिए...

देश, काल और वातावरण कोई भी क्यों न हो, सोशल मीडिया अपने हीरो तलाश ही लेता है। ख़ास बात यह कि व्यक्ति जितना बड़ा लम्पट, धूर्त और मक्कार है, उसके उतने ही ज्यादा भाव यहाँ पर मिलने के चांस रहते हैं। सोशल मीडिया द्वारा पैदा किए गए JNU के कुछ क्रांतिजीवों की कहानी अभी थमी नहीं थी कि हिन्दूफ़ोबिया से ग्रस्त एक और मीडिया ट्रोल को दोबारा सोशल मीडिया पर ‘कम्बल पिटाई’ के लिए चुन लिया गया।

इस बार प्रकरण है बीबीसी, और द वायर जैसे मीडिया गिरोहों के एक स्वतंत्र मीडिया ट्रोल और पार्ट टाइम पत्रकार का, जिसे कल ही उत्तर प्रदेश पुलिस पकड़ कर ले गई है। प्रशांत कनोजिया नाम के इस स्वतंत्र और मनचले पत्रकार की एक और उपलब्धि यह भी है कि इसे IIMC से निकाला गया था। यह खुलासा ट्विटर पर वरिष्ठ पत्रकार और आइआइएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश ने खुद किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए इस स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनोजिया को IIMC में एक वरिष्ठ प्रोफेसर को गाली देने के कारण बाहर निकाला गया था।

चर्चा में बने रहना एक क्रांतिकारी का पहला लक्ष्य होता है। इसी शौक के चलते द वायर के इस स्वतंत्र पत्रकार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एक ऐसे वीडियो को शेयर कर उनकी शादी करवा देने तक का आश्वासन दिया। यह भी बताना आवश्यक है कि इस वीडियो की प्रामाणिकता अभी तक शून्य है।

हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा चुनाव से पहले दिए एक इंटरव्यू को याद करना चाहिए, जिसमें वो कह रहे थे कि मोदी सरकार या भाजपा पर यदि कोई भी XYZ आदमी भारतवर्ष से लेकर किसी अन्य महाद्वीप पर बैठा बिना सर-पैर का कुछ आरोप लगा देता है, तो हमारी मीडिया उसकी और दौड़ पड़ता है, लेकिन जिन मीडिया पोर्टल्स ने गाँधी परिवार के घोटालों का बाकायदा सबूत के साथ भंडाफोड़ किया है, यही मीडिया उसे नजरअंदाज कर देना चाहती है।

- विज्ञापन -

इतना सब के बावजुद देखा जाए तो द वायर के इस पत्रकार को सोशल मीडिया पर अपने विचार रखने के लिए गिरफ्तार कर लेना बिलकुल भी तार्किक नहीं है। इसके 3 प्रमुख कारण हैं – पहला तो यह कि पुलिस विभाग के पास सोशल मीडिया को इतनी गंभीरता से लेने से पहले अन्य भी बहुत से काम होने चाहिए। दूसरा कारण यह है कि सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म का उदय हुआ ही अपने विचार और मत रखने के लिए था। तीसरा और सबसे प्रमुख कारण यहाँ पर ये भी है कि इस गिरफ़्तारी के बाद इस प्रकार के मीडिया ट्रोल्स का अपना पहला लक्ष्य सफल हो जाता है, वो है अटेंशन और सस्ती लोकप्रियता।

प्रशासन पहले भी बना चुका है चन्दा-चोरों को हीरो

टैक्सपेयर्स के रुपयों से मिलने वाली सब्सिडी से JNU में फ्रीलांस प्रोटेस्टर का काम करने वाले उमर खालिद और कन्हैया कुमार का उदाहरण लें तो सरकार द्वारा उन्हें रातों-रात देश के ऐसे वर्ग का नायक बना दिया गया, जो बेवजह यहाँ-वहाँ बिखरा पड़ा था। इसका नतीजा ये हुआ कि वो लोग तुरंत राजनीति का चेहरा बनने का सपना देखने लगे और बेगूसराय की सड़कों पर अपनी राजनीति की जमीन बनाने के लिए लोगों से चंदा माँगते नजर आने लगे। मानो यह सब किसी पूर्व नियोजित प्रक्रम का हिस्सा हो। हालाँकि, फायदा यह भी हुआ कि इस प्रकरण के बाद ऐसे लोगों को पहचानने में सहायता भी हुई।

लेकिन इस बार भी यही होना है। दलितों की तुलना जानवरों से करने वाले द वायर के इस पत्रकार को जनता फिर से अपना नायक बना देगी और उसके लिए यही उपलब्धि काफी होगी। हो सकता है कि अगले चुनाव में प्रशांत कनोजिया भी किसी सड़क पर चंदा माँगता हुआ नजर आए।

शासन-प्रशासन का नजरिया इस मामले में बेहद स्पष्ट होना चाहिए। या तो उसे पता होना चाहिए कि यह व्यक्ति इस कारण अपराधी है, या फिर उन्हें बेवजह किसी भी राह चलते मीडिया ट्रोल को सनसनी बनाने से बाज आना होगा। 

हिन्दुओं से नफरत से जन्मा पत्रकार है प्रशांत कनोजिया

घृणा और अराजकता के नाम पर खुद को पत्रकार कहने वाले प्रशांत कनोजिया का इतिहास बहुत अच्छा नहीं है। हालाँकि, एक समुदाय विशेष की बुराइयों को छुपाकर हिन्दुओं और उनकी आस्थाओं को अपमानित करने वाले पत्रकार बुद्धिजीवी कहलाए जाते हैं। पहली बात तो यह कि गिरफ्तार किया गया यह पत्रकार यदि खुद को पत्रकार मानता है तो कम से कम उसके सोशल मीडिया के इतिहास से तो यह नहीं झलकता है। वो भी तब जब आपको पता है कि आप पत्रकार हैं, और खुलकर अपने संस्थानों का नाम लिखकर बताते हैं कि आप उनसे सम्बंधित रहे हैं। प्रशांत कनोजिया का सोशल मीडिया इतिहास बताता है कि उनका लेनादेना किसी पत्रकारिता से नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ सस्ती लोकप्रियता से है। इस सस्ती लोकप्रियता के लिए उसने भी वही सबसे आसान तरीका अपनाया है, जैसा कि उन संस्थानों ने अपनाया था, जिनसे वो सम्बन्धित रहा है यानी, हिन्दूफ़ोबिया।

प्रशांत कनोजिया का सोशल मीडिया इतिहास बताता है कि उसकी भाषा भी हिन्दुओं के खिलाफ वही है जो पुलवामा आतंकी हमले से पहले वीडियो बनाने वाले फिदायीन की थी। वो भी गौमूत्र और गाय से नफरत करता था और द वायर का मीडिया ट्रोल प्रशांत कनोजिया भी गाय और गोमूत्र से नफरत करता है।

मोदी सरकार और हिंदुत्व विरोधी नैरेटिव लिखने वाले मीडिया गिरोह के इस दल यानी द वायर के प्रशांत कनोजिया नाम के इस पत्रकार के निशाने पर हिंदुत्व और उसकी आस्थाएँ रही हैं। जब आप एक नामी संस्था से निकलकर जर्नलिस्ट बनते हैं तब आपकी यह जिम्मेदारी ज्यादा बन जाती है कि आप अपने शब्दों के प्रति संवेदनशील रहें। इसका कारण यह है कि आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग आपको सिर्फ इसलिए पढ़ रहा होता है ताकि उसकी विचारधारा को एक दिशा मिल सके।

प्रशांत कनोजिया की गिरफ़्तारी एक तरह से सबक भी है, पत्रकारिता के नाम पर अपनी विषैली मानसिकता के प्रमोशन में लगे उन तमाम क्षद्म लिबरल पत्रकारों के लिए, जिनके लिए लिबरल होने का मतलब सिर्फ हिन्दुओं से घृणा और अकारण ही मनुस्मृति को कोसना है। ये लिबरल तो नहीं हैं लेकिन इन्हें अपना वर्ग पता होता है कि इनकी विचारधारा को खाद-पानी देकर आगे फैलाने वाले लोग मौजूद हैं, इसलिए ये लिबरल होने का अभिनय सलीके से निभाते हैं।

एक नजर द वायर के पत्रकार की निष्पक्षता पर

आप चाहे सोशल मीडिया पर हों या फिर किसी चाय की दुकान पर बैठे मनुस्मृति और संविधान पर चर्चा कर रहे हों, आपकी एक जिम्मेदारी बन जाती है कि आप सिर्फ चुनिंदा और तार्किक शब्दों का प्रयोग करें। जब आप ऐसा ना कर के सिर्फ अपनी व्यक्तिगत कुंठा की अभिव्यक्ति को ही सर्वोपरि बना बैठते हैं, ऐसे में आप तुरंत बेनकाब हो जाते हैं और आप हर दायरे को लाँघ चुके होते हैं। यह कल्चर आए दिन सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व के कारण बढ़ता ही जा रहा है। भारत जैसे देश में जहाँ पर सूचना का तंत्र बहुत ज्यादा जिम्मेदाराना और विकसित नहीं हैं, सोशल मीडिया एक बड़ा रोल अदा कर रहा है। ऐसे में द वायर के इस पत्रकार को मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास करने और नियमों का उलंघन करने के कारण हर हाल में सबक सिखाया जाना जरूरी है।

हमने देखा है हर दिन सोशल मीडिया के माध्यम से NDTV के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार जैसे लोग TV की कसर को अपने ब्लॉग और फेसबुक एकाउंट्स के द्वारा निकालते हैं, वहीं ध्रुव राठी जैसे प्रोफेशनल ‘प्रोपगैंडिस्ट’ को मोदी सरकार विरोधियों ने पूरी शरण देकर एजेंडा चलाने के लिए पर्याप्त साधन देकर यूट्यूब और फेसबुक पर बिठाया हुआ है। यदि व्यक्तिगत कारणों से फेक न्यूज़ और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सरकार इस बार कोई कड़ा निर्णय ले पाती है तो यह एक बड़ा बदलाव होगा। हो सकता है कि सरकार का इस बार लिया गया कोई निर्णय भविष्य के लिए कोई ऐसा बेंचमार्क तैयार कर दे, जिससे कि सोशल मीडिया की विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सके। वरना यह कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट्स का एक सेफ अड्डा बनता जा रहा है।

इस तरह से प्रशांत कनोजिया की गिरफ्तारी के बाद गेंद अब पूरी तरह से उत्तर प्रदेश प्रशासन के पाले में ही है। यदि गिरफ़्तार करना मात्र इस प्रसंग का उद्देश्य रह जाता है तो इस प्रकार से हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलकर नायक बनने वालों की बाढ़ आती ही रहेगी। हालाँकि, इस सबके बीच लोकतंत्र सुरक्षित रहना चाहिए।

यह भी देखना दिलचस्प है कि योगी आदित्यनाथ की छवि को ख़राब करने का प्रयास करने वाले इस पत्रकार के समर्थन में ऐसे लोग खड़े हैं, जो खुद दूसरों के ट्वीट्स पर आपत्ति जताकर लोगों पर मानहानि का केस दायर कर चुके हैं। यह दोहरापन इस प्रकार की मानसिकता वालों में बहुत कॉमन चीज है और सवालों के दायरे से बाहर होकर मात्र मनोरंजन पर सिमटकर रह चुके हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

…भारत के ताबूत में आखिरी कील, कश्मीरी नहीं बने रहना चाहते भारतीय: फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जो सांसद है

"इस समय कश्मीरी लोग अपने आप को न तो भारतीय समझते हैं, ना ही वे भारतीय बने रहना चाहते हैं।" - भारत के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने...

सुरेश अंगड़ी: पहले केन्द्रीय मंत्री, जिनकी मृत्यु कोरोना वायरस की वजह से हुई, लगातार 4 बार रहे सांसद

केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी कर्नाटक की बेलागावी सीट से 4 बार सांसद रह चुके थे। उन्होंने साल 2004, 2009, 2014 और 2019 में...

‘PM मोदी को हिन्दुओं के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं’: भारत के लिए क्यों अच्छा है ‘Time’ का बिलबिलाना

'Time' ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की शुरुआत में ही लिख दिया है कि लोकतंत्र की चाभी स्वतंत्र चुनावों के पास नहीं होती।

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है?

‘बोतल डॉन’ खान मुबारक की 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: करोड़ों की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर भी जब्त

माफिया सरगना के नेटवर्क को ध्वस्त करने के क्रम में फरार चल रहे खान मुबारक के करीबी शातिर बदमाश परवेज की मखदूमपुर गाँव स्थित करीब 50 लाख की संपत्ति को अंबेडकर नगर पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिया गया।

प्रचलित ख़बरें

नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का ताजा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

मेघना का कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

पूनम पांडे का पति है सैम अहमद, 11 दिन पहले ही दोनों ने की शादी… अब मोलेस्टेशन, मारपीट करने में गिरफ्तार

पूनम पांडे की शिकायत के बाद उनके पति सैम अहमद बॉम्बे को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनका अब मेडिकल टेस्‍ट होना है, जिसके बाद सैम को...

…भारत के ताबूत में आखिरी कील, कश्मीरी नहीं बने रहना चाहते भारतीय: फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जो सांसद है

"इस समय कश्मीरी लोग अपने आप को न तो भारतीय समझते हैं, ना ही वे भारतीय बने रहना चाहते हैं।" - भारत के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने...

2 TV कलाकारों से 7 घंटे की पूछताछ, मुंबई के कई इलाकों में सुबह-सुबह छापेमारी: ड्रग्स मामले में आज फँस सकते हैं कई बड़े...

बुधवार के दिन समीर वानखेड़े और उनकी टीम ने दो टीवी कलाकारों को समन जारी किया था और उनसे 6 से 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी।

सुरेश अंगड़ी: पहले केन्द्रीय मंत्री, जिनकी मृत्यु कोरोना वायरस की वजह से हुई, लगातार 4 बार रहे सांसद

केन्द्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी कर्नाटक की बेलागावी सीट से 4 बार सांसद रह चुके थे। उन्होंने साल 2004, 2009, 2014 और 2019 में...

‘PM मोदी को हिन्दुओं के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं’: भारत के लिए क्यों अच्छा है ‘Time’ का बिलबिलाना

'Time' ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की शुरुआत में ही लिख दिया है कि लोकतंत्र की चाभी स्वतंत्र चुनावों के पास नहीं होती।

यूपी में माफियाओं पर ताबड़तोड़ एक्शन जारी: अब मुख्तार अंसारी गिरोह के नजदीकी रजनीश सिंह की 39 लाख की संपत्ति जब्त

योगी सरकार ने मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के नजदीकी व मन्ना सिंह हत्याकांड में नामजद हिस्ट्रीशीटर एवं पूर्व सभासद रजनीश सिंह की 39 लाख रुपए की सम्पत्ति गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्त की है।

जम्मू कश्मीर में नहीं थम रहा बीजेपी नेताओं की हत्या का सिलसिला: अब BDC चेयरमैन की आतंकियों ने की गोली मार कर हत्या

मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में बीजेपी बीडीसी खग के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह को कथित तौर पर आतंकियों ने उनके घर पर ही हमला करके जान से मार दिया।

बनारस की शिवांगी बनी राफेल की पहली महिला फाइटर पायलट: अम्बाला में ले रही हैं ट्रेंनिंग, पिता ने जताई ख़ुशी

शिवांगी की सफलता पर न केवल घरवालों, बल्कि पूरे शहर को नाज हो रहा है। काशी में पली-बढ़ीं और BHU से पढ़ीं शिवांगी राफेल की पहली फीमेल फाइटर पायलट बनी हैं।

दिल्ली दंगा केस में राज्य विधानसभा पैनल को झटका: SC ने दिया फेसबुक को राहत, कहा- 15 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट अजित मोहन के खिलाफ 15 अक्टूबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का आदेश दिया है।

प्रभावी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, सर्विलांस, स्पष्ट मैसेजिंग पर फोकस और बढ़ाना होगा: खास 7 राज्यों के CM के साथ बैठक में PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि देश में 700 से अधिक जिले हैं, लेकिन कोरोना के जो बड़े आँकड़े हैं वो सिर्फ 60 जिलों में हैं, वो भी 7 राज्यों में। मुख्यमंत्रियों को सुझाव है कि एक 7 दिन का कार्यक्रम बनाएँ और प्रतिदिन 1 घंटा दें।

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
77,923FollowersFollow
323,000SubscribersSubscribe
Advertisements