Wednesday, November 25, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे दलित और गोमूत्र से घृणा करने वाला द वायर का हिन्दूफोबिक मीडिया ट्रोल इसलिए...

दलित और गोमूत्र से घृणा करने वाला द वायर का हिन्दूफोबिक मीडिया ट्रोल इसलिए अपराधी नहीं हो सकता

यदि गिरफ़्तार करना मात्र इस प्रसंग का उद्देश्य रह जाता है तो इस प्रकार से हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलकर नायक बनने वालों की बाढ़ आती ही रहेगी। प्रशांत कनोजिया ने सस्ती लोकप्रियता के लिए...

देश, काल और वातावरण कोई भी क्यों न हो, सोशल मीडिया अपने हीरो तलाश ही लेता है। ख़ास बात यह कि व्यक्ति जितना बड़ा लम्पट, धूर्त और मक्कार है, उसके उतने ही ज्यादा भाव यहाँ पर मिलने के चांस रहते हैं। सोशल मीडिया द्वारा पैदा किए गए JNU के कुछ क्रांतिजीवों की कहानी अभी थमी नहीं थी कि हिन्दूफ़ोबिया से ग्रस्त एक और मीडिया ट्रोल को दोबारा सोशल मीडिया पर ‘कम्बल पिटाई’ के लिए चुन लिया गया।

इस बार प्रकरण है बीबीसी, और द वायर जैसे मीडिया गिरोहों के एक स्वतंत्र मीडिया ट्रोल और पार्ट टाइम पत्रकार का, जिसे कल ही उत्तर प्रदेश पुलिस पकड़ कर ले गई है। प्रशांत कनोजिया नाम के इस स्वतंत्र और मनचले पत्रकार की एक और उपलब्धि यह भी है कि इसे IIMC से निकाला गया था। यह खुलासा ट्विटर पर वरिष्ठ पत्रकार और आइआइएमसी के महानिदेशक केजी सुरेश ने खुद किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए इस स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनोजिया को IIMC में एक वरिष्ठ प्रोफेसर को गाली देने के कारण बाहर निकाला गया था।

चर्चा में बने रहना एक क्रांतिकारी का पहला लक्ष्य होता है। इसी शौक के चलते द वायर के इस स्वतंत्र पत्रकार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़े एक ऐसे वीडियो को शेयर कर उनकी शादी करवा देने तक का आश्वासन दिया। यह भी बताना आवश्यक है कि इस वीडियो की प्रामाणिकता अभी तक शून्य है।

हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकसभा चुनाव से पहले दिए एक इंटरव्यू को याद करना चाहिए, जिसमें वो कह रहे थे कि मोदी सरकार या भाजपा पर यदि कोई भी XYZ आदमी भारतवर्ष से लेकर किसी अन्य महाद्वीप पर बैठा बिना सर-पैर का कुछ आरोप लगा देता है, तो हमारी मीडिया उसकी और दौड़ पड़ता है, लेकिन जिन मीडिया पोर्टल्स ने गाँधी परिवार के घोटालों का बाकायदा सबूत के साथ भंडाफोड़ किया है, यही मीडिया उसे नजरअंदाज कर देना चाहती है।

इतना सब के बावजुद देखा जाए तो द वायर के इस पत्रकार को सोशल मीडिया पर अपने विचार रखने के लिए गिरफ्तार कर लेना बिलकुल भी तार्किक नहीं है। इसके 3 प्रमुख कारण हैं – पहला तो यह कि पुलिस विभाग के पास सोशल मीडिया को इतनी गंभीरता से लेने से पहले अन्य भी बहुत से काम होने चाहिए। दूसरा कारण यह है कि सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म का उदय हुआ ही अपने विचार और मत रखने के लिए था। तीसरा और सबसे प्रमुख कारण यहाँ पर ये भी है कि इस गिरफ़्तारी के बाद इस प्रकार के मीडिया ट्रोल्स का अपना पहला लक्ष्य सफल हो जाता है, वो है अटेंशन और सस्ती लोकप्रियता।

प्रशासन पहले भी बना चुका है चन्दा-चोरों को हीरो

टैक्सपेयर्स के रुपयों से मिलने वाली सब्सिडी से JNU में फ्रीलांस प्रोटेस्टर का काम करने वाले उमर खालिद और कन्हैया कुमार का उदाहरण लें तो सरकार द्वारा उन्हें रातों-रात देश के ऐसे वर्ग का नायक बना दिया गया, जो बेवजह यहाँ-वहाँ बिखरा पड़ा था। इसका नतीजा ये हुआ कि वो लोग तुरंत राजनीति का चेहरा बनने का सपना देखने लगे और बेगूसराय की सड़कों पर अपनी राजनीति की जमीन बनाने के लिए लोगों से चंदा माँगते नजर आने लगे। मानो यह सब किसी पूर्व नियोजित प्रक्रम का हिस्सा हो। हालाँकि, फायदा यह भी हुआ कि इस प्रकरण के बाद ऐसे लोगों को पहचानने में सहायता भी हुई।

लेकिन इस बार भी यही होना है। दलितों की तुलना जानवरों से करने वाले द वायर के इस पत्रकार को जनता फिर से अपना नायक बना देगी और उसके लिए यही उपलब्धि काफी होगी। हो सकता है कि अगले चुनाव में प्रशांत कनोजिया भी किसी सड़क पर चंदा माँगता हुआ नजर आए।

शासन-प्रशासन का नजरिया इस मामले में बेहद स्पष्ट होना चाहिए। या तो उसे पता होना चाहिए कि यह व्यक्ति इस कारण अपराधी है, या फिर उन्हें बेवजह किसी भी राह चलते मीडिया ट्रोल को सनसनी बनाने से बाज आना होगा। 

हिन्दुओं से नफरत से जन्मा पत्रकार है प्रशांत कनोजिया

घृणा और अराजकता के नाम पर खुद को पत्रकार कहने वाले प्रशांत कनोजिया का इतिहास बहुत अच्छा नहीं है। हालाँकि, एक समुदाय विशेष की बुराइयों को छुपाकर हिन्दुओं और उनकी आस्थाओं को अपमानित करने वाले पत्रकार बुद्धिजीवी कहलाए जाते हैं। पहली बात तो यह कि गिरफ्तार किया गया यह पत्रकार यदि खुद को पत्रकार मानता है तो कम से कम उसके सोशल मीडिया के इतिहास से तो यह नहीं झलकता है। वो भी तब जब आपको पता है कि आप पत्रकार हैं, और खुलकर अपने संस्थानों का नाम लिखकर बताते हैं कि आप उनसे सम्बंधित रहे हैं। प्रशांत कनोजिया का सोशल मीडिया इतिहास बताता है कि उनका लेनादेना किसी पत्रकारिता से नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ सस्ती लोकप्रियता से है। इस सस्ती लोकप्रियता के लिए उसने भी वही सबसे आसान तरीका अपनाया है, जैसा कि उन संस्थानों ने अपनाया था, जिनसे वो सम्बन्धित रहा है यानी, हिन्दूफ़ोबिया।

प्रशांत कनोजिया का सोशल मीडिया इतिहास बताता है कि उसकी भाषा भी हिन्दुओं के खिलाफ वही है जो पुलवामा आतंकी हमले से पहले वीडियो बनाने वाले फिदायीन की थी। वो भी गौमूत्र और गाय से नफरत करता था और द वायर का मीडिया ट्रोल प्रशांत कनोजिया भी गाय और गोमूत्र से नफरत करता है।

मोदी सरकार और हिंदुत्व विरोधी नैरेटिव लिखने वाले मीडिया गिरोह के इस दल यानी द वायर के प्रशांत कनोजिया नाम के इस पत्रकार के निशाने पर हिंदुत्व और उसकी आस्थाएँ रही हैं। जब आप एक नामी संस्था से निकलकर जर्नलिस्ट बनते हैं तब आपकी यह जिम्मेदारी ज्यादा बन जाती है कि आप अपने शब्दों के प्रति संवेदनशील रहें। इसका कारण यह है कि आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर एक बड़ा वर्ग आपको सिर्फ इसलिए पढ़ रहा होता है ताकि उसकी विचारधारा को एक दिशा मिल सके।

प्रशांत कनोजिया की गिरफ़्तारी एक तरह से सबक भी है, पत्रकारिता के नाम पर अपनी विषैली मानसिकता के प्रमोशन में लगे उन तमाम क्षद्म लिबरल पत्रकारों के लिए, जिनके लिए लिबरल होने का मतलब सिर्फ हिन्दुओं से घृणा और अकारण ही मनुस्मृति को कोसना है। ये लिबरल तो नहीं हैं लेकिन इन्हें अपना वर्ग पता होता है कि इनकी विचारधारा को खाद-पानी देकर आगे फैलाने वाले लोग मौजूद हैं, इसलिए ये लिबरल होने का अभिनय सलीके से निभाते हैं।

एक नजर द वायर के पत्रकार की निष्पक्षता पर

आप चाहे सोशल मीडिया पर हों या फिर किसी चाय की दुकान पर बैठे मनुस्मृति और संविधान पर चर्चा कर रहे हों, आपकी एक जिम्मेदारी बन जाती है कि आप सिर्फ चुनिंदा और तार्किक शब्दों का प्रयोग करें। जब आप ऐसा ना कर के सिर्फ अपनी व्यक्तिगत कुंठा की अभिव्यक्ति को ही सर्वोपरि बना बैठते हैं, ऐसे में आप तुरंत बेनकाब हो जाते हैं और आप हर दायरे को लाँघ चुके होते हैं। यह कल्चर आए दिन सोशल मीडिया के बढ़ते वर्चस्व के कारण बढ़ता ही जा रहा है। भारत जैसे देश में जहाँ पर सूचना का तंत्र बहुत ज्यादा जिम्मेदाराना और विकसित नहीं हैं, सोशल मीडिया एक बड़ा रोल अदा कर रहा है। ऐसे में द वायर के इस पत्रकार को मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास करने और नियमों का उलंघन करने के कारण हर हाल में सबक सिखाया जाना जरूरी है।

हमने देखा है हर दिन सोशल मीडिया के माध्यम से NDTV के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार जैसे लोग TV की कसर को अपने ब्लॉग और फेसबुक एकाउंट्स के द्वारा निकालते हैं, वहीं ध्रुव राठी जैसे प्रोफेशनल ‘प्रोपगैंडिस्ट’ को मोदी सरकार विरोधियों ने पूरी शरण देकर एजेंडा चलाने के लिए पर्याप्त साधन देकर यूट्यूब और फेसबुक पर बिठाया हुआ है। यदि व्यक्तिगत कारणों से फेक न्यूज़ और आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सरकार इस बार कोई कड़ा निर्णय ले पाती है तो यह एक बड़ा बदलाव होगा। हो सकता है कि सरकार का इस बार लिया गया कोई निर्णय भविष्य के लिए कोई ऐसा बेंचमार्क तैयार कर दे, जिससे कि सोशल मीडिया की विश्वसनीयता को मजबूत किया जा सके। वरना यह कॉन्सपिरेसी थ्योरी एक्टिविस्ट्स का एक सेफ अड्डा बनता जा रहा है।

इस तरह से प्रशांत कनोजिया की गिरफ्तारी के बाद गेंद अब पूरी तरह से उत्तर प्रदेश प्रशासन के पाले में ही है। यदि गिरफ़्तार करना मात्र इस प्रसंग का उद्देश्य रह जाता है तो इस प्रकार से हिन्दुओं के खिलाफ जहर उगलकर नायक बनने वालों की बाढ़ आती ही रहेगी। हालाँकि, इस सबके बीच लोकतंत्र सुरक्षित रहना चाहिए।

यह भी देखना दिलचस्प है कि योगी आदित्यनाथ की छवि को ख़राब करने का प्रयास करने वाले इस पत्रकार के समर्थन में ऐसे लोग खड़े हैं, जो खुद दूसरों के ट्वीट्स पर आपत्ति जताकर लोगों पर मानहानि का केस दायर कर चुके हैं। यह दोहरापन इस प्रकार की मानसिकता वालों में बहुत कॉमन चीज है और सवालों के दायरे से बाहर होकर मात्र मनोरंजन पर सिमटकर रह चुके हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दीप्रिंट वालो! ‘लव जिहाद’ हिन्दू राष्ट्र का आधार नहीं, हिन्दू बच्चियों को धोखेबाज मुस्लिमों से बचाने का प्रयास है

लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।

UP कैबिनेट में पास हुआ ‘लव जिहाद अध्यादेश’: अब नाम छिपाकर शादी करने पर मिलेगी 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 'लव जिहाद' के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

नड्डा 100 दिन के दौरे पर, गाँधी परिवार छुट्टी पर: बाद में मत रोना कि EVM हैक हो गया…

कोरोना काल में भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाया गया था। अब संगठन मजबूत किया जा रहा। गाँधी परिवार आराम फरमा रहा, रिसॉर्ट्स में।

43 चायनीज Apps को किया गया बैन: चीन पर चोट, कुल 267 पर चला डिप्लोमैटिक डंडा

भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर...

अर्णब की गिरफ्तारी से पहले अन्वय नाइक मामला: क्यों उठते हैं माँ-बेटी की मंशा पर सवाल? कब-कब क्या हुआ, जानिए सब कुछ

ऑपइंडिया ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच साझा किए गए पत्रों को एक्सेस किया और यह जाना कि यह मामला उतना सुलझा नहीं है जितना लग रहा है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?

वैक्सीन को लेकर जल्द शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान, प्रखंड स्तर तक पर भी टास्क फोर्स का हो गठन: PM मोदी

पीएम मोदी ने बताया कि देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है।

प्रचलित ख़बरें

‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ...

साल्वे ने अर्णब गोस्वामी का केस लड़ने के लिए रिपब्लिक न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उन्होंने कुलभूषण जाधव का केस भी मात्र 1 रुपए में लड़ा था।

बहन से छेड़खानी करता था ड्राइवर मुश्ताक, भाई गोलू और गुड्डू ने कुल्हाड़ी से काट डाला: खुद को किया पुलिस के हवाले

गोलू और गुड्डू शाम के वक्त मुश्ताक के घर पहुँच गए। दोनों ने मुश्ताक को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला और जम कर पीटा, फिर उन्होंने...

रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध, बाद में कहा- ‘इस्लाम कबूलो तब करूँगा शादी’

जब शादी की कोई बात किए बिना अर्जुन (रहीम) महिला के घर से जाने लगा तो पीड़िता ने दबाव बनाया। इसके बाद रहीम ने अपनी सच्चाई बता...

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। वहाँ के छठ घाट को तहस-नहस कर दिया गया।
- विज्ञापन -

‘दिल्ली दंगे में उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान के खिलाफ पर्याप्त सबूत’: कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल

दिल्ली की अदालत ने दिल्ली पुलिस के उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में नए सप्लीमेंट्री चार्जशीट को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपित उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान खान के खिलाफ यूएपीए के प्रावधानों के तहत अपराध करने के पर्याप्त सबूत हैं।

दीप्रिंट वालो! ‘लव जिहाद’ हिन्दू राष्ट्र का आधार नहीं, हिन्दू बच्चियों को धोखेबाज मुस्लिमों से बचाने का प्रयास है

लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।

UP कैबिनेट में पास हुआ ‘लव जिहाद अध्यादेश’: अब नाम छिपाकर शादी करने पर मिलेगी 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 'लव जिहाद' के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना और रंगोली की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, जस्टिस शिंदे ने मुंबई पुलिस को फटकारा

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है, लेकिन राजद्रोह के मामले में दोनों को 8 जनवरी को मुंबई पुलिस के सामने पेश होना होगा।

नड्डा 100 दिन के दौरे पर, गाँधी परिवार छुट्टी पर: बाद में मत रोना कि EVM हैक हो गया…

कोरोना काल में भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाया गया था। अब संगठन मजबूत किया जा रहा। गाँधी परिवार आराम फरमा रहा, रिसॉर्ट्स में।

43 चायनीज Apps को किया गया बैन: चीन पर चोट, कुल 267 पर चला डिप्लोमैटिक डंडा

भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर...

अर्णब की गिरफ्तारी से पहले अन्वय नाइक मामला: क्यों उठते हैं माँ-बेटी की मंशा पर सवाल? कब-कब क्या हुआ, जानिए सब कुछ

ऑपइंडिया ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच साझा किए गए पत्रों को एक्सेस किया और यह जाना कि यह मामला उतना सुलझा नहीं है जितना लग रहा है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?

शाहिद जेल से बाहर आते ही ’15 साल’ की लड़की को फिर से ले भागा, अलग-अलग धर्म के कारण मामला संवेदनशील

उम्र पर तकनीकी झोल के कारण न तो फिर से पाक्सो एक्ट की धाराएँ लगाई गईं और न ही अभी तक शाहिद या भगाई गई लड़की का ही कुछ पता चला...

वैक्सीन को लेकर जल्द शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान, प्रखंड स्तर तक पर भी टास्क फोर्स का हो गठन: PM मोदी

पीएम मोदी ने बताया कि देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,359FollowersFollow
357,000SubscribersSubscribe