Saturday, September 19, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे देशद्रोहियों और दंगाइयों की हिंसा के बीच पिसता कौन है? गरीब छात्र जो किसी...

देशद्रोहियों और दंगाइयों की हिंसा के बीच पिसता कौन है? गरीब छात्र जो किसी पार्टी के नहीं

विरोध के नाम पर की गई हिंसा किसी दूसरी ओर इशारा करती है। वह यह कि जेएनयू जैसे शिक्षण संस्थान में कुछ ऐसे ठेकेदार पैदा हुए हैं जो कि भीड़ इकठ्ठा करने का काम करते हैं। यह काम वह किसी समाज सेवा के लिए नहीं बल्कि इसके लिए करते हैं कि वह कैंपस के उभरते हुए तथाकथित छात्र नेता कहला सकें।

पिछले दिनों जेएनयू में आंदोलनों और विरोध के नाम पर हुए हिंसक प्रदर्शनों ने यहाँ की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले तो जेएनयू में लगे ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ के नारों ने यहाँ रहने वाले देशद्रोहियों की पहचान कराई थी। लेकिन हाल ही में सीएए के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर हुई हिंसक घटनाओं ने यहाँ रहने वाले ‘दंगाइयों’ की पहचान करा दी है।

साथ ही इस बीच जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय में एक प्रचलन तेज़ी से उभरा है। जिसमें पहले तो कैंपस में मौजूद मासूस छात्र-छात्राओं की भीड़ को इकठ्ठा किया जाता है और फिर उस भीड़ को हिंसा पर उतारू करने के लिए सुनियोजित तरीके से बरगलाया जाता है। यह कार्य उन तथाकथित और टुटपुंजिए छात्र नेताओं द्वारा किया जाता है जो अपने साथ विरोध प्रदर्शनों में भीड़ इकठ्ठा करने वाले ठेकेदार का तमगा लिए घूमते हैं। अब सवाल खड़ा होता कि यह सब जेएनयू में ही क्यों तो ध्यान में आता है कि पूरे देश से समाप्ति की ओर बढ़ रहे वामपंथियों को साँस लेने की जगह एकमात्र सिर्फ जेएनयू में ही बची है। कहने को तो यहाँ देशहित में भी बहुत सी गतिविधियाँ चलती हैं लोकिन वह किसी को दिखाई नहीं देतीं। दिखाई देता है तो यहाँ सिर्फ हर महीने किसी न किसी को लेकर विरोध-प्रदर्शन और फ़िर उसके नाम पर सड़कों पर उतरकर हिंसा।

देश में विश्वविद्यालयों की स्थापना इसलिए की जाती है कि देश का युवा उसमें उच्च शिक्षा ग्रहण कर सके और ऐसे संस्थानों में विभिन्न कोर्सों की फीस भी इसलिए कम से कम रखी जाती है कि ग़रीब से ग़रीब का बच्चा उसकी ज़द में आकर अपने सपनों को साकार कर देश के सुनहरे भविष्य को गढ़ सके। लेकिन आज देश के उच्च और प्रमुख शिक्षण संस्थान ही वामपंथियों, देशद्रोहियों और अब भीड़ इकठ्ठा करने वाले ठेकेदारों का गढ़ बनते जा रहे हैं। यह सब कोई बीते ज़माने की बात नहीं बल्कि कुछ वर्षों के भीतर ही हमने यह सब होते हुए देखा है।

देश में एक नहीं बल्कि सैकड़ों विश्वविद्यालय हैं जिनमें से किसी विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने तो सीएए के खिलाफ़ शांति पूर्वक विरोध प्रदर्शन किया तो किसी के छात्र-छात्राओं ने सीएए के समर्थन में रैली निकाली। लेकिन इनमें से 3 से 4 ही ऐसे विश्वविद्यालय थे जिनमें हिंसक प्रदर्शन हुए। जहाँ विरोध के नाम पर मजहबी नारे लगाए गए। इस बात की जानकारी खुद गृहमंत्री अमित शाह ने एक मीडिया चैनल के कार्यक्रम में दी। जिसमें अमित शाह ने बताया कि देश भर में 224 विश्वविद्यालय हैं जिसमें अगर निजी विश्वविद्यालयों को जोड़ दिया जाए तो यह आँकड़ा 300 के पार हो जाता है। इनमें से 22 विश्वविद्यालय ऐसे हैं जिनमें अपने-अपने तरीके से प्रदर्शन हुआ। लेकिन इनमें से 4 विश्वविद्यालयों में गंभीर और हिंसक प्रदर्शन हुए। जिसमें जामिया मिलिया इस्लामिया, जेएनयू, एएमयू और लखनऊ के नदवा कॉलेज और इंटीग्रल विश्वविद्यालय प्रमुख रूप से शामिल है।

विरोध के नाम पर जेएनयू में की गई तोड़फ़ोड़ की एक तस्वीर
- विज्ञापन -

अब सवाल यह खड़ा होता है कि देश में जब 300 से अधिक विश्वविद्यालय हैं तो इन चार विश्वविद्यालयों में ही क्यों बात बे बात पर हिंसक प्रदर्शन हुए। क्या मान लिया जाए कि यहाँ पढ़ने वाले लोग ज़्यादा विचारवान है या ज़्यादा जागरुक हैं या फिर मान लिया जाए कि यहाँ के लोग पढ़ाई के नाम पर कुछ और ही करते हैं। यह तो आप खुद ही तय करें। क्योंकि यह बात किसी से छिपी नहीं कि देश की संसद पर हमला करने वाले अफ़जल गुरु को फाँसी देने के बाद सबसे पहले उसके समर्थन में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में ही मार्च निकाला गया था। यह भी सब जानते हैं कि देश की सुप्रसिद्ध विश्वविद्यालय एएमयू से पढ़ने के बाद मन्नान वानी कैसे आतंकवादी बनता है और अपने ही देश के ख़िलाफ ऐके-47 उठाता है। यह भी सब जानते हैं कि वह जेएनयू ही है जहाँ कितने अफ़जल मारोगे हर घर से अफ़जल निकलेगा, और भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह… इंशा अल्लाह के नारे लगाए गए थे।

लेकिन दुख तब होता है कि जब देश के ऐसे उच्च संस्थानों में आंदोलनों के नाम पर हिंसक प्रदर्शन किए जाते हों और शिक्षा के नाम पर उसमें अड्डा जमाकर देश के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगाए जाते हों। यह सब यहीं खत्म नहीं होता। एक सवाल इसके आगे भी जो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर सकता है। वह यह कि इन घटनाओं में एक वर्ग तो वह होता है जो सुनियोजित ढंग से शामिल होता है और एक वर्ग वह होता है जो कि जाने-अनजाने में घटनाओं में शामिल तो हो जाता है लेकिन इसके बाद कानूनी कार्यवाई में फँसने के बाद वह अपने आप को निर्दोष बताते हुए पहले तो दर-दर की ठोकरें खाता है और फ़िर अपनी ही आँखों से अपने भविष्य को चौपट होते हुए भी देखता है।

अब बात आती है कि वह कौन छात्र होते हैं जो इतनी आसानी से विरोध के नाम पर हो हल्ला करते हुए पहले तो सड़क तक आते हैं और फ़िर वह छात्र सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाते हुए हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर याद करें तो कुछ ऐसे ही छात्रों की एक भीड़ दिल्ली में गाँधी परिवार से एसपीजी हटाने के विरोध में देखने को मिली थी। जो गाँधी परिवार से एसपीजी हटाने का विरोध तो कर रही थी लेकिन इन विरोध करने वाले अधिकांश छात्रों को ये नहीं पता था कि वह विरोध आख़िर किसका कर रहे हैं और वह वहाँ क्यों इकठ्ठा हुए हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ था कि जब एक टीवी पत्रकार ने उनसे पूछा था कि वह किसका विरोध कर रहे हैं और उनकी माँगे क्या हैं।

इस बीच एक छात्र ने तो यहाँ तक कह दिया हमें अपनी सुरक्षा चाहिए और हमें नौकरी भी। हम इसलिए यहाँ आए हुए हैं। वहीं जब वहाँ विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं से पूछा गया कि एसपीजी का पूरा नाम क्या है तो अधिकांश छात्राऐं अपने चेहरे को छिपाती हुई नज़र आईं। खैर, सोचने वाली बात यह कि विश्वविद्यालय में दूर शहरों से पढ़ाई करने के लिए आए छात्र आख़िर कैसे हज़ारों की संख्या में इकठ्ठा हो जाते हैं। वास्तव में ये छात्र विरोध प्रदर्शन के लिए ही हॉस्टल से बाहर आते हैं या फ़िर इसके पीछे का मदसद कुछ औऱ ही होता है? अग़र इनको विरोध ही करना था तो ये छात्र शांतिपूर्ण तरीके से ही सरकार की नीतियों के ख़िलाफ में अपना विरोध जता सकते थे।

जेएनयू में फीस वृद्धि को लेकर हो रहे विरोध में शामिल छात्रों की भीड़ (फ़ाईल फ़ोटो)

लेकिन, विरोध के नाम पर की गई हिंसा किसी दूसरी ओर इशारा करती है। वह यह कि जेएनयू जैसे शिक्षण संस्थान में कुछ ऐसे ठेकेदार पैदा हुए हैं जो कि भीड़ इकठ्ठा करने का काम करते हैं। यह काम वह किसी समाज सेवा के लिए नहीं बल्कि इसके लिए करते हैं कि वह कैंपस के उभरते हुए तथाकथित छात्र नेता कहला सकें। जिसके बाद विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र इन तथाकथित नेताओं के चुंगल में आ जाते हैं। वहीं ये तथाकथित नेता सीधे-साधे छात्रों का फ़ायदा उठाकर उनको भलीभाँति उकसाने और बरगलाने का काम करते हैं। आख़िर देश का भविष्य किस ओर जा रहा है। यह बेहद चिंता का विषय है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

SSR केस: 7 अक्टूबर को सलमान खान, करण जौहर समेत 8 टॉप सेलेब्रिटीज़ को मुज्जफरपुर कोर्ट में होना होगा पेश, भेजा गया नोटिस

मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय ने सलमान खान और करण जौहर सहित आठ हस्तियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर, 2020 को इन सभी को कोर्ट में उपस्थित होना है।

दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है चार्जशीट-59: सफूरा ज़रगर से उमर खालिद तक 15 आरोपितों के नाम शामिल

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में 15 लोगों को मुख्य आरोपित बनाया है। इसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ, खालिद सैफी, जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर और मीरान हैदर शामिल हैं।

कहाँ गायब हुए अकाउंट्स? सोनू सूद की दरियादिली का उठाया फायदा या फिर था प्रोपेगेंडा का हिस्सा

सोशल मीडिया में एक नई चर्चा के तूल पकड़ने के बाद कई यूजर्स सोनू सूद की मंशा सवाल उठा रहे हैं। कुछ ट्विटर अकाउंट्स अचानक गायब होने पर विवाद है।

दिल्ली का पत्रकार, चीनी महिला और नेपाली युवक… जासूसी के लिए शेल कंपनियों के जरिए मिलता था मोटा माल

स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक चीनी महिला और उसके नेपाली सहयोगी को भी गिरफ्तार किया है।

छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाएगी NEP-2020: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

“मुझे इस बात का विश्वास है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। यह हमारे देश के छात्रों आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी और उनका आने वाला कल बेहतर बनाएगी।"

प्रचलित ख़बरें

NCB ने करण जौहर द्वारा होस्ट की गई पार्टी की शुरू की जाँच- दीपिका, मलाइका, वरुण समेत कई बड़े चेहरे शक के घेरे में:...

ब्यूरो द्वारा इस बात की जाँच की जाएगी कि वीडियो असली है या फिर इसे डॉक्टरेड किया गया है। यदि वीडियो वास्तविक पाया जाता है, तो जाँच आगे बढ़ने की संभावना है।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में...

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन के बेटे का लव जिहाद: 10वीं की हिंदू लड़की से रेप, फँसा कर निकाह, गर्भपात… फिर छोड़ दिया

अजीजुद्दीन छत्तीसगढ़ के दुर्ग से कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA बदरुद्दीन कुरैशी का बेटा है। लव जिहाद की इस घटना के मामले में मीडिया के सवालों से...

थालियाँ सजाते हैं यह अपने बच्चों के लिए, हम जैसों को फेंके जाते हैं सिर्फ़ टुकड़े: रणवीर शौरी का जया को जवाब और कंगना...

रणवीर शौरी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कंगना को समर्थन देते हुए कहा है कि उनके जैसे कलाकार अपना टिफिन खुद पैक करके काम पर जाते हैं।

‘एक बार दिखा दे बस’: वीडियो कॉल पर अपनी बेटियों से प्राइवेट पार्ट दिखाने को बोलता था मोहम्मद मोहफिज, आज भेजा गया जेल

आरोपित की बेटी का कहना है कि उनका घर में सोना भी दूभर हो गया था। उनका पिता कभी भी उनके कपड़ों में हाथ डाल देता था और शारीरिक संबंध स्थापित करने की कोशिश करता था।

दिशा की पार्टी में था फिल्म स्टार का बेटा, रेप करने वालों में मंत्री का सिक्योरिटी गार्ड भी: मीडिया रिपोर्ट में दावा

चश्मदीद के मुताबिक तेज म्यूजिक की वजह से दिशा की चीख दबी रह गई। जब उसके साथ गैंगरेप हुआ तब उसका मंगेतर रोहन राय भी फ्लैट में मौजूद था। वह चुपचाप कमरे में बैठा रहा।

‘उसने अपने C**k को जबरन मेरी Vagina में डालने की कोशिश की’: पायल घोष ने अनुराग कश्यप पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

“अगले दिन उसने मुझे फिर से बुलाया। उन्होंने कहा कि वह मुझसे कुछ चर्चा करना चाहते हैं। मैं उसके यहाँ गई। वह व्हिस्की या स्कॉच पी रहा था। बहुत बदबू आ रही थी। हो सकता है कि वह चरस, गाँजा या ड्रग्स हो, मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है लेकिन मैं बेवकूफ नही हूँ।”

कानपुर लव जिहाद: मुख्तार से राहुल विश्वकर्मा बन हिंदू लड़की को फँसाया, पहले भी एक और हिंदू लड़की को बना चुका है बेगम

जब लड़की से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मुख्तार ने उससे राहुल बनकर दोस्ती की थी। उसने इस तरह से मुझे अपने काबू में कर लिया था कि वह जो कहता मैं करती चली जाती। उसने फिर परिजनों से अपने मरियम फातिमा बनने को लेकर भी खुलासा किया।

अलवर: भांजे के साथ बाइक से जा रही विवाहिता से गैंगरेप, वीडियो वायरल होने के बाद आरोपित आसम, साहूद सहित 5 गिरफ्तार

“पुलिस ने दो आरोपितों आसम मेओ और साहूद मेओ को गिरफ्तार किया और एक 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया। बाकी आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें हरियाणा भेजी गई हैं।”

‘सभी संघियों को जेल में डालेंगे’: कॉन्ग्रेस समर्थक और AAP ट्रोल मोना अम्बेगाँवकर ने जारी किया ‘लिबरल डेमोक्रेसी’ का एजेंडा

मोना का कहना है कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाएँगी और अगले पीएम बनने का मौका मिलने पर सभी संघियों को जेल में डाल देगी।

अतीक अहमद के फरार चल रहे भाई अशरफ को जिस घर से पुलिस ने किया था गिरफ्तार, उसे योगी सरकार ने किया जमींदोज

प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने अतीक अहमद के भाई अशरफ के साले मोहम्मद जैद के कौशांबी स्थित करोड़ों के आलीशान बिल्डिंग पर भी सरकारी बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया है।

नेटफ्लिक्स: काबुलीवाला में हिंदू बच्ची से पढ़वाया नमाज, ‘सेक्युलरिज्म’ के नाम पर रवींद्रनाथ टैगोर की मूल कहानी से छेड़छाड़

सीरीज की कहानी के एक दृश्य में (मिनी) नाम की एक लड़की नमाज अदा करते हुए दिखाई देती है क्योंकि उसका दोस्त काबुलीवाला कुछ दिनों के लिए उससे मिलने नहीं आया था।

कंगना ने किया योगी सरकार के सबसे बड़ी फिल्म सिटी बनाने के ऐलान का समर्थन, कहा- फिल्म इंडस्ट्री में कई और बड़े सुधारों की...

“हमें अपनी बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई प्रकार के आतंकवादियों से बचाना है, जिसमें भाई भतीजावाद, ड्रग माफ़िया का आतंक, सेक्सिज़म का आतंक, धार्मिक और क्षेत्रीय आतंक, विदेशी फिल्मों का आतंक, पायरेसी का आतंक प्रमुख हैं।"

पत्रकार राजीव शर्मा के बारे में दिल्‍ली पुलिस ने किया खुलासा, कहा- 2016 से 2018 तक कई संवेदनशील जानकारी चीन को सौंपी

“पत्रकार राजीव शर्मा 2016 से 2018 तक चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील रक्षा और रणनीतिक जानकारी देने में शामिल था। वह विभिन्न देशों में कई स्थानों पर उनसे मिलता था।”

SSR केस: 7 अक्टूबर को सलमान खान, करण जौहर समेत 8 टॉप सेलेब्रिटीज़ को मुज्जफरपुर कोर्ट में होना होगा पेश, भेजा गया नोटिस

मुजफ्फरपुर जिला न्यायालय ने सलमान खान और करण जौहर सहित आठ हस्तियों को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। 7 अक्टूबर, 2020 को इन सभी को कोर्ट में उपस्थित होना है।

दिल्ली दंगों के पीछे बड़ी साज़िश की तरफ इशारा करती है चार्जशीट-59: सफूरा ज़रगर से उमर खालिद तक 15 आरोपितों के नाम शामिल

दिल्ली पुलिस ने राजधानी में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के मामले में 15 लोगों को मुख्य आरोपित बनाया है। इसमें आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन, पूर्व कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ, खालिद सैफी, जेसीसी की सदस्य सफूरा ज़रगर और मीरान हैदर शामिल हैं।

हमसे जुड़ें

260,559FansLike
77,938FollowersFollow
322,000SubscribersSubscribe
Advertisements