Wednesday, October 21, 2020
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EXCLUSIVE: दो और ज़मीन सौदे के दस्तावेज़, गाँधी-वाड्रा परिवार व दलाली के रिश्तों का खुलासा पार्ट-2

राहुल गाँधी ने ज़मीन ख़रीदने की बात तो स्वीकार कर ली लेकिन वह एचएल पाहवा, सीसी थम्पी और संजय भंडारी के साथ अपने संबंधों के बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं। इस से शक और गहरा होता जा रहा है।

ऑपइंडिया ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और हथियार दलाल संजय भंडारी के बीच संबंधों का ख़ुलासा कर बताया था कि एचएल पाहवा ने राहुल गाँधी को काफ़ी कम दाम कर ज़मीन बेची। पाहवा को वित्त उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति का नाम सीसी थम्पी था। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने ऑपइंडिया की रिपोर्ट को आधार बना कर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और राहुल गाँधी पर सवाल दागे। रिपोर्ट के प्रकाशित होने और रिपब्लिक भारत पर इस पर चर्चा होने के साथ खड़ा हुए राजनीतिक तूफ़ान में गाँधी परिवार बुरी तरह फँसता नज़र आ रहा है।

हमारे ख़ुलासे का आधार राहुल गाँधी और एचएल पाहवा के बीच हुआ भूमि सौदा था। राहुल ने पाहवा से ज़मीन ख़रीदी, जिसके रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गाँधी से भी अच्छे सम्बन्ध हैं। सबसे बड़ी बात तो यह कि पाहवा से ख़रीदी गई ज़मीन को फिर वापस उसे ही काफ़ी ज्यादा क़ीमतों पर बेच दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा एचएल पाहवा के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले, जिनमें इस लैंड डील का विवरण था।

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि पाहवा के पास इतने अधिक मूल्य में ज़मीन ख़रीदने के लिए मुद्रा भंडार ही नहीं था। पाहवा को इस कार्य के लिए सीसी थम्पी द्वारा वित्त उपलब्ध कराया गया। सीसी थम्पी और संजय भंडारी के बीच रुपयों का कई बार लेन-देन हुआ है। दोनों के बीच कई ट्रांजैक्शंस हुए हैं। ये दोनों वाड्रा से भी जुड़े हुए हैं। थम्पी ने वाड्रा के लिए बेनामी संपत्ति की ख़रीद की थी और भंडारी ने उस करार के दौरान सेतु का कार्य किया था। ऑपइंडिया द्वारा जारी किए गए तीन दस्तावेज राहुल गाँधी, एचएल पाहवा और रॉबर्ट वाड्रा के बीच रिश्तों को उजागर करते हैं।

अब हमारे पास दो अतिरिक्त दस्तावेज भी हैं जो गाँधी-वाड्रा परिवार को एचएल पाहवा से जोड़ते हैं। वही पाहवा, जो संजय भंडारी और सीसी थम्पी से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। हमने जो प्रॉपर्टी डील के काग़ज़ात जारी किए थे, वो हसनपुर स्थित ज़मीन के थे। अब हमें और भी काग़ज़ात मिले हैं, जो रॉबर्ट वाड्रा और एचएल पाहवा के बीच हुए ज़मीन के सौदे से जुड़े हैं। यह हरियाणा के अमीपुर में हुए ज़मीन सौदे से जुड़ा है। इसमें एचएल पाहवा से रॉबर्ट वाड्रा को ट्रांजैक्शन किए गए हैं।

ज़मीन सौदे का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि वही महेश नागर जिसने रॉबर्ट वाड्रा और राहुल गाँधी की ओर से पिछले कागजात पर हस्ताक्षर किए थे, उसने इस ज़मीन के सौदे के लिए वाड्रा की ओर से भी हस्ताक्षर किए थे।

रॉबर्ट वाड्रा, प्रियंका गाँधी वाड्रा और राहुल गाँधी के सौदों के बीच में HL पाहवा है।

इसके अलावा हमने एक और भूमि सौदे के कागज़ात खोजे हैं, जिसमें इस बात का स्पष्टीकरण मौजूद है कि रॉबर्ट वाड्रा ने HL पाहवा को भी ज़मीन बेची थी।

HL पाहवा, CC थम्पी और संजय भंडारी के बीच सांठगांठ के साथ कुछ ऐसे सवाल भी हैं जिनसे राहुल गाँधी का बच पाना लगभग न के बराबर है।

1. राहुल गाँधी ने HL पाहवा से जो ज़मीन ख़रीदी उसका संबंध संजय भंडारी और CC थम्पी से था। अब सवाल यह उठता है कि क्या ज़मीन ख़रीदने से पहले राहुल गाँधी को इस अवैध सांठगांठ के बारे में पहले से पता था?

2. HL पाहवा ने रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गाँधी वाड्रा को ज़मीन बेची है और उसके बाद ज़मीन को वापस बढ़े हुए दामों पर ख़रीदा, जबकि उसके पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त नकद धन भी नहीं थी। इस प्रक्रिया में, उसने इन भुगतानों के लिए CC थम्पी से पैसे लिए। क्या राहुल गाँधी को अपनी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा और बहनोई रॉबर्ट वाड्रा के इस अवैध भूमि सौदों के बारे में पता था?

3. HL पाहवा अपने परिवार के लेन-देन में क्या भूमिका निभाते हैं और वह एकमात्र सूत्रधार क्यों है जिसके माध्यम से ऐसे भूमि सौदे संचालित होते हैं? HL पाहवा ने CC थम्पी से पैसे क्यों लिए और जब उसके पास नकद धन नहीं था, बावजूद इसके उसने ज़मीन फिर से क्यों खरीदी?

4. इसका सीधा लिंक हथियार डीलर संजय भंडारी से है, जो राफ़ेल सौदे पर कॉन्ग्रेस शासन की वार्ता के दौरान दसौं के लिए एक ऑफसेट भागीदार बनना चाहता था। अधिकांश भूमि ख़रीद और बिक्री कॉन्ग्रेस शासन के दौरान हुई जबकि उस समय राफ़ेल वार्ता चल रही थी। क्या राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस के राफ़ेल सौदे में संजय भंडारी की भागीदारी के बारे में पहले से पता था?

5. न्यूज रिपोर्टें इस बात को सुनिश्चित करती हैं कि MMRCA डील समझौते में रक्षा मंत्रालय से MMRCA की कई फाइलें गायब हुई थीं। ये फाइलें संजय भंडारी द्वारा फोटोकॉपी कराई गई थी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जब राहुल गाँधी और उनका परिवार  HL PAHWA के साथ डील कर रहे थे, जो कि सीसी थम्पी और संजय भंडारी से जुड़ा हुई था, तो उन्हें पता था कि संजय भंडारी क्या कर रहे है?

6. इसके अलावा एयरबस के लिए भी संजय भंडारी बिचौलिया की भूमिका में थे। एयरबस कॉन्सॉर्टियम का एक पार्ट है जिससे यूरोफाइटर तैयार होता है, जो कि  MMRCA सौदे के दौरान राफेल के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा में था। क्या राहुल गाँधी जानते थे कि एच एल पाहवा जिनके संबंध थंपी के जरिए संजय भंडारी से थे वो एयरबस के लिए बिचौलिए रह चुके हैं?

7. क्या राहुल गाँधी बार-बार राफेल मुद्दे को इसीलिए उठा रहे हैं क्योंकि राफेल MMRCA करार में उनके क़रीबी संजय भंडारी को कोई हिस्सा नहीं मिल पाया। या हो सकता है उन्हें अब यूरोफाइटर ज्यादा लाभप्रद नज़र आ रहा हो।

8. एबीपी के एक पत्रकार ने बताया कि राहुल गाँधी जर्मनी में यूरोफाइटर प्रतिनिधियों से मिले। क्या वर्तमान राफेल सौदे में उनकी निंदा में कोई भूमिका थी? क्या संजय भंडारी इन कथित बैठकों में शामिल थे?

9.क्या ‘चौकीदार चोर है’ के नारे इसलिए लगाए जाते हैं ताकि हथियारों के सौदागर के साथ राहुल की अपनी सांठगांठ का खुलासा न हो?

10 मौजूदा राफेल सौदे को सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद भी राहुल गाँधी तमाम कुतर्कं से राफेल के पीछे पड़े हुए हैं क्योंकि अगर राफेल डील नाकाम नहीं साबित होती तो यूरोफाइटर पर विचार वापस नहीं किया जा सकता?

चूँकि, राहुल गाँधी राफेल डील के खिलाफ़ हाथ-धो कर पड़ चुके हैं तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह भी महत्तवपूर्ण हो जाता है कि वह केवल जमीन की खरीद-बिक्री पर बात न करते हुए एचएल पाहवा, सीसी थंपी और संजय भंडारी जैसे लोगों से अपने संबंधों के बारे में भी खुलकर बात करें, जिसके कारण उन पर सवालों की पकड़ और गहराती जा रही है।


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Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

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