Friday, April 16, 2021
Home राजनीति एक अफसर जिसने बक्से में बंद कर दिया लालू का 'जिन्न', खत्म कर दिया...

एक अफसर जिसने बक्से में बंद कर दिया लालू का ‘जिन्न’, खत्म कर दिया बिहार में जंगलराज का बूथ लूट

इस चुनाव पर राव ने कितनी गहरी छाप छोड़ी थी इसका अंदाजा आप एक सर्वे से लगा सकते हैं। चुनाव के बाद बिहारटाइम्स डॉट कॉम ने यह सर्वे किया। बिहार के लोगों ने उन्हें बदलाव का हीरो चुना था। राव को 62 फीसदी वोट मिला था, जबकि राजनीतिक बदलाव के चेहरे बने नीतीश कुमार को 29 फीसदी वोट ही इस सर्वे में मिले थे।

चुनाव आयोग ने शुक्रवार (25 सितंबर 2020) को बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। तीन चरणों में मतदान होगा और 10 नवंबर को नतीजे आएँगे। बिहार में चुनावों की चर्चा के साथ ही जंगलराज और चुनावों के दौरान बूथ कैप्चरिंग का भयावह अतीत भी चर्चा में आ जाता है।

लालू प्रसाद यादव चुनाव के दौरान दावा करते रहते थे कि जब बक्सा खुलेगा तो उनका जिन्न निकलेगा। यानी, जब गिनती होगी तो नतीजे उनके ही हक में रहेंगे। लेकिन, 2005 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव ने बूथ कैप्चरिंग के इतिहास को दफन कर दिया। जब नतीजे आए तो कोई जिन्न नहीं निकला और लालू का 15 सालों से चला आ रहा राजपाट खत्म हो गया।

बिहार को बूथ कैप्चरिंग से निजात दिलाने वाले अफसर का नाम है, केजे राव। उन्हें 2005 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षक बनाकर भेजा था। इसके बाद राव ने जो कुछ किया वह एक इतिहास है।

असल में राजनीतिक जोड़-तोड़ से 1990 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने वाले लालू ने ऐसा समीकरण गढ़ा कि अगले डेढ़ दशकों तक वही बिहार की राजनीति के धुरी बने रहे। उन्होंने एमवाई समीकरण (मुस्लिम-यादव) बनाया था। 1995 में जब विधानसभा के चुनाव आए तो उन्होंने कहा, “बक्सा (मतदान पेटी) से जिन्न निकलेगा और सब पलट जाएगा।” जब नतीजे आए तो लालू के कहे अनुसार जिन्न बाहर निकला और उनकी पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। ये वो दौर था जब बिहार में चुनाव और बूथ कैप्चरिंग एक-दूसरे का पर्याय बन गए थे।

साल 2005 के पहले बिहार विधानसभा चुनावों में बाहुबलियों का प्रभाव अपने चरम पर था। राजनीतिक नुमाइंदे बेख़ौफ़ होकर बूथ पर कब्ज़ा करते थे और जनता मन मुताबिक मतदान करने में भी डरती थी।

ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि 2005 के चुनाव निष्पक्ष और नियमबद्ध तरीके से कराए जाएँ। चुनाव आयोग ने केजे राव को बिहार चुनाव के दौरान पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया। बिहार में फैले राजनीतिक आतंक को देख कर देख कर राव समझ चुके थे कि यहाँ राजनैतिक हालातों का ढाँचा अन्य क्षेत्रों जैसा नहीं है। अक्टूबर 2005 में होने वाले चुनाव से ठीक पहले उन्होंने राजधानी पटना में अधिकारियों की एक बैठक आयोजित की। दुबली पतली काया, चेहरे पर मोटा चश्मा, चेक शर्ट और गोल चेहरा। कुर्सी पर बैठने कुछ ही देर बाद उन्होंने एक कागज़ उठाया, जो चुनाव की तैनाती में शामिल अधिकारियों ने तैयार किया था। 

उन्होंने एक दरोगा से अंग्रेजी भाषा में कहा, “ह्वाट इज़ द स्टेट ऑफ़ नॉन बेलेबल वारंटी।” दरोगा जी शांत, बल्कि पूरी सभा ही शांत! इसके पहले बैठक में शामिल होने वाला कोई और शख्स अपनी राय पेश करता राव ने चुनाव को लेकर एक गाढ़ी लकीर खींच दी। उन्होंने कहा “इस चुनाव में लुटेरों और बाहुबलियों मनमानी नहीं चलेगी। चुनाव का पैमाना केवल एक होगा, संविधान और क़ानून।”

उनके जीवन का एक किस्सा बहुत उल्लेखनीय है, 2005 बिहार चुनाव के दौरान वह गया स्थित पहाड़ी मतदान केंद्र पहुँचे। बूथ की छत पर एक जवान एलएमजी लेकर खड़ा था। राव ने उससे पूछा तो उसने स्थानीय बोली में जवाब दिया, “ई बार त बूथ लुटेरवन डरे झांकियों न मारतौ, गोली खाएला हई का।” एक पंक्ति में यही था 2005 का बिहार विधानसभा चुनाव। बिहार की जनता के लिए यह परिवर्तन अविस्मरणीय था। आलम यह हुआ कि जब केजे राव हेलिकॉप्टर से निकलते तो जनता उनके नारे लगाने लगती थी।   

इस चुनाव पर राव ने कितनी गहरी छाप छोड़ी थी इसका अंदाजा आप एक सर्वे से लगा सकते हैं। चुनाव के बाद बिहारटाइम्स डॉट कॉम ने यह सर्वे किया। बिहार के लोगों ने उन्हें बदलाव का हीरो चुना था। राव को 62 फीसदी वोट मिला था, जबकि राजनीतिक बदलाव के चेहरे बने नीतीश कुमार को 29 फीसदी वोट ही इस सर्वे में मिले थे।

साल 2015 में एक समाचार समूह को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, “चुनाव से जुड़े हर रोग की एक ही दवा है। चुनाव आयोग के प्रस्तावों को सही तरीके से लागू  किया जाए। यह बड़ी चुनौती है लेकिन इसके लिए युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं को आगे आना होगा। जिन बूथों पर सेना के जवान नहीं मौजूद होंगे, वहाँ असल लोकतंत्र नज़र आएगा। 2005 से 2015 के बीच बहुत बदलाव नहीं आए हैं, अभी तक कई मूलभूत समस्याएँ हैं। मतदाता को निडर होकर घरों से बाहर निकलना होगा और बेहतर उम्मीदवार का चुनाव करना होगा। कोई उचित विकल्प न हो तो नोटा दबाएँ जो बाहुबली जनता को डराए, जनता उसे नोटा से डराए।”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

CPI(M) ने TMC के लोगों को मारा पर वो BJP से अच्छे: डैमेज कंट्रोल करने आए डेरेक ने किया बेड़ा गर्क

प्रशांत किशोर ने जब से क्लब हाउस में TMC को डैमेज किया है, उसे कंट्रोल करने की कोशिशें लगातार हो रहीं। यशवंत सिन्हा से लेकर...

ईसाई मिशनरियों ने बोया घृणा का बीज, 500+ की भीड़ ने 2 साधुओं की ली जान: 181 आरोपितों को मिल चुकी है जमानत

एक 70 साल के बूढ़े साधु का हँसता हुआ चेहरा आपको याद होगा? पालघर में हिन्दूघृणा में 2 साधुओं और एक ड्राइवर की मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर मीडिया चुप रहा। लिबरल गिरोह ने सवाल नहीं पूछे।

जिन ब्राह्मणों के खिलाफ भड़काता था लालू, उसकी रिहाई के लिए उन्हीं से पूजा-पाठ करवा रहे बेटे: बेल पर सुनवाई

लालू की रिहाई के लिए तेजस्वी यादव ने देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और वासुकीनाथ धाम में प्रार्थना की। तेज प्रताप नवरात्र कर रहे हैं।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आगे आए अखाड़े, कुम्भ समाप्ति की घोषणा: जमातियों से तुलना करने वालों को झटका

निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़े ने ये घोषणा की है। दोनों अखाड़ों ने अप्रैल 17 को हरिद्वार में कुम्भ की समाप्ति की घोषणा की। कई अखाड़े आ सकते हैं साथ।

दिल्ली सरकार के App पर हॉस्पिटल में कई बेड्स खाली, हकीकत में एक भी नहीं: CM केजरीवाल ने झूठ बोला?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में हॉस्पिटल बेड्स की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके एकदम उलट है।

द प्रिंट की ‘ज्योति’ में केमिकल लोचा ही नहीं, हिसाब-किताब में भी कमजोर: अल्पज्ञान पर पहले भी करा चुकी हैं फजीहत

रेमेडिसविर पर 'ज्ञान' बघार फजीहत कराने वाली ज्योति मल्होत्रा मिलियन के फेर में भी पड़ चुकी हैं। उनके इस 'ज्ञान' के बचाव में द प्रिंट हास्यास्पद सफाई भी दे चुका है।

प्रचलित ख़बरें

बेटी के साथ रेप का बदला? पीड़ित पिता ने एक ही परिवार के 6 लोगों की लाश बिछा दी, 6 महीने के बच्चे को...

मृतकों के परिवार के जिस व्यक्ति पर रेप का आरोप है वह फरार है। पुलिस ने हत्या के आरोपित को हिरासत में ले लिया है।

सोशल मीडिया पर नागा साधुओं का मजाक उड़ाने पर फँसी सिमी ग्रेवाल, यूजर्स ने उनकी बिकनी फोटो शेयर कर दिया जवाब

सिमी ग्रेवाल नागा साधुओं की फोटो शेयर करने के बाद से यूजर्स के निशाने पर आ गई हैं। उन्होंने कुंभ मेले में स्नान करने गए नागा साधुओं का...

‘अब या तो गुस्ताख रहेंगे या हम, क्योंकि ये गर्दन नबी की अजमत के लिए है’: तहरीक फरोग-ए-इस्लाम की लिस्ट, नरसिंहानंद को बताया ‘वहशी’

मौलवियों ने कहा कि 'जेल भरो आंदोलन' के दौरान लाठी-गोलियाँ चलेंगी, लेकिन हिंदुस्तान की जेलें भर जाएंगी, क्योंकि सवाल नबी की अजमत का है।

चीन के लिए बैटिंग या 4200 करोड़ रुपए पर ध्यान: CM ठाकरे क्यों चाहते हैं कोरोना घोषित हो प्राकृतिक आपदा?

COVID19 यदि प्राकृतिक आपदा घोषित हो जाए तो स्टेट डिज़ैस्टर रिलीफ़ फंड में इकट्ठा हुए क़रीब 4200 करोड़ रुपए को खर्च करने का रास्ता खुल जाएगा।

…स्कर्ट वाली का रेप हो जाता: कंपनी ने Pak कर्मचारी को निकाला, कोर्ट ने कहा – ‘मूर्ख है, बर्खास्त मत करो, रख लो’

इंग्लैंड में एक पाकिस्तानी कर्मचारी ने सहकर्मी के साथ बातचीत में कहा कि अगर यह पाकिस्तान होता तो स्कर्ट वाली लड़कियों का रेप हो जाता।

जहाँ इस्लाम का जन्म हुआ, उस सऊदी अरब में पढ़ाया जा रहा है रामायण-महाभारत

इस्लामिक राष्ट्र सऊदी अरब ने बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच खुद को उसमें ढालना शुरू कर दिया है। मुस्लिम देश ने शैक्षणिक क्षेत्र में...
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,235FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe