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हिंदू अस्मिता, घुसैपठिए, भ्रष्टाचार और TMC की निकम्मी सरकार: अमित शाह ने बताई ‘बंगाल विजय’ की रणनीति, जानें- कैसे ममता का किला ढहाने की तैयारी कर रही BJP?

बंगाल में बीजेपी का सबसे प्रमुख मुद्दा घुसपैठ है। इसलिए अमित शाह ने बंगाल दौरे के दौरान कहा है कि राज्य से घुसपैठियों को निकालना उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा भ्रष्टाचार, मुस्लिम तुष्टिकरण और हिन्दू अस्मिता के साथ साथ सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना का वादा भी बीजेपी कर रही है।

बंगाल में आगामी 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी की रणनीति साफ है। पार्टी ने घुसपैठ और उसकी वजह से हो रहे डेमोग्राफी बदलने के मुद्दे को जोरशोर से उठा रही है। राज्य में फैले भ्रष्टाचार और घोटालों की फेहरिस्त भी जनता के सामने गिना रही है। गरीबी, बेरोजगारी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे भी पार्टी के लिए अहम है।

घुसपैठ का मुद्दा अहम

राज्य में ममता सरकार को पटखनी देने के लिए अहम मुद्दा घुसपैठिया है। बीजेपी जनता से वादा कर रही है कि अगर उनकी सरकार बनेगी तो घुसपैठियों को बाहर निकाला जाएगा। दो दिवसीय दौरे पर बंगाल गए केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार बनने के बाद एक मजबूत नेशनल ग्रिड बनाया जाएगा ताकि राज्य में परिंदा भी पर नहीं मार सके। उन्होंने ममता सरकार पर ये भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं दे रही है इसलिए सीमा सील करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं।

बंगाल के बाहर असम, त्रिपुरा से लेकर पंजाब, कश्मीर, गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्यों में घुसपैठ अब करीब करीब बंद है। हालाँकि कश्मीर में आतंकी सीमा पार कर आते हैं, लेकिन ये आम लोग नहीं हैं। इसे घुसपैठ की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

राज्य में करीब 30 फीसदी मुस्लिम हैं। लेकिन मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ की वजह से डेमोग्राफी बदल गई है। यहाँ करीब 70 फीसदी मुस्लिम हैं। यही वजह है कि पूर्व टीएमसी नेता हुमायूँ कबीर यहाँ बाबरी मस्जिद बनाने जा रहा है। इसके लिए करोड़ो रुपए जुटा भी चुका है। बीजेपी इस मुद्दे को भी उठा रही है और जनता को बता रही है कि आखिर ममता बनर्जी की शह के बिना बाबरी मस्जिद बनाना कैसे संभव है।

बीजेपी ने पूरे पश्चिम बंगाल में, खासकर बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में, 1,000 से अधिक सीएए सहायता शिविर बना चुकी है। इन शिविरों का उद्देश्य हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में मदद करना, कागजात जुटाने में सहायता करना और प्रक्रिया को लेकर सही जानकारी देना है।

ममता कर रही मुस्लिमों का तुष्टिकरण

बीजेपी लगातार ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाती रही है। बीजेपी मानती है कि राज्य में लाखों ‘फर्जी’ मतदाता हैं जो घुसपैठ कर आए हैं। इन घुसपैठिए को पहचानने के लिए राज्य में एसआईआर हो रहा है। लेकिन ममता बनर्जी शुरू से एसआईआर का विरोध कर रही है।

पार्टी टीएमसी पर ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ का आरोप लगा रही है और हिंदुओं के एकीकरण को अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है। मतुआ और अन्य शरणार्थी समुदायों के बीच नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए के कार्यान्वयन को एक बड़े वादे के रूप में रखा जा रहा है। ममता बनर्जी सीएए का विरोध करती हैं। भाजपा का तर्क है कि मतुआ समुदाय को नागरिकता और सुरक्षा दिलाना उनकी प्राथमिकता है।

भ्रष्टाचार और कुशासन

बीजेपी लगातार तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार को ‘भ्रष्टाचार, डर और कुशासन’ के मुद्दों पर घेर रही है। पार्टी ममता बनर्जी के 14 साल के शासनकाल में हुए घोटालों का जिक्र कर रही है। शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन घोटाला, कोयला घोटाला, रेत तस्करी, नगर पालिका भर्ती घोटाला, मनरेगा घोटाला, आवास घोटाला समेत कई घोटालों की चर्चा की जाती है। इस दौरान उन मंत्रियों और पार्टी नेताओं का नाम बताना नहीं भूलती, जो भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके हैं या जिन पर मामले चल रहे हैं।

बंगाल के मंत्री रह चुके पार्थो चटर्जी, ज्योतिप्रिय मल्लिक, मलय घटक से लेकर अनुव्रत मंडल, माणिक भट्टाचार्या, नरेश पाल, फिरहाद हकीम, सोवन चटर्जी, कुणाल घोष का नाम बीजेपी गिनाती है। इनलोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और इनमें से ज्यादातर सलाखों के पीछे भी गए। ऐसे नेताओं के बारे में बताकर पार्टी मानती है कि बंगाल की जनता जरूर इस बार चुनाव में टीएमसी को ‘सजा’ देगी।

गृहमंत्री शाह ने बंगाल में घोटालों और नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनके घर से 25 करोड़,20 करोड़,27 करोड़ निकलते हैं और इनकी काली कमाई गिनते गिनते मशीनें भी बंद हो जाती हैं।

महिला सुरक्षा का मुद्दा

संदेशखाली और आरजी कर जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए बीजेपी महिला सुरक्षा में राज्य सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रही है। बीजेपी ममता बनर्जी के दुर्गापुर गैंगरेप मामले पर की गई टिप्पणी का भी उल्लेख करती है। ममता बनर्जी ने कहा था कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा खुद करनी चाहिए। महिलाओं के रात में बाहर निकलने पर भी सवाल खड़े किए थे।

इसका राजनीति दलों और महिला अधिकार संगठनों ने भी विरोध करते हुए कहा था कि ये ‘पीड़िता को दोषी ठहराने’ जैसा बयान है। बीजेपी का कहना है कि बंगाल जैसे राज्य में जहाँ महिलाएँ काफी आगे हैं, वहाँ मुगल शासन की तरह के ‘फरमान’ जारी होते हैं। उन्हें शाम 7 बजे तक घर पहुँच जाने की सलाह दी जाती है।

गृहमंत्री अमित शाह ने ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा, “ऑफिशियली कहा गया है कि महिलाओं को शाम 7 बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। हम किस ज़माने में जी रहे हैं? क्या हम मुगल काल में जी रहे हैं? ममता जी, यह एक आजाद भारत है। यह पक्का करना कि महिलाएं जब चाहें सुरक्षित रूप से बाहर निकल सकें, उनका संवैधानिक अधिकार है। आपकी सरकार यह बेसिक सुरक्षा देने में नाकाम रही है।”

बीजेपी ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जवाब में महिलाओं के लिए अधिक वित्तीय सहायता और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण जैसे वादे करने की तैयारी कर रही है। बिहार मॉडल को अपनाते हुए महिलाओं के खातों में कुछ रकम डाले जा सकते हैं।

बंगाल की ‘विरासत’ की चर्चा

बीजेपी ‘बंगाल की विरासत’ को पुनर्जीवित करने का वादा जनता से कर रही है। बंग गौरव, बंग संस्कृति की बात कर रही है। टीएमसी ने संसद में वंदे मातरम गाने का विरोध किया। बीजेपी इसे मुद्दा बना रही है और बंकिम चंद्र चटर्जी के अपमान से इसे जोड़ रही है। स्वामी विवेकानंद, गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाने की बात भी पार्टी कर रही है।

गरीबी और बेरोजगारी के लिए ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार करते हुए बीजेपी उद्योगों की कमी के कारण हो रहे पलायन को रोकने का वादा कर रही है। ममता सरकार में आर्थिक स्थिति कमजोर होने और गरीबी बढ़ने का मुद्दा भी जोर शोर से उठाया जा रहा है। बीजेपी का कहना है कि एक समय था जब देश का नागरिक 100 रुपए कमाता था तो बंगाल का नागरिक 127 रुपए कमाता था, लेकिन अब देश का नागरिक 100 रुपए कमाता है और बंगाल का नागरिक सिर्फ 73 रुपए कमा पाता है। एक समय था जब भारत की GDP में योगदान के मामले में बंगाल तीसरे नंबर पर था। आज यह 22वें नंबर पर आ गया है।

राज्य में हिंसा और राजनीतिक मर्डर भी बड़ा मुद्दा है। अमित शाह के मुताबिक, माना जा रहा था कि कम्युनिस्टों के हारने के बाद हिंसा और बदले की राजनीति खत्म हो जाएगी, लेकिन वे कम्युनिस्टों से भी आगे निकल गए हैं।

दरअसल राज्य में अब तक 300 से ज्यादा बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। बंगाल के गाँवों से 3000 से ज्यादा कार्यकर्ता विस्थापित हो चुके हैं। टीएमसी से जुड़े नहीं होने पर बंगाल के गाँवों में छोटा- मोटा काम भी नहीं मिल पाता है। लोगों को राशन लेने और ब्लॉक स्तर के काम के लिए भी टीएमसी के ‘कैडर’ का सहारा लेना पड़ता है। राज्य में डर का माहौल है। अगर कोई टीएमसी कार्यकर्ताओं का विरोध करे, तो ये घर में घुस कर पीटते हैं। कई बार तो जान से भी मार डालते हैं।

बंगाल में राजनीतिक हत्या, भ्रष्टाचार और घुसपैठ से जनता त्रस्त है। हिन्दू अस्मिता का सवाल उठाकर बीजेपी अपनी रणनीति को धार दे रही है। बंगाल के लिए ये सारे मुद्दे अहम हैं क्योंकि जनता इनसे त्रस्त है। आरजी कर और दुर्गापुर रेप कांड को लेकर सड़क पर उतरी जनता इस बार टीएमसी को मजा चखाना चाहती है। बीजेपी को इसका फायदा मिल सकता है।

पार्टी इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन की उम्मीद कर रही है। बीजेपी का लक्ष्य 2026 के चुनावों में राज्य की 294 सीटों में से 200 सीटें जीतने का है। मार्च-अप्रैल 2026 में चुनाव होने की संभावना है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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