कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘हाइड्रोजन बम’ बताया था, जिसमें राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरों’ की रक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया था। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होते ही चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए राहुल गाँधी के दावों को बेबुनियाद बताया है।
चुनाव आयोग ने बताया कि किसी आदमी के जरिए ऑनलाइन वोट हटाना संभव नहीं है और किसी भी वोटर का नाम बिना उसे सुनवाई का मौका दिए हटाया नहीं जा सकता। आयोग ने यह भी बताया कि कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 2023 में वोटों को हटाने की कोशिशों के बाद खुद चुनाव आयोग ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी।
❌Allegations made by Shri Rahul Gandhi are incorrect and baseless.#ECIFactCheck
— Election Commission of India (@ECISVEEP) September 18, 2025
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चुनाव आयोग का तथ्यों के साथ जवाब
राहुल गाँधी ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6018 वोटरों के नाम हटाए जाने का जिक्र किया था। इस पर चुनाव आयोग ने बताया कि 2023 में आलंद में वोटरों के नाम हटाने की कुछ असफल कोशिशें हुई थीं, जिसके बाद खुद चुनाव आयोग ने इस मामले की जाँच के लिए FIR दर्ज कराई थी।
आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, आलंद विधानसभा सीट 2018 में भाजपा ने जीती थी और 2023 में कॉन्ग्रेस ने। यह राहुल गाँधी के आरोपों को कमजोर करता है, क्योंकि अगर ‘वोट चोरी’ हुई होती, तो कॉन्ग्रेस वहाँ जीत नहीं पाती।
कॉन्ग्रेस पर ही लगे थे गंभीर आरोप
चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी पर सीधा पलटवार करते हुए बताया कि बिहार में चल रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान (SIR) के दौरान कॉन्ग्रेस ने ही 89 लाख वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया था। यह राहुल गाँधी के उन आरोपों के विपरीत है, जिसमें वह चुनाव आयोग पर कॉन्ग्रेस के वोटरों को हटाने का आरोप लगा रहे थे।
आयोग ने कहा कि यह अभियान फर्जी वोटरों को हटाकर असली वोटरों के अधिकार सुरक्षित करने के लिए चलाया गया है। इस अभियान के दौरान कई विदेशी नागरिकों का भी पता चला है, जो फर्जी आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेजों के सहारे वोटर बने हुए थे।
पुराने आरोपों पर भी जवाब
राहुल गाँधी लगातार चुनाव आयोग पर आरोप लगाते रहे हैं और इसी को देखते हुए आयोग ने 17 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी से एक हफ्ते के भीतर अपने दावों के सबूत पेश करने या फिर पूरे देश से माफी माँगने को कहा था। लेकिन राहुल गांधी ने न तो कोई सबूत पेश किए और न ही माफी माँगी।
इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि उनके आरोपों को अब अमान्य माना जाता है। आयोग ने यह भी कहा कि अगर किसी को चुनाव परिणाम पर आपत्ति है, तो वह 45 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है, लेकिन किसी विपक्षी नेता ने ऐसा नहीं किया।
चुनाव आयोग ने हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब दिया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में कोई औपचारिक शिकायत तक नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये आरोप ज्यादातर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को भड़काना है, न कि किसी सच्ची समस्या का समाधान खोजना।


