Homeराजनीति'उन्हें सिर्फ रसोई में खाना बनाना आता है' : कॉन्ग्रेस के 92 साल के...

‘उन्हें सिर्फ रसोई में खाना बनाना आता है’ : कॉन्ग्रेस के 92 साल के MLA ने भाजपा की महिला प्रत्याशी पर की विवादित टिप्पणी, EC में शिकायत दर्ज

शिवशंकरप्पा ने कहा, "जैसा कि आप सभी जानते हैं वह चुनाव जीतकर मोदी को कमल का फूल देना चाहती हैं। पहले उन्हें दावणगेरे की समस्याओं को समझने दीजिए। बात करना एक बात होती है। लेकिन वह तो सिर्फ रसोई में खाना बनाना जानती हैं।"

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस नेता शमनूर शिवशंकरप्पा ने भारतीय जनता पार्टी की महिला प्रत्याशी पर कुंठित टिप्पणी की है उन्होंने भाजपा उम्मीदवार गायत्री सिद्धेश्वरा को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होने कहा कि गायत्री में सार्वजनिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से संबोधित करने की क्षमता नहीं है।

कॉन्ग्रेस की एक बैठक में बोलते हुए शिवशंकरप्पा ने कहा, “जैसा कि आप सभी जानते हैं वह चुनाव जीतकर मोदी को कमल का फूल देना चाहती हैं। पहले उन्हें दावणगेरे की समस्याओं को समझने दीजिए। बात करना एक बात होती है। लेकिन वह तो सिर्फ रसोई में खाना बनाना जानती हैं। विपक्षी दल में जनता के सामने बात करने की ताकत नहीं है। हमने क्षेत्र में विकास के कार्य किए हैं।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस के जिस नेता ने भाजपा प्रत्याशी पर ऐसी निंदनीय टिप्पणी की है, वो कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता हैं जिनकी उम्र 92 वर्ष है। वह पाँच बार दावणगेरे दक्षिण से विधायक रहे हैं। पार्टी के सबसे पुराने नेताओं में उनका नाम आता है। कॉन्ग्रेस चाहती है कि इस सीट से शिवशंकरप्पा की बहू मल्लिकार्जुन चुनावी मैदान में उतरें। वहीं भारतीय जनता पार्टी भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जीएम सिद्धेश्वरा की पत्नी को मैदान में खड़ा किया है। ऐसे में गायत्री के खिलाफ विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा की ऐसी टिप्पणी आई और इस पर बवाल शुरू हो गया है।

गायत्री ने जवाब देते हुए कहा, “उन्होंने (कॉन्ग्रेस नेता) कहा कि हमें सिर्फ खाना बनाना आता है और हमें बस रसोई में ही रहना चाहिए। आज महिलाएँ किस पेशे में नहीं है? हम तो आसमान में उड़ रहे हैं। उस बूढ़े आदमी को नहीं पता कि महिलाएँ कितनी आगे बढ़ गई हैं, वह नहीं जानता कि सभी महिलाएँ किस प्रेस से घर में पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए खाना बनाती हैं।”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता की इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा इसकी निंदा की जा रही है। इस बीच भाजपा की प्रवक्ता मालविका अविनाश ने भी शिवशंकरप्पा की इस टिप्पणी के खिलाफ उनकी चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करवाई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -