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जिस वक्फ कानून के विरोध में इस्लामी कट्टरपंथी कर रहे हिंसा, उसका दाऊदी बोहरा समुदाय ने किया समर्थन: PM मोदी से मुलाकात कर कहा- शुक्रिया, इससे मुस्लिमों को होगा फायदा

दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय ने वक्फ संशोधन कानून का समर्थन किया है और इसके लिए पीएम मोदी को शुक्रिया कहा है। दाऊदी बोहरा शिया मुस्लिम समुदाय का मानना है कि नया वक्फ कानून "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के सिद्धांत पर आधारित है।

गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को दाऊदी बोहरा समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें 2025 के नए वक्फ (संशोधन) कानून के लिए धन्यवाद दिया। दाऊदी बोहरा के प्रतिनिधिमंडल से एक सदस्य ने कहा कि समुदाय की यह माँग लंबे समय से लंबित थी, जिसे पीएम मोदी ने नए वक्फ कानून के साथ पूरा किया।

दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय ने प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के सिद्धांत पर भरोसा भी जताया। बैठक के दौरान पीएम मोदी के साथ केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू भी शामिल थे।

1700 शिकायतों में ज्यादातर मुस्लिम महिलाएँ

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह वक्फ कानून रातों-रात नहीं बना। वक्फ कानून की बारीकियों को समझने के लिए 5 साल दिए गए। वक्फ को लेकर 1700 से ज्यादा शिकायत करने वालों में अधिकतर मुस्लिम महिलाएँ शामिल थी। वक्फ के नाम पर मजबूर और लाचार गरीबों की संपत्तियों पर कब्जा किया जा रहा था।

40 से अधिक देशों में दाऊदी बोहरा की वैश्विक उपस्थिति

दाऊदी बोहरा एक मुस्लिम समुदाय है, जो पश्चिम भारत में रहते हैं। दाऊदी बोहरा की वैश्विक उपस्थिति 40 से अधिक देशों में है। दाऊदी बोहरा का ऐतिहासिक संबंध मिस्र के फातिमी इमामों से माना जाता है, जो मिस्र से हैं। यह अहल-अल-बैत यानी पैगंबर मुहम्मद के वंशज माने जाते हैं।

वक्फ कानून की कई धाराओं पर 7 दिन की रोक

आपको बता दें, कि गुरुवार (17 अप्रैल 2025) को सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक नए वक्फ कानून की कई धाराओं पर सात दिनों तक के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में CJI संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार और केवी विश्वनाथन शामिल थे। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की प्रतिबद्धता को नोट किया। अब अगली सुनवाई 5 मई 2025 को होनी है।

अधिवक्ता विष्णु जैन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दोहरा रवैया बताया

हिंदुओं का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दोहरा रवैया बताया है। विष्णु जैन ने ये तर्क भी दिया कि आखिर AIMIM, अमानतुल्लाह ख़ान, जमीयत और कई विपक्षी राजनीतिक दलों की याचिकाएँ सीधे सुप्रीम कोर्ट में कैसे स्वीकार कर ली जाती हैं? जबकि हिन्दुओं को अयोध्या से लेकर काशी-मथुरा तक के लिए जिले की कचहरी से होकर गुजरना पड़ता है और सदियों लग जाते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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