Homeराजनीतिमुस्लिम बहुल सीट देख उम्मीदवार दिए, पर 'कोर वोटर' ही नहीं दिखा रहे ओवैसी...

मुस्लिम बहुल सीट देख उम्मीदवार दिए, पर ‘कोर वोटर’ ही नहीं दिखा रहे ओवैसी की AIMIM के लिए उत्साह: जानिए सूरत की जमीन का चुनावी मिजाज कैसा

लिंबायत और सूरत पूर्व सीट पर मुकाबला कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच ही है। AIMIM, आप सहि​त अन्य किसी दल को लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। यहाँ तक कि एआईएआईएम के लिए मुस्लिम मतदाताओं में भी उत्साह नहीं दिखता जो ओवैसी की पार्टी के कोर वोटर माने जाते हैं।

इस बार आम आदमी पार्टी (AAP) इकलौती नवागंतुक नहीं है, जिसकी गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Elections) में चर्चा है। राजनीतिक हलको में एक और पार्टी चर्चा में है। यह पार्टी है हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमिन यानी AIMIM। ओवैसी की पार्टी भी इस बार गुजरात विधानसभा चुनाव में उतरी है। कुल 182 सीटों में से 14 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।

इन 14 सीटों में से 12 पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। जिन दो सीटों पर हिंदू उम्मीदवार बनाए हैं वे एससी के लिए आरक्षित सीटें हैं। सबसे ज्यादा चर्चित सीटों की बात करें तो इनमें अहमदाबाद की दानिलिमदा, बापूनगर, जमालपुर खड़िया, वेजलपुर आदि शामिल हैं। वहीं, सूरत की लिंबायत और सूरत (पूर्व) की सीटें भी चर्चित सीटों में शामिल हैं।

अहमदाबाद की सीटों पर AIMIM को लेकर मुस्लिम मतदाताओं की सोच से ऑपइंडिया आपको पहले ही अवगत करा चुका है। इस रिपोर्ट में हम सूरत की दोनों सीटों और खासकर मुस्लिम वोटरों को लुभाने में AIMIM कितनी कामयाब हो सकती है के बारे में जानेंगे।

सूरत शहर की दो विधानसभा सीटें हैं- लिंबायत और सूरत (पूर्व)। इन दोनों सीट पर मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। एआईएमआईएम ने यही देख अपने प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी से लेकर कई नेता इन उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। वोट जुटाने के लिए आवैसी ने सूरत में एक सभा भी की है। यह सभा उन्हें काले झंडे दिखाए जाने को लेकर काफी चर्चा में रही।

एक-दो बूथ जीत पाएगी…

ऑपइंडिया से बात करते हुए लिंबायत निर्वाचन क्षेत्र के अजहर भाई ने कहा कि इस सीट पर भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच लड़ाई है। लेकिन इस बार कॉन्ग्रेस की तरफ से लोकप्रिय और बड़ा चेहरा नहीं है। यही कारण है कि बीजेपी की संगीताबेन पाटिल को जनता का समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।

एआईएमआईएम के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “पार्टी बूथ स्तर पर भी सक्रिय नहीं है। ऐसे में विधानसभा जीतना तो दूर, 1-2 बूथ भी मुश्किल से जीत पाएगी। एआईएमआईएम तो निगम चुनाव भी नहीं जीत सकती।” अजहर भाई ने बताया कि पिछले नगर निकाय चुनाव में उनके वार्ड की चारों सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी।

यह पूछे जाने पर कि मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव किस तरफ है, उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस के प्रति मुस्लिमों का का झुकाव अधिक दिखाई देता है। एआईएमआईएम को समर्थन पर उन्होंने कहा कि हजारों मुस्लिम मतदाताओं में से 2000 उनका समर्थन भी कर दे तो वे जीत नहीं सकते।

लिंबायत के ही एक अन्य व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहाँ के मुस्लिम वोटर्स कॉन्ग्रेस के समर्थन में हैं, क्योंकि लड़ाई उसके और बीजेपी के बीच ही है। मुस्लिम समुदाय में वही लोग एआईएमआईएम को वोट दे सकते हैं जो कॉन्ग्रेस से नाखुश हैं।

34 निर्दलीय समेत कुल 44 प्रत्याशी

बीजेपी ने लिंबायत सीट से मौजूदा विधायक संगीताबेन पाटिल को टिकट दिया है। कॉन्ग्रेस ने गोपाल पाटिल को उतारा है। एआईएमआईएम ने अब्दुल बशीर शेख और आम आदमी पार्टी ने पंकज तायदे को टिकट दिया है। इसके अलावा छोटी-बड़ी पार्टियों और 34 निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलाकर कुल उम्मीदवारों की संख्या 44 है।

वोटर्स के आँकड़ों को देखें तो इस सीट पर शेख वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा 11.17 फीसदी है। पाटिल वोटर्स की संख्या 9 प्रतिशत है। मुस्लिम और पाटिल वोट ही इस सीट के नतीजे तय करते हैं। बता दें कि लिंबायत सीट साल 2012 में बनी थी। तब से लगातार दो बार यहाँ से बीजेपी की संगीताबेन पाटिल जीतती आ रही हैं। हालाँकि, इस बार असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी के गढ़ में घुसपैठ की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन उन्हें खास समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है।

सूरत (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र

सूरत (पूर्व) में भी एआईएमआईएम ने उम्मीदवार उतारा है। इस सीट पर भी मुस्लिम वोटों की अहम भूमिका होती है। राणा दूसरे सबसे बड़े मतदाता समूह हैं। इसके अलावा विभिन्न हिंदू जातियों के वोट भी हैं। यहाँ कुल 14 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। बीजेपी ने मौजूदा विधायक अरविंद राणा को टिकट दिया है। कॉन्ग्रेस ने असलम साइकिलवाला को मैदान में उतारा है, जबकि एआईएमआईएम ने वसीम कुरैशी को मैदान में उतारा है। चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी ने मैदान छोड़ दिया है।

बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच लड़ाई; AIMIM-AAP का अस्तित्व नहीं

सूरत (पूर्व) सीट के निवासी साहिल बताते हैं कि यहाँ मुकाबला बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच होगा। उन्होंने कहा, “किसी तीसरे दल एआईएमआईएम या आम आदमी पार्टी का कोई अस्तित्व ही नहीं है।” उन्होंने यह भी बताया, “एआईएमआईएम का उम्मीदवार हमारे लिए क्या लेकर आया है? उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने इस क्षेत्र में क्या काम किया है। अब चुनाव आ गया है तो वोट माँगने आ गए हैं। उनका यहाँ ​वजूद नहीं है। यहाँ या तो बीजेपी जीतेगी या कॉन्ग्रेस।” एआईएमआईएम उम्मीदवार के बारे में वे कहते हैं, “हम नहीं जानते कि उनका उम्मीदवार स्थानीय है या नहीं। ऐसे में हम उन्हें कैसे वोट देंगे?”

आम आदमी पार्टी ने यहाँ अपना प्रत्याशी उतारा था, लेकिन हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद उसके प्रत्याशी ने नाम वापस ले लिया। उसके बाद डमी प्रत्याशी ने भी नाम वापस ले लिया और अब पार्टी मैदान से बाहर हो गई है। हालाँकि, आप (AAP) के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि साहिल कहते हैं कि उन्होंने इलाके में कभी आप उम्मीदवार को नहीं देखा था। वे कहते हैं, “भले ही उन्होंने (AAP) उम्मीदवार दिया था, पर उन्हें कोई वोट नहीं देता।”

कुछ और स्थानीय लोगों से बातचीत में हमने पाया कि लिंबायत और सूरत पूर्व सीट पर मुकाबला कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच ही है। AIMIM, आप सहि​त अन्य किसी दल को लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। यहाँ तक कि एआईएआईएम के लिए मुस्लिम मतदाताओं में भी उत्साह नहीं दिखता जो ओवैसी की पार्टी के कोर वोटर माने जाते हैं।

गौरतलब है कि गुजरात में दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण का मतदान एक दिसंबर और दूसरे चरण का पाँच दिसंबर को होगा। पहले चरण में सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात की 93 सीटों और दूसरे चरण में उत्तर और मध्य गुजरात की 89 सीटों पर मतदान होगा। गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणाम 8 दिसंबर को घोषित किए जाएँगे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

મેઘલસિંહ પરમાર
મેઘલસિંહ પરમાર
ઇતિહાસ-રાજકારણમાં રુચિ ધરાવતો, ઘટનાઓના ઊંડાણમાં જઈને બૃહદ પરિપેક્ષથી જોવામાં-લખવામાં વિશેષ રસ ધરાવતો પત્રકાર. ક્યારેક લેખક, ક્યારેક રિસર્ચર, ક્યારેક ફેક્ટચેકર.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अरुणाचल के सियांग डैम से लेकर मध्यप्रदेश के न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट तक का विरोध क्यों? जानिए प्रदर्शन का विदेशी फंडिंग और पादरी कनेक्शन

देश में हर बड़े विकास प्रोजेक्ट के शुरू होने से पहले ही विरोध शुरू हो जाता है। मध्य प्रदेश में परमाणु ऊर्जा परियोजना, अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर बांध सबका क्यों हो रहा विरोध?

कभी ईद पर तो कभी होली के बाद दंगे, मंदिरों पर पड़ा ताला और छीन लिए गए बिजनेस: जानें कैसे मुरादाबाद में विक्टिम मुस्लिम...

मुरादाबाद की जिस कहानी में मुस्लिमों को विक्टिम बताया जा रहा है असल में वहाँ सबसे ज़्यादा नुकसान में हिंदू ही हैं। हिंदुओं को बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक बनाया गया, उनके धंधे छीन लिए गए, उनके पुजारी मार दिए गए और उनके मंदिरों पर ताले जड़ दिए गए।
- विज्ञापन -