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मंदिर पर ताला-TMC गुंडों की धमकियाँ, मुस्लिम छात्रों की बहुलता से स्कूल में पूजा की अनुमति नहीं: बंगाल में सरस्वती पूजा में दिक्कतें पैदा करने के 4 मामले

ऑपइंडिया ने जनवरी 2025 में रिपोर्ट की थी कि कैसे पश्चिम बंगाल राज्य तृणमूल छात्र परिषद के तत्कालीन महासचिव मोहम्मद शब्बीर अली ने छात्राओं को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने सरस्वती पूजा करने की हिम्मत की तो उनके साथ बलात्कार और हत्या कर दी जाएगी।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) शासित पश्चिम बंगाल में वार्षिक हिंदू पर्व सरस्वती पूजा में कई जगहों पर बाधा डाली गई। शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के भीतर गुटबाजी के चलते उत्तर 24 परगना जिले के कमरहाटी शहर में सरस्वती पूजा बाधित हो गई।

डीडी न्यूज बांग्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेलघड़िया सर्वजनिन श्री श्री दुर्गा चौक सोसाइटी मंदिर को TMC के एक गुट ने ताला लगा दिया। इस वजह से स्थानीय हिंदू महिलाएँ देवी सरस्वती की पूजा नहीं कर पा रही हैं। अब तक TMC पार्षद इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकाल सके हैं।

वहीं स्थानीय पुलिस ने यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया कि जब तक TMC के दोनों गुट किसी साझा सहमति पर नहीं पहुँचते, तब तक ताला नहीं हटाया जाएगा। एक महिला ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह मंदिर सभी के लिए एक साझा पूजा स्थल बना रहे। यहाँ सिर्फ एक ताला होना चाहिए, लेकिन उसकी दो चाबियाँ हों, एक उनके पास और एक हमारे पास।” एक अन्य महिला ने कहा, “यह किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है। यह मंदिर सबका है।”

ममता बनर्जी के अल्मा मेटर में सरस्वती पूजा आयोजित करने पर TMC नेता ने छात्राओं को दी धमकी

दक्षिण कोलकाता स्थित सरकारी सहायता प्राप्त जोगेश चंद्र चौधरी कॉलेज की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि एक TMC नेता ने सरस्वती पूजा आयोजित करने को लेकर छात्राओं को धमकी दी। पीड़िता के अनुसार, उक्त TMC नेता की पहचान दाऊद आलम मोल्ला के रूप में हुई है।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में छात्रा कहती है, “दाऊद आलम मोल्ला बाहर खड़ा है। उसने मुझे धमकी दी है कि वह मेरी LLM को f*** कर देगा।” संयोग से जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी का अल्मा मेटर है।

इससे पहले, जनवरी 2025 में ऑपइंडिया ने रिपोर्ट की थी कि पश्चिम बंगाल राज्य तृणमूल छात्र परिषद के तत्कालीन महासचिव मोहम्मद शब्बीर अली ने सरस्वती पूजा करने पर छात्राओं को बलात्कार और हत्या की धमकी दी थी।

TMC गुटों की आपसी लड़ाई से रुका सरस्वती पूजा समारोह

शुक्रवार (23 जनवरी 2026) को कूचबिहार जिले के दिनहाटा कॉलेज में सरस्वती पूजा मंडप को छोड़ दिया गया, जब सत्तारूढ़ TMC के दो गुटों के बीच झड़प हो गई। ABP आनंदा की रिपोर्ट के अनुसार, बाद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बुलाया गया। मामले की जानकारी मिलते ही दिनहाटा थाना प्रभारी और SDPO कॉलेज परिसर पहुँचे।

पूजा में शामिल होने आए हिंदू श्रद्धालुओं को अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए वहाँ से भागना पड़ा। घटनास्थल से सामने आए दृश्य बताते हैं कि कॉलेज परिसर को TMC के गुंडों ने रणक्षेत्र में बदल दिया।

50% से अधिक छात्र मुस्लिम होने के कारण स्कूल परिसर में हिंदू छात्रों को सरस्वती पूजा की अनुमति नहीं

उत्तर 24 परगना जिले के बारासात शहर से सामने आए एक अन्य मामले में हिंदू छात्रों को स्कूल परिसर के भीतर सरस्वती पूजा आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अनुमति इसलिए नहीं दी गई क्योंकि स्कूल में 50% से अधिक छात्र मुस्लिम थे।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में पुलिसकर्मी छात्रों को देवी सरस्वती की पूजा करने से रोकते नजर आए। बाद में हिंदू छात्रों को मजबूरन स्कूल परिसर के बाहर, फुटपाथ पर पूजा आयोजित करनी पड़ी।

प्रदीप चटर्जी नामक एक व्यक्ति को यह कहते सुना गया, “उन्होंने कहा कि यहाँ पूजा नहीं हो सकती क्योंकि इस स्कूल में हिंदू अल्पसंख्यक हैं… पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं की हालत में कोई फर्क नहीं है।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने देवी सरस्वती को ‘दरवाजे से बाहर’ कर दिया, जिससे छात्रों को सड़क किनारे देवी को पुष्प अर्पित करने पड़े।

इस घटना की बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कड़ी निंदा की। उन्होंने ट्वीट कर पूछा, “क्या पश्चिम बंगाल अब बांग्लादेश बन गया है?” उन्होंने आगे कहा, “यह घटना हमें एक बात सिखाती है, अगर हिंदू अल्पसंख्यक बन गए, तो उनके साथ कैसा व्यवहार होगा?”

उपरोक्त चारों घटनाएँ स्थानीय बंगाली मीडिया में रिपोर्ट की गई हैं। पश्चिम बंगाल में अक्सर ऐसा देखा गया है कि हिंदू अधिकारों से जुड़ी खबरों को मुख्यधारा का मीडिया नजरअंदाज कर देता है। ऐसे में यह आश्चर्यजनक नहीं होगा अगर सरस्वती पूजा में बाधा के मामलों की संख्या दर्जनों तक पहुँच जाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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