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‘मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचने आया हूँ’: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले – 2047 की कर रहा हूँ तैयारी

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वो कर्नाटक से सीधे यहाँ पहुँचे, क्योंकि 2024 छोड़िए, साल 2029 भी छोड़िए, बल्कि वो साल 2047 (विकसित भारत का लक्ष्य) की तैयारी में लगे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के फिनाले को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं चाहता तो टैक्स पेयर के पैसों से जनता को मुफ्त की चीजें दे देता, जिससे वाहवाही तो हो जाती, लेकिन देश का क्या होता? इसीलिए मैंने आसान नहीं, बल्कि मुश्किल रास्ते को चुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं मक्खन पर नहीं, पत्थर पर लकीर खींचने आया हूँ।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वो कर्नाटक से सीधे यहाँ पहुँचे, क्योंकि 2024 छोड़िए, साल 2029 भी छोड़िए, बल्कि वो साल 2047 (विकसित भारत का लक्ष्य) की तैयारी में लगे हैं। इस कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘पिछले 10 साल में 1500 से ज्यादा पुराने कानून समाप्त किए हैं, इनमें से कितने कानून अंग्रेजों के समय में बने हुए थे, लोगों के जीवन में सरकार का दबाव भी नहीं और अभाव भी नहीं होना चाहिए। 2047 तक मैं हर एक की जिंदगी से सरकार को बाहर निकाल दूँगा। सामान्य नागरिक को अपनी जिंदगी को जीने के लिए खुला आसमान मिलना चाहिए।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं मक्खन पर लकीर करने नहीं बल्कि पत्थर पर लकीर करने आया हूँ। मैं आपके बच्चों के हाथों में एक समृद्ध हिंदुस्तान देना चाहता हूँ। हमारी सरकार के गवर्नेंस मॉडल को समझना है तो पीएसयू को देखिए। बहुत कम पीएसयू होते हैं जो देश के काम आते हैं, वरना बर्बादी लाते हैं। पहले सरकारों के चलते बीएसएनएल और एमटीएनएल बर्बाद हो ग।. बीएचएल और एलआईसी क्या है आज देखिए। आज एचईएल के पास आज एशिया के पास सबसे बड़ी हेलिकॉप्टर बनाने वाली फैक्ट्री है। हमारी सरकार के कदमों की बदौलत आज पीएसयू के प्रॉफिट लगातार बढ़ रहे हैं। दस वर्षों में पीएसयू की नेटवर्थ 9.5 लाख से बढ़कर 78 लाख करोड़ तक पहुँच गई है।”

पीएम मोदी ने कहा, “पहले की सरकार के समय आपने इज ऑफ लिविंग जैसे शब्द सुने ही नहीं होंगे। जो उस दौर में सक्षम थे वो सुविधाओं के सबसे बड़े हकदार बन गए थे… बीच में पिसता कौन था वो देश का सामान्य नागरिक जो आरके लक्ष्मण के कार्टूनों में झलकता है। इस कॉमन मैन की इज ऑफ लिविंग को भी हमारी सरकार ने प्राथमिकता में रखा। पहले पासपोर्ट बनवाना हो तो औसतन पचास दिन लगते थे। इन पचास दिनों में भी लोगों को पचास फोन करने पड़ते थे और सिफारिश लगानी पड़ती है।”

उन्होंने आगे कहा, “आज एक पासपोर्ट औसतन 5-6 दिन में आपके घर पहुँच जाता है। सब कुछ वहीं है लेकिन बदलाव कैसे आया, लेकिन सरकार ने जैसे ही इज ऑफ लिविंग पर ध्यान देना शुरू किया तो सिस्टम में खुद बदलाव आ गया। पहले 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज तकरीबन सवा पाँच सौ पासपोर्ट सेवा केंद्र हैं। ऐसे और भी कई बदलाव आए हैं।”

पीएम स्वनिधि योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पीएम स्वनिधि से स्ट्रीट वेंडर को सस्ता और आसान लोन बिना गारंटी के मिला है। इसके पीछे का कारण है कि मेरी जिंदगी का जो तजुर्बा है, मैंने गरीबों की अमीरी भी देखी है और अमीरों की गरीबी भी देखी है। मेरा सपना था कि स्ट्रीट वेंडर को मदद करेंगे। मैंने कोविड का वह दौर देखा जब इन स्ट्रीट वेंडर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। तब मैंने तय किया था कि मैं इनकी जरूर मदद करूँगा। भारत की डिजिटल क्रांति में ये रेहड़ी पटरी वाले अहम भूमिका निभा रहे हैं।’

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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