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जिस ‘वफादार’ को राहुल गाँधी ने मौत के बाद लपेटा, उनका बेटा भी सोनिया पुत्र पर ‘नरम’: ED के सामने नेशनल हेराल्ड में लिया था मोतीलाल वोरा का नाम

नेशनल हेराल्ड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला साल 2010 में बनी गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली एक कंपनी यंग इंडियन लिमिटेड का है। यह कंपनी 5 लाख रुपए की पूंजी से शुरू हुई थी, लेकिन अभी इसके पास करीब 800 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

आजीवन गाँधी परिवार के वफादार रहे कॉन्ग्रेस के दिवंगत नेता मोतीलाल वोरा (Motilal Vora) पर यंग इंडिया लिमिटेड और नेशनल हेराल्ड (National Herald) की पैरेंट कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के सभी लेनदेन का आरोप लगाने के बाद उनके बेटे ने प्रतिक्रिया दी है।

मोतीलाल वोरा के बेटे और कॉन्ग्रेस (Congress) विधायक अरुण वोरा (Arun Vora) ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) उनके पिता पर इस तरह का आरोप नहीं लगा सकते।

रिपोर्ट के मुताबिक, अरुण वोरा ने कहा है, ”ये निराधार आरोप हैं। कॉन्ग्रेस नेतृत्व गलत नहीं हो सकता और न ही वोरा जी। राहुल जी मेरे पिता पर इस तरह के आरोप नहीं लगा सकते।”

अरुण वोरा ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेतृत्व कभी गलत नहीं हो सकता और राहुल गाँधी द्वारा लेनदेन के लिए पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोहरा को जिम्मेदार माने जाने की मीडिया खबरों को उन्होंने निराधार बताया। मीडिया रिपोर्ट्स में कही जा रही है कि ED से पूछताछ में राहुल गाँधी ने कहा कि AJL के लेनदेन के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता मोतीलाल वोरा थे।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (15 जून 2022) को लगातार तीसरे दिन करीब आठ घंटे तक पूछताछ की।

वहीं ED के अधिकारियों ने राहुल गाँधी को पूछताछ के लिए शुक्रवार (17 जून 2022) को भी बुलाया है। हालाँकि, राहुल गाँधी ने ED से तीन दिनों के रेस्ट की माँग की है और सोमवार को पेश होने के लिए कहा है। हालाँकि, इस पर ED की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस मामले में ED की टीम मोतीलाल वोरा, मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन बंसल इत्यादि से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। इस साल अप्रैल में की गई पूछताछ के दौरान कई ED को कई इनपुट्स मिले थे। इसी आधार पर जाँच का दायरा राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी तक पहुँचा है।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला साल 2010 में बनी गाँधी परिवार के स्वामित्व वाली एक कंपनी यंग इंडियन लिमिटेड का है। यह कंपनी 5 लाख रुपए की पूंजी से शुरू हुई थी, लेकिन अभी इसके पास करीब 800 करोड़ रुपए की संपत्ति है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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