Homeराजनीतिमल्लिकार्जुन खड़गे हाजिर हो: पंजाब की संगरूर कोर्ट ने बुलाया, PFI से बजरंग दल...

मल्लिकार्जुन खड़गे हाजिर हो: पंजाब की संगरूर कोर्ट ने बुलाया, PFI से बजरंग दल की तुलना पर ₹100 करोड़ की मानहानि का केस

कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान अपने घोषणा-पत्र में कॉन्ग्रेस ने बजरंग दल की तुलना पीएफआई के साथ की थी। सत्ता हासिल करने पर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का भी वादा किया था। हालाँकि इस पर विवाद होने कॉन्ग्रेस बैकफुट पर आ गई थी।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पंजाब की संगरूर कोर्ट ने तलब किया है। मामला 100 करोड़ की मानहानि केस से जुड़ा है। यह केस हिंदू सुरक्षा परिषद बजरंग दल हिंद के संस्थापक हितेश भारद्वाज ने की है। उन्होंने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बजरंग दल की तुलना प्रतिबंधित इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से करने को लेकर याचिका दायर कर रखी है।

संगरूर की सीनियर डिवीजन कोर्ट की सिविल जज रमनदीप कौर ने खड़गे को 10 जुलाई 2023 को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। हितेश भारद्वाज ने कहा है, “मैंने देखा कि घोषणा-पत्र के 10 वें पेज पर कॉन्ग्रेस ने बजरंग दल की तुलना देशद्रोही संगठनों से की है और चुनाव जीतने पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है। इसके बाद मैंने कोर्ट में याचिका दायर की।”

कर्नाटक विधानसभा चुनावों के दौरान अपने घोषणा-पत्र में कॉन्ग्रेस ने बजरंग दल की तुलना पीएफआई के साथ की थी। सत्ता हासिल करने पर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का भी वादा किया था। हालाँकि इस पर विवाद होने कॉन्ग्रेस बैकफुट पर आ गई थी। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली (Veerappa Moily) ने कहा था कि बजरंग दल (Bajrang Dal) पर प्रतिबंध लगाने का काॅन्ग्रेस का कोई इरादा नहीं है। न तो पार्टी के पास ऐसा कोई प्रस्ताव है और न ही राज्य सरकार प्रतिबंध लगा सकती है। इसके बाद कर्नाटक कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सरकार बनने पर हर जिले में बजरंग बली का मंदिर बनाने का वादा किया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -